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‘इंक्रीमेंट’ और ‘टाइम स्केल वेतन’ पर हाइकोर्ट का बड़ा आदेश, नहीं होंगे हकदार

MP News: कोर्ट ने कहा कि केवल चयन सूची में नाम होना या पिछली तिथि से वरिष्ठता का दावा, वास्तविक कार्य किए बिना वेतन वृद्धि का आधार नहीं बन सकता।

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High Court

High Court प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

MP News: हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सहायक जिला अभियोजन अधिकारी पद से जुड़े दो मामलों में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना वास्तविक सेवा किए केवल वरिष्ठता के आधार पर इंक्रीमेंट और टाइम-स्केल वेतन का लाभ नहीं दिया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने पारित किया।

मयंक भारद्वाज अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वर्ष 2011 की चयन सूची में उनका स्थान निर्धारित था, इसलिए उन्हें 2011 से ही इंक्रीमेंट और 8 वर्ष पूर्ण होने पर टाइम-स्केल वेतन का लाभ मिलना चाहिए।

लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता

उन्होंने कहा कि नियुक्ति में हुई देरी उनके कारण नहीं थी, इसलिए वेतन संबंधी लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि याचिकाकर्ताओं की वास्तविक नियुक्ति वर्ष 2016 में हुई और ग्रेडेशन सूची में भी वरिष्ठता उसी वर्ष से दर्शाई गई है।

कोर्ट ने कहा कि केवल चयन सूची में नाम होना या पिछली तिथि से वरिष्ठता का दावा, वास्तविक कार्य किए बिना वेतन वृद्धि का आधार नहीं बन सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इंक्रीमेंट सेवा में संतोषजनक कार्य और आचरण के आधार पर अर्जित होता है।


दोनों याचिकाएं खारिज

जब याचिकाकर्ताओं ने 2011 से 2016 के बीच कोई कार्य नहीं किया, तो उस अवधि के लिए इंक्रीमेंट देने का प्रश्न ही नहीं उठता। इसी तरह, टाइम-स्केल वेतन के लिए भी विभागीय मूल्यांकन आवश्यक है, जो बिना कार्य निष्पादन के संभव नहीं है। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं और कहा कि याचिकाकर्ता किसी भी प्रकार के पिछली तिथि से वेतन लाभ के हकदार नहीं हैं।

विभागीय जांच के आदेश

निजी तस्वीरें वायरल करने के गंभीर मामले में लापरवाही बरतने पर हाईकोर्ट ग्वालियर ने बड़ा एक्शन लिया है। न्यायालय ने गुना के कोतवाली थाना प्रभारी टीआई चंद्रप्रकाश सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को न्यायिक आदेशों की घोर अवहेलना और अधिकारों के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।