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782 दिन की देरी पर हाईकोर्ट की फटकार: अधिकारी जानबूझकर अपीलें देर से दाखिल कर निजी पक्षों को फायदा पहुंचा रहे

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपील दायर करने में 782 दिन की भारी देरी को लेकर राज्य शासन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने कहा कि यह स्थिति वाकई चौंकाने वाली है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बावजूद राज्य के अधिकारी अपनी कार्यशैली सुधारने […]

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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपील दायर करने में 782 दिन की भारी देरी को लेकर राज्य शासन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने कहा कि यह स्थिति वाकई चौंकाने वाली है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बावजूद राज्य के अधिकारी अपनी कार्यशैली सुधारने को तैयार नहीं हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर अपीलें देरी से दाखिल कर निजी पक्षों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा रहा है। हालांकि निर्णय पहले से हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए न्यायालय ने नरम दृष्टिकोण अपनाते हुए देरी माफ कर दी। लेकिन इसके साथ ही ओआईसी (प्रभारी अधिकारी) पर 25 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है।

क्या है मामला

यह आदेश राज्य शासन बनाम एमएस राजकमल बिल्डर्स, भारत कमल शर्मा व अन्य में पारित किया गया। राज्य शासन ने 11वें जिला न्यायाधीश, ग्वालियर द्वारा 17 दिसंबर 2021 को पारित निर्णय और डिक्री को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन यह अपील 782 दिन की देरी से प्रस्तुत की गई।राज्य शासन की ओर से देरी माफ करने के लिए सीमा अधिनियम की धारा 5 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि देरी के लिए कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।