
Divorce (Photo Source- freepik)
Divorce:मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ ने पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है, तो अपील को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं बचता। इसके साथ ही फैमिली कोर्ट, ग्वालियर द्वारा तलाक याचिका खारिज करने का पूर्व आदेश निरस्त कर दिया गया।
समझौते के अनुसार पति द्वारा पत्नी को स्थायी भरण-पोषण के रूप में कुल 35 लाख रुपए दिए जाएंगे। यह राशि दो डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से अदा की जाएगी, जिसमें 25 लाख और 10 लाख रुपए शामिल हैं। इसके बदले पत्नी ने तलाक के लिए सहमति दी है और भविष्य में किसी भी प्रकार के भरण-पोषण या संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा न करने का वचन दिया है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों से उनकी मंशा को लेकर सीधे प्रश्न किए, जिस पर दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे आपसी सहमति से अलग होना चाहते हैं। कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि दोनों का विवाह 28 नवंबर 2011 को ग्वालियर में संपन्न हुआ था और वे जनवरी 2017 से अलग-अलग रह रहे हैं। कोर्ट के अनुसार, अब पुनर्मिलन की कोई संभावना शेष नहीं है।
सुनवाई के दौरान पति और पत्नी दोनों स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को अवगत कराया कि अपील लंबित रहने के दौरान उनके बीच समझौता हो गया है और अब वे आपसी सहमति से विवाह विच्छेद चाहते हैं। इसके लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(बी) के तहत संयुक्त आवेदन प्रस्तुत किया गया।
यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की युगल पीठ ने पारित किया। पति ने फैमिली कोर्ट, ग्वालियर के 27 जनवरी 2024 के उस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1) के तहत तलाक की याचिका खारिज कर दी गई थी।
Published on:
28 Jan 2026 03:37 pm

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