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क्या प्रमुख सचिव जानबूझकर कोई तथ्य छिपा रहे, कौन सेवा निवृत्त हो चुके हैं, कौन सेवा में हैं, सूची की तलब

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव को सख्त चेतावनी दी है। न्यायमूर्ति जीएस अहलुवालिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जवाब में आवश्यक तथ्य और स्पष्ट प्लीडिंग नहीं की गई, तो यह माना जाएगा कि प्रमुख सचिव जानबूझकर न्यायालय से तथ्य छिपा रहे हैं। […]

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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव को सख्त चेतावनी दी है। न्यायमूर्ति जीएस अहलुवालिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जवाब में आवश्यक तथ्य और स्पष्ट प्लीडिंग नहीं की गई, तो यह माना जाएगा कि प्रमुख सचिव जानबूझकर न्यायालय से तथ्य छिपा रहे हैं। इतना ही नहीं, कोर्ट ने प्रमुख सचिव को एक और अहम निर्देश देते हुए कहा कि वर्ष 2012 से लेकर एमसीसी दायर किए जाने तक राजस्व विभाग में पदस्थ रहे सभी अधिकारियों का विवरण तालिका के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इस विवरण में यह स्पष्ट करना होगा कि कौन अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि क्या है और जो अभी सेवा में हैं, उनकी वर्तमान पदस्थापना कहां है।

मामला मध्यप्रदेश शासन बनाम रामदयाल एवं अन्य से संबंधित एमसीसी का है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जो जवाब पेश किया गया है, वह अधूरा है। जवाब के साथ कुछ दस्तावेज जरूर संलग्न किए गए हैं, लेकिन उन दस्तावेजों के संबंध में कोई स्पष्ट तथ्यात्मक विवरण (प्लीडिंग) उत्तर में दर्ज नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से एक दिन का अतिरिक्त समय मांगा गया, ताकि विस्तृत और पूर्ण जवाब प्रस्तुत किया जा सके।इस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि प्रमुख सचिव द्वारा किसी भी प्रकार की प्लीडिंग छोड़ दी जाती है, तो उन्हें जवाब के साथ लगाए गए किसी भी दस्तावेज का हवाला देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में यह अनुमान लगाया जाएगा कि प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, जानबूझकर तथ्यों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। याचिका पर 30 जनवरी को फिर से सुनवाई होगी।

क्या है मामला

मामला दीनारपुर स्थित 9 बीघा सीलिंग की जमीन से जुड़ा है। इस जमीन का केस शासन हार गया था। इसको लेकर हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन अपील न्यायालय में खारिज हो गई। अपील को फिर से सुनवाई में लाने के लिए एमसीसी दायर की।

- लंबे समय बाद एमसीसी दायर की। इसको लेकर कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्यौरा मांगा है। प्रमुख सचिव पर 25 हजार का जुर्माना भी लग चुका है।