
नगर निगम के वित्तीय वर्ष 2026-27 का करीब 2350 करोड़ रुपए का बजट मेयर इन काउंसिल ने फाइनल कर परिषद को भेज दिया है।
नगर निगम के वित्तीय वर्ष 2026-27 का करीब 2350 करोड़ रुपए का बजट मेयर इन काउंसिल ने फाइनल कर परिषद को भेज दिया है। यह बजट वित्त विभाग द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें करीब 20 लाख रुपए के शुद्ध लाभ का दावा किया गया है। फरवरी-मार्च 2026 में महापौर परिषद की बैठक में इसे पेश करेंगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो सपने बीते साल बजट में दिखाए गए थे, वही सपने इस बार फिर दोहराए जा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि एक साल बाद भी कई योजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकल पाईं।बता दें कि एमआइसी ने 15 जनवरी को बजट फाइनल कर परिषद की ओर भेज दिया है।
620 करोड़ जनकार्य विभाग को, फिर भी सड़कें जर्जर
बजट में जनकार्य विभाग के लिए 620 करोड़ रुपए रखे गए हैं। सड़कों की मरम्मत 56 करोड़,नाले-नालियां 10 करोड़,स्मार्ट सिटी मद 70 करोड़,अन्य जनकार्य 150 करोड़। इसके बावजूद शहर की सड़कों की हालत बदहाल है। गड्ढे, धंसी सड़कें और उखड़ी डामर नगर निगम के दावों की पोल खोल रहे हैं।
अमृत, चंबल और करोड़ों खर्च… फिर भी पानी-सीवर फेल
निगम पहले ही अमृत योजना फेज-1 में 800 करोड़, अमृत योजना फेज-2 में 438 करोड़,चंबल वाटर प्रोजेक्ट,प्रदूषण नियंत्रण, शौचालय और सड़कों पर 150 करोड़ खर्च कर चुका है। इसके बावजूद शहर में गंदगी, गंदा पानी, बंद स्ट्रीट लाइट और बदहाल शौचालय आज भी आम दृश्य हैं। यही कारण है कि जनता में निगम को लेकर भारी नाराजगी है।
बजट में फिर शामिल-चार्जिंग स्टेशन से लेकर कन्वेंशन सेंटर तक
इस बार भी बजट में शामिल किए गए हैं, इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन, डस्ट फ्री सड़कें, स्मार्ट टॉयलेट व शौचालय, चौपाटी, संग्रहालय, परिषद भवन, नया कन्वेंशन सेंटर, पीएम ई-बस सेवा, सफाई शुल्क व संपत्तिकर सुधार। हालांकि ये सभी घोषणाएं पिछले साल के बजट में भी थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई योजनाएं आज भी शुरू नहीं हो सकीं।
ये रहेगा प्रस्तावित बजट (संक्षेप में)
जनकार्य विभाग: 620 करोड़
अमृत योजना फेज-2 (पानी-सीवर): 438 करोड़
पीएचई: 50 करोड़
बिजली विभाग: 88 करोड़
फायर ब्रिगेड: 8 करोड़
पीआईयू: 50 करोड़
कार्यशाला: 74.89 करोड़
पार्क विभाग: 11 करोड़
जीएडी: 8 करोड़
मुख्यमंत्री अधोसंरचना: 7 करोड़
पीएम ई-बस सेवा: 16 करोड़
सौर ऊर्जा: 7 करोड़
चार्जिंग स्टेशन: 1.50 करोड़
इस बार मौलिक निधि पर लग सकता है ब्रेक
महापौर, सभापति, पार्षद और वार्ड समितियों की मौलिक निधि बढ़ाने को लेकर बीते वर्ष परिषद में हुए विवाद और हंगामे के चलते इस बार मौलिक निधि की राशि कम रखे जाने की संभावना है।
खर्चों में कटौती का दावा, आय बढ़ाने की नई रणनीति
बढ़ते बिजली बिल को देखते हुए एनर्जी ऑडिट और सौर ऊर्जा पर जोर
कचरे से बिजली उत्पादन
अब चुंगी क्षतिपूर्ति के भरोसे नहीं, बल्कि संपत्तिकर और जलकर से सैलरी
निगम संपत्तियों पर पीपीपी मोड से दुकानें व कॉम्पलेक्स
चंबल प्रोजेक्ट के पानी से आय बढ़ाने की योजना
पीएम ई-बस और आईएसबीटी से राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य
Published on:
29 Jan 2026 12:55 pm
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