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न टमाटर का स्वाद, न मिर्च का तीखापन… आप जो सॉस खा रहे, वह है चावल और स्टार्च का घोल

खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम (निरीक्षक लोकेंद्र सिंह, राजेश गुप्ता, दिनेश निम, निरुपमा शर्मा) ने मुरार स्थित 'केवाई उद्योग' पर छापा मारा।

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खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम

ग्वालियर. चाउमीन, बर्गर और पेटीज के साथ जिस चटपटे लाल-हरे सॉस का आप स्वाद ले रहे हैं, वह सब्जी नहीं बल्कि सड़ा हुआ आटे का घोल है। शहर के काफी फास्ट फूड ठेलों और रेस्टोरेंट्स में परोसा जाने वाला सॉस असल में चावल के आटे और स्टार्च पाउडर का मिश्रण है। इसमें सब्जियों का पल्प (गूदा) एक प्रतिशत भी नहीं होता। स्वाद और रंग के लिए इसमें घातक सिंथेटिक रंग और एसेंस (खुशबू) मिलाए जा रहे हैं। खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की हालिया छापामार कार्रवाई में ये काला सच सामने आया है। कायदे से टमाटर सॉस को टमाटर और कद्दू के पल्प से बनाया जाना चाहिए, जबकि ग्रीन चिली सॉस में हरी मिर्च का बेस होना चाहिए। लेकिन इस प्रक्रिया में खर्च अधिक आता है और मशीनों की जरूरत पड़ती है। ग्वालियर की कुछ फैक्ट्रियों ने इसका शॉर्टकट ढूंढ लिया है। वे चावल के मांड (आटे) और सस्ते स्टार्च पाउडर को गाढ़ा कर उसमें लाल-हरा रंग मिला देती हैं। यही नकली सॉस बोतलों और कैन में भरकर शहर के हजारों फास्ट फूड ठेलों पर सप्लाई किया जा रहा है।

नकली सॉस की केमिस्ट्री

-आधार: चावल का आटा और घटिया क्वालिटी का स्टार्च।
-रंग: तीखा लाल और गहरा हरा करने के लिए सिंथेटिक कलर।
-स्वाद: मिर्च और टमाटर जैसा फील देने के लिए केमिकल एसेंस।
-नुकसान: लिवर और पाचन तंत्र पर बुरा असर, कैंसरकारी तत्वों की संभावना।

फास्ट फूड सेंटरों पर खप रहा आटे वाला सॉस

शहर में चार पहिया वाहनों पर चलने वाले फास्ट फूड सेंटरों की बाढ़ आ गई है। इन सेंटरों के बीच रेट को लेकर भारी कंपटीशन है। सस्ता माल बेचने और अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में ये संचालक फैक्ट्रियों से आने वाला घटिया दर्जे का चावल-स्टार्च सॉस धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। पेटीज से लेकर समोसे तक में यही नकली सॉस परोसा जा रहा है, जो पेट से जुड़ी बीमारियों और एलर्जी का बड़ा कारण बन सकता है।

मुरार में पकड़ा गया नकली सॉस का बड़ा अड्डा

खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम (निरीक्षक लोकेंद्र सिंह, राजेश गुप्ता, दिनेश निम, निरुपमा शर्मा) ने मुरार स्थित 'केवाई उद्योग' पर छापा मारा। यहां पलक चिली सॉस और पलक वेजिटेबल सॉस के नाम पर जो माल बन रहा था, उसमें केवल चावल और स्टार्च का उपयोग पाया गया। टीम ने मौके से 96 केन जब्त कीं, जिनकी कीमत करीब 27 हजार रुपए है। फैक्ट्री को तत्काल सील कर दिया गया है। विभाग को सूचना मिली है कि ट्रांसपोर्ट नगर, मुरार और लश्कर क्षेत्र में ऐसी कई और फैक्ट्रियां चल रही हैं, जो न केवल ग्वालियर बल्कि आसपास के शहरों में भी यह धीमा जहर भेज रही हैं।

इनका कहना है

नियमों के अनुसार सॉस सब्जियों के पल्प से ही बनना चाहिए। चावल और स्टार्च का उपयोग मिलावट और धोखाधड़ी है। मुरार की फैक्ट्री सील की गई है, अब शहर की अन्य संदेहास्पद फैक्ट्रियों की तलाश जारी है।
लोकेंद्र सिंह, खाद्य निरीक्षक व दस्ता प्रभारी

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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