
MP High Court on chirayu medical college case big Update
MP High Court: हाईकोर्ट की युगलपीठ ने चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल से जुड़़े एमबीबीएस दाखिला घोटाले में आरोपियों की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस जीएस अहलुवालिया और जस्टिस अनिल वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसे तथ्य मौजूद हैं, जिनसे प्रथमदृष्टया आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का संदेह बनता है। इसलिए न तो एफआइआर और न ही ट्रायल कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान में हस्तक्षेप किया जा सकता है। कोर्ट (MP High Court) ने टिप्पणी करते हुए कहा कि साजिश खुले तौर पर नहीं रची जाती, पक्षकारों के व्यवहार व उनके काम करने के तरीके से पता लगाया जाता है।
दरअसल, भोपालके चिरायु में सरकारी कोटे की 63 सीटें थीं। 2011 में 47 सीटों को गलत तरीके से खाली रखा गया। बाद में इन सीटों को मैनेजमेंट कोटे के तहत बेच दिया। ऐसे विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया, जिन्होंने काउंसिलिंग में भाग नहीं लिया था। व्यापमं कांड के खुलासे के समय ग्वालियर के झांसी रोड थाने में तीन के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। एसआइटी चालान पेश कर चुकी थी।
2015 में केस सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ के हैंडओवर हो गया। सीबीआइ ने पांच साल जांच की। 57 नए आरोपित बनाए गए हैं। सरकारी कोटे की सीट छोडऩे वाले, सीट खरीदने वाले, चिरायु मेडिकल कालेज के प्रबंधन के अधिकारी, बिचौलियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। 60 लोगों के खिलाफ चालान पेश कर दिया।
ट्रायल शुरू हुआ तो, आरोपियों की तरफ से 19 याचिकाएं लगी थीं। इनमें से सात आरोपी डॉ. प्रज्ञा दिलीप कापदेव, डॉ. दिलप्रीत कौर खानूजा, डॉ. हरप्रीत अरोड़ा, डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. दीक्षा चाचरिया, डॉ. निहिल निगम, डॉ. फरहत खान, डॉ. फराह खान के वकीलों ने कोर्ट में बहस की। 10 ने याचिका वापस ले ली। नौ याचिकाएं कोर्ट में चल रहीं थीं, उन पर शुक्रवार को सुनवाई कर कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दीं। सीबीआइ की तरफ से दर्ज कराई गई एफआइआर को बरकरार रखा।
आरोपी याचिकाकर्ताओं की ओर से भी कोर्ट (MP High Court) में तर्क दिए गए। कहा गया कि कुछ सीटें खाली रहीं और कॉलेज ने नोटिस लगाकर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे। ऐसे में अंतिम दिन प्रवेश को अवैध नहीं माना जा सकता। कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि सह-आरोपी डॉ. अजय गोयनका के विरुद्ध पूर्व में सुनवाई के दौरान कार्यवाही रद्द की जा चुकी है, ऐसे में मामले में उन्हें भी राहत दी जानी चाहिए।
सीबीआइ के अधिवक्ता राजू शर्मा ने तर्क दिया कि चिरायु ने अंतिम तारीख पर 47 सीटों पर प्रवेश दिखाया। 39 उम्मीदवार या तो काउंसिलिंग में चयनित नहीं थे या न्यूनतम अंकों के कारण प्रवेश के पात्र नहीं थे। 8 उम्मीदवार डीमैट कोटा से थे, लेकिन उन्हें राज्य के कोटा में दर्शाया गया था। कई मामलों में फीस की रसीदें 30 सितंबर 2011 की दिखाई गईं, भुगतान पहले कर दिया गया था। इससे हेरफेर का संदेह उभरा।
Published on:
17 Jan 2026 09:27 am
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
