
हनुमानगढ़: वर्ष 2019 में कलक्ट्रेट में आत्महत्या करने वाले किसान का पड़ा शव।
-जिले में बैंकों के कर्ज तले दबे किसान
-कृषि प्रधान जिले में एमएसपी के लिए भी तरस रहे किसान
हनुमानगढ़. गत एक सप्ताह से नहरों में कम पानी मिलने से किसान पसोपेश की स्थिति में हैं। इंदिरागांधी नहर में पंजाब की ओर से पानी घटाने के बाद हालांकि प्रथम चरण की नहरों के रेग्यूलेशन पर अभी तक किसी तरह का ज्यादा असर नहीं पड़ा है। इस बीच नोहर क्षेत्र में किसानों को समुचित पानी नहीं मिलने से किसान आक्रोशित हो रहे हैं। खेतों में अपेक्षित उपज नहीं होने तथा उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से जिले के किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। खेती में लागत बढऩे की वजह से किसानों आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। खेत-खलिहानों में खुशहाली लौटाने के लिए सरकार को धरातल पर योजनाओं को लागू करना होगा। नहरों में मांग के अनुसार सिंचाई पानी चलाना होगा। तभी कृषि प्रधान जिले को आर्थिक ऊंचाई मिल सकेगी।
हनुमानगढ़ जिले में इस बार करीब सात लाख हैक्टेयर में रबी फसलों की बिजाई की गई है। इसमें गेहूं व सरसों की फसल प्रमुख है। इस तरह इस समय फसलों को सिंचाई पानी की ज्यादा जरूरत है। लेकिन बांधों में कम पानी उपलब्ध होने से बीते पखवाड़े में इंदिरागांधी नहर में करीब दो हजार क्यूसेक पानी घटाकर नहर को चार में दो समूह की बजाय तीन में एक समूह में चलाने का रेग्यूलेशन लागू किया गया। इस तरह अब किसानों को करीब 25 दिन के अंतराल में खेती के लिए नहरी पानी मिल सकेगा। कुछ विधायकों ने पूर्व की तरह चार में दो समूह के रेग्यूलेशन को मार्च तक लागू रखने की मांग रखी थी। लेकिन बांधों में कम पानी उपलब्ध होने से नहर का रेग्यूलेशन बदलने पर सामूहिक सहमति बनी थी। जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़ के अधीक्षण अभियंता रामाकिशन के अनुसार गत दिनों पंजाब की ओर नहरों की सुरक्षा का हवाला देकर पानी घटा दिया गया था। पंजाब जाकर अधिकारियों से चर्चा के बाद स्थिति में लगातार सुधार है। विभाग स्तर पर शेयर के अनुसार पानी लेने का प्रयास लगातार जारी है।
नहीं मिलता एमएसपी
जिले में कुछ फसलें ऐसी है, जिनकी एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही है। बड़े पैमाने पर धान की खेती होने के बावजूद जिले में सरकार इसकी खरीद को लेकर खरीद केंद्र स्वीकृत नहीं करती है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ती है। काफी आंदोलन के बाद भी सरकार एमएसपी देने की समुचित व्यवस्था नहीं कर रही है। किसान नेता ओम जांगू कहते हैं कि खेती अब फायदे का सौदा नहीं रही। लागत लगातार बढ़ रही है। लेकिन आमदनी घट रही है। इस वजह से किसान कर्ज के झाल में फंसता जा रहा है।
कलक्ट्रेट के समक्ष किसान ने की थी आत्महत्या
हनुमानगढ़ कलक्टर कार्यालय स्थित पार्क में वर्ष 2019 में एक किसान फंदा लगाकर आत्महत्या कर चुका है। परिजनों का आरोप था कि मृतक किसान ने बैंक से कर्ज ले रखा था। इससे परेशान होकर उक्त किसान ने फांसी लगाई। इससे पहले भी किसान की ओर से कर्ज के कारण फांसी लगाने की घटनाएं जिले में हो चुकी है।
ताकि नहीं आए कर्ज की नौबत
निजी व सरकारी बैंकों के अलावा सहकारी बैंक भी किसानों को कर्ज बांट रही है। किसान की भूमि रहन रखकर बैंक आसानी से कर्ज स्वीकृत कर देते हैं। किसी कारण से यदि फसल खराब हो जाती है तो किसान कर्ज उतार नहीं पाते। ऐसे में बैंक की रिपोर्ट पर जिला प्रशासन की टीम किसान की जमीन कुर्क करने भी पहुंच जाता। किसान संगठनों की मांग है कि सरकार किसानों को उचित मूल्य नहीं तो कम से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की समुचित व्यवस्था जरूर करे। इससे किसानों को कर्ज लेने की नौबत नहीं आएगी।
Published on:
31 Jan 2026 09:04 pm
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