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Kidney Disease: बिना दर्द के भी हो सकती है पथरी! किडनी फेलियर तक पहुंचा सकती है ये गलती

Kidney Disease: पथरी आजकल एक आम समस्या बन गई है, लेकिन बच्चों में पथरी का होना और वह भी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के, यह बेहद विचारणीय विषय है। आइए जानते हैं कि बच्चों में पथरी होना कितना खतरनाक हो सकता है।

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भारत

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Nidhi Yadav

Jan 31, 2026

kidney disease

kidney disease (image- gemini)

Kidney Disease: गुर्दे की पथरी को अक्सर बड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन हाल ही में एक 16 साल की लड़की को उसके माता-पिता ने अस्पताल में दिखाया। चौंकाने वाली बात यह थी कि उसे पथरी का कोई भी ऐसा लक्षण नहीं था जो सामान्य तौर पर मरीजों में देखा जाता है। इसके बावजूद जांच में उसे गुर्दे की पथरी पाई गई, जो अपने आप में चिंताजनक है। आइए जानते हैं कि बच्चों में बिना लक्षण वाली पथरी होने के कारण क्या हैं, इसके सामान्य संकेत क्या हैं और इससे बचने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए।

बच्चों में गुर्दे की पथरी कितनी खतरनाक? बच्चों में गुर्दे की पथरी को थोड़ा सा भी नजरअंदाज करना बहुत भारी पड़ सकता है। अगर पथरी लंबे समय तक गुर्दे में रहती है, तो यह पेशाब की नली में फंस सकती है और वहां रुकावट पैदा कर सकती है। बेहद गंभीर मामलों में यह किडनी फेलियर का कारण भी बन सकती है। पथरी के कारण पेशाब रुकने से बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे यूरिन इन्फेक्शन (UTI) का खतरा बढ़ जाता है। यदि यह इन्फेक्शन खून में फैल जाए (सेप्सिस), तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

बच्चों में पथरी होने के कारण क्या होते हैं?(Kidney Stone Cause)

  • शरीर में पानी की भारी कमी होना।
  • पैकेज्ड ड्रिंक्स और ज्यादा नमक वाले जंक फूड का सेवन।
  • प्यास लगने पर भी लंबे समय तक पानी नहीं पीना।
  • परिवार में इस बीमारी का अनुवांशिक इतिहास होना।

बच्चों में पथरी के लक्षण क्या होते हैं?(Kidney Stone Symptoms)

  • पेट या पीठ के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द होना।
  • पेशाब के रंग में बदलाव होना या गहरा रंग आना।
  • अचानक उल्टी होना या जी मिचलाना।
  • पेशाब करते समय दर्द होना या पेशाब में खून आना।

बच्चों को पथरी से बचाने के उपाय?(Kidney Stone Prevention)

  • बच्चे को दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
  • पेशाब के रंग में बदलाव होने पर तुरंत ध्यान दें।
  • भोजन में सफेद चीनी और नमक का स्तर कम रखें।
  • यदि बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत करे, तो डॉक्टर की सलाह लेकर अल्ट्रासाउंड या जरूरी टेस्ट जरूर कराएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं, बल्कि इस बारे में विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह जरूर लें।