
Nipah Virus Alert (image- gemini)
Nipah Virus High Alert: हाल ही में 'निपाह' नाम के इस वायरस ने आतंक मचाया हुआ है। भारत से शुरू हुआ यह वायरस अब देश की सीमाओं के बाहर भी अपना डर बढ़ा रहा है। केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के बाद पूरे एशिया में खतरे की स्थिति बनी हुई है। इसी के चलते अब एशियाई देशों के हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग प्रक्रिया तेज कर दी गई है। निपाह वायरस का नया स्ट्रेन इलाज की कमी के कारण वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
हवाई अड्डों पर की जा रही यह स्क्रीनिंग संक्रमण की चेन को तोड़ने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आइए जानते हैं कि यह वायरस इतना खतरनाक क्यों है, हवाई अड्डों पर किन बातों का ध्यान रखा जा रहा है और यात्रियों को बचाव के लिए क्या करना चाहिए।
निपाह वायरस एक 'जूनोटिक' बीमारी है, जो मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) की लार और मलमूत्र से फैलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह एक बेहद घातक बीमारी है जिसकी मृत्यु दर 75% तक है, जो गंभीर स्थिति में 100% भी हो सकती है। यह वायरस सीधे मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) पैदा करता है, जिससे मरीज महज 12 से 48 घंटे के भीतर कोमा में जा सकता है। वर्तमान में इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका एकमात्र प्रभावी इलाज है।
भारत से आने वाले यात्रियों के माध्यम से वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मलेशिया, थाईलैंड और कई अन्य एशियाई देशों ने इस जानलेवा वायरस से बचने के लिए निम्न उपाय अपनाये है-
1. थर्मल स्कैनिंग- संदिग्ध क्षेत्रों से आने वाले हर यात्री के शरीर के तापमान की जांच की जा रही है। यदि किसी यात्री का तापमान बढ़ा हुआ पाया जाता है, तो उसे यात्रा के लिए पाबंद किया जा सकता है ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।
2. लक्षणों की निगरानी- यदि किसी यात्री में तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या गंभीर सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तुरंत आइसोलेशन में भेजा जा रहा है।
3. हेल्थ डिक्लेरेशन- यात्रियों के लिए अपनी ट्रैवल हिस्ट्री और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना अनिवार्य किया जा सकता है। चूंकि यह एक संक्रामक बीमारी है जो कोरोना की तरह तेजी से फैल सकती है, इसलिए इन नियमों का उद्देश्य संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है।
पेड़ों से गिरे फल न खाएं।
मास्क पहनकर रहें।
खजूर के रस का सेवन बिल्कल भी न करें।
बीमार पशुओं से जितना हो सके उतना दूर रहें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
27 Jan 2026 04:32 pm
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