
nipah virus (image- gemini)
Nipah Virus High Alert: भारत जैसे जनसंख्या प्रधान देश जहां कोई भी बीमारी फैलने में ज्यादा वक्त नहीं लेती है, वहां से किसी वायरस की शुरुआत होना सीधा इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि अगर सावधानी न बरती जाए तो यह कोरोना से भी ज्यादा घातक रूप में सामने आ सकता है। इस खतरनाक निपाह वायरस ने सभी स्वास्थ्य संगठनों को अलर्ट मोड पर ला दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार दक्षिणी भारत से शुरू हुआ यह वायरस अब पश्चिमी भारत के साथ पूरे एशिया में अपना डर फैला रहा है। आइए जानते हैं कि क्या भारत में भी यात्रा पर रोक लगेगी? एशिया में इस वायरस का प्रकोप किस कदर फैला है और WHO ने क्या प्रतिक्रिया दी है, इसके साथ ही इसके फैलने की दर क्या है?
भारत ने इस घातक वायरस के 2 मरीजों के होने की पुष्टि की है जिसके कारण अभी तक तो कोई ऐसा निर्देश लागू नहीं हुआ है कि भारत में यात्रा पर रोक लगेगी, लेकिन इस वायरस के फैलने की दर बहुत तीव्र है। इससे यह बात तो स्पष्ट है कि अगर यह फैलने लगा तो किसी भी वक्त ऐसा हो सकता है, इसलिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि सावधानी बरतें और जितना हो सके उतना इसके कारकों से दूर रहें।
भारत से इसके केस मिलने के बाद पूरे एशिया के देशों ने हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग की शुरुआत कर दी थी। इसके साथ ही थर्मल स्क्रीनिंग के साथ तापमान की जांच कोरोना की ही भांति शुरू कर दी गई थी। संक्रमितों या कहें कि लक्षणों वाले लोगों को क्वारंटाइन करने के लिए अलग से व्यवस्था भी की गई है। इसके साथ ही USA, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों में इससे बचने के प्रयास निरंतर जारी हैं और यात्री को यात्रा से पूर्व अपनी यात्रा का इतिहास दिखाना होगा।
निपाह वायरस घातक है लेकिन अभी किसी देश में सीधे तौर पर मास्क और लॉकडाउन का प्रावधान नहीं है। लेकिन इसका यह मतलब बिलकुल भी नहीं है कि ऐसा कभी हो ही नहीं सकता, इस वायरस के फैलने की दर कोरोना से कम नहीं है और WHO ने भी साफ कहा है कि इस वायरस में महामारी फैलाने के गुण हैं तो सावधानी बरतनी ही चाहिए। सरकारें केवल प्रभावित क्षेत्रों (Containment Zones) में पाबंदियां लगा रही हैं। व्यापक लॉकडाउन की खबरें फिलहाल महज एक अफवाह हैं।
WHO ने इसे 'ब्लूप्रिंट प्रायोरिटी डिजीज' की सूची में रखा है, जिसका अर्थ है कि इसमें महामारी बनने की क्षमता है, इसलिए इस पर शोध और निगरानी जरुरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बहुत जरुरी है, क्योंकि यह संक्रमित व्यक्ति की बूंदों (Droplets) से फैल सकता है।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरुर ले लें।
Published on:
02 Feb 2026 10:42 am
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