
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI
Pregnant Women Sudden Death cause : अक्सर ये सुनने को मिलता है कि मां ने बच्चे को जन्म दिया और कुछ घंटे में उसकी मृत्यु हो गई। कई लोग डॉक्टर की लापरवाही कहते हैं तो कई भाग्य को कोसते हैं और भी कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। हमने इसके पीछे का असल कारण समझने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका रहरिया से बातचीत की। डॉक्टर ने बताया कि जन्म देने के 2-4 घंटे में अधिकतर मां पोस्टपार्टम हेमरेज के कारण (Postpartum Hemorrhage Death In India) मरती हैं।
वो इसके बारे में समझाते हुए कहती हैं, प्रसवोत्तर रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage - PPH) प्रसव के बाद होने वाली एक गंभीर स्थिति है। ये एक बड़ा विषय है। पर समझने के लिए कह सकते हैं कि प्रसव के बाद 500 मिलीलीटर (सामान्य प्रसव में) या 1000 मिलीलीटर (सिजेरियन सेक्शन में) से अधिक खून का बहना PPH कहलाता है। यह आमतौर पर प्रसव के पहले 24 घंटों के भीतर होता है, जिसे 'प्रारंभिक PPH' कहते हैं।
उन्होंने इसको लेकर बताया कि चिकित्सा विज्ञान में PPH के कारणों को "4 Ts" के रूप में समझा जाता है। हालांकि, पर्सन टू पर्सन इसके कारण अलग हो सकते हैं-
वो इस बात को भी बताती हैं कि अक्सर गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होती है। भारत में ऐसे मामले अधिक हैं। साइलेंट किलर एनीमिया से ग्रसित महिलाओं में भी इसका खतरा अधिक रहता है।
उन्होंने बताया कि पोस्टपार्टम हेमरेज के लक्षण प्रसव के 2-4 घंटे के भीतर दिखाई देते हैं। कई मामलो में 10-12 सप्ताह भी ऐसा होता है। इसके कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं-
PPH दुनिया भर में मातृ मृत्यु (Maternal Mortality) का सबसे बड़ा कारण है। WHO/NHM/RGI की जानकारी के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु दर (MMR) घटकर 97 प्रति लाख (2018-20) हो गई है, लेकिन अभी भी कुल मौतों में से लगभग 38% मौतें केवल PPH के कारण होती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 1.4 करोड़ महिलाएं PPH का शिकार होती हैं, जिनमें से करीब 70,000 की मौत हो जाती है। इन निम्नलिखित देशों में अधिक मौतें होती है-
वो कहती हैं, हाँ, प्रसव से पहले और दौरान कुछ "रिस्क फैक्टर्स" की पहचान करके इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। भारत में 50% से अधिक महिलाएं एनीमिक (खून की कमी) हैं। एनीमिया से पीड़ित महिला में PPH होने का खतरा 6% से 11% तक बढ़ जाता है। साथ ही पिछली डिलीवरी में PPH की हिस्ट्री देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। गर्भाशय का अधिक खिंचाव यानी एम्नियोटिक फ्लूइड (पॉलीहाइड्राम्निओस) का बहुत अधिक होना। प्रसव के दौरान "सक्रिय प्रबंधन" (AMTSL) और प्रसव पूर्व 'हीमोग्लोबिन जांच' सबसे महत्वपूर्ण हैं। इस तरह से समझा जा सकता है। हालांकि, अधिकतर मामलों में डॉक्टर बेबस हो जाते हैं। इसलिए, इससे मौत होने के चांसेज अधिक हैं।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
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Published on:
16 Feb 2026 05:27 pm

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