भारत, Jun 03, 2026

गोली और कैप्सूल की प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- gemini)
Right Way To Take Medicine: अक्सर लोग घर में गोली या कैप्सूल खाते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते कि वे उसे किस चीज के साथ निगल रहे हैं। सुबह की चाय हाथ में है, तो उसी के साथ दवा खा ली। नाश्ते में दूध या जूस पी रहे हैं, तो बिना सोचे-समझे उसी से दवा गटक ली। यह छोटी सी लापरवाही दवा के असर को कम कर सकती है।
फिजिशियन डॉक्टर दीपक शर्मा (MBBS) का कहना है कि दवा लेने का सबसे सही और सुरक्षित तरीका सादा पानी के साथ लेना है। आइए जानते हैं कि चाय, कॉफी, दूध या जूस के साथ दवा खाना आपकी सेहत पर कैसा असर डालता है।
कई लोगों को सुबह खाली पेट थायराइड या आयरन की गोलियां खानी होती हैं। बिस्तर से उठते ही वे चाय या कॉफी के साथ ये दवाएं ले लेते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चाय और कॉफी में मौजूद तत्व आयरन और थायराइड की दवाओं के असर को बहुत कम कर देते हैं। इससे दवा शरीर में पूरी तरह घुल नहीं पाती और आपको उसका कोई फायदा नहीं मिलता।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, कॉफी पेट में दवाओं के घुलने के तरीके को बदल देती है, जिससे दवा सही समय पर और सही मात्रा में शरीर में नहीं मिल पाती।
दूध पीना सेहत के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन जब बात दवाओं की हो तो यह नियम बदल जाता है।
दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है। जब आप किसी एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) दवा को दूध के साथ लेते हैं, तो दूध का कैल्शियम दवा के तत्वों के साथ मिल जाता है। इससे शरीर दवा को सोख नहीं पाता और बीमारी ठीक होने में लंबा समय लग सकता है।
फलों का जूस पीना वैसे तो फायदेमंद है, लेकिन दवा के साथ इसे लेना नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर ग्रेपफ्रूट (चकोतरा) का जूस कुछ दवाओं के साथ बहुत बुरा रिएक्शन करता है। यह खून में दवा के असर को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा सकता है, जो कि एक तरह से ओवरडोज जैसा काम करता है। इससे शरीर में जहर फैलने (Toxicity) का खतरा भी रहता है।
नेशनल इंस्टीटूट्स ऑफ हेल्थ की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अंगूर, संतरे या मौसमी का जूस दवाओं के असर को बदल सकता है।
इसलिए अगर आपके डॉक्टर ने दूध के साथ या किसी अन्य तरीके से दवा लेने की विशेष हिदायत नहीं दी हो तो सामान्य तौर पर पानी के साथ ही दवा लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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Updated on: 03 Jun 2026 06:18 pm

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