AI-generated Summary, Reviewed by Patrika
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Skin Disease: आज के इस डिजिटल और वैज्ञानिक युग में, जहां लगभग हर बीमारी का इलाज खोज लिया गया है और कई बार बीमारी होने से पहले ही उसका समाधान कर दिया जाता है, वहीं क्या आपको पता है कि त्वचा की एक बीमारी आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बनी हुई है? हालांकि इसके मरीजों की संख्या अन्य बीमारियों की तरह ज्यादा नहीं है, लेकिन फिर भी अगर यह बीमारी किसी को हो जाए तो व्यक्ति मानसिक रूप से भी बीमार हो जाता है। इस बीमारी की सबसे खास बात, जो इसे रहस्यमयी बनाती है, वह यह है कि इसमें त्वचा की समस्या घावों के रूप में उभरकर दिखाई देती है, लेकिन मरीज को ऐसा अहसास होता है कि उसके शरीर में त्वचा के नीचे कीड़े रेंग रहे हों। अब आप सोच में पड़ गए होंगे कि भला यह भी कोई बीमारी हो सकती है? जी हां, यह एक दुर्लभ त्वचा रोग है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मोरजेलन्स क्या होती है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए।
मोरजेलन्स त्वचा की एक ऐसी स्थिति है जिसमें त्वचा पर छोटे-छोटे घाव हो जाते हैं और उनसे काले, सफेद या नीले रंग के बारीक रेशे निकलते हुए दिखाई देते हैं। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को बहुत ज्यादा दर्द से गुजरना पड़ता है। असल में इस बीमारी में मरीज को ऐसा लगता है कि उसके शरीर में, उसकी त्वचा के नीचे कीड़े चल रहे हों। कई सालों तक वैज्ञानिकों ने इस बीमारी को केवल एक मानसिक भ्रम माना था, लेकिन वास्तव में यह केवल मरीज का मानसिक भ्रम नहीं है। भारत में जागरूकता की कमी के कारण बहुत से लोग इसे 'जादू-टोना' समझकर घरेलू इलाज करते रहते हैं, जिसके कारण इस बीमारी की वास्तविकता का पता नहीं चल पाता है। कई सालों तक इसे 'डेल्यूजनल पैरासिटोसिस' (Delusional Parasitosis) माना गया था, और आज भी यह बीमारी वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
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Published on:
01 Jan 2026 10:06 pm


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