
उत्तर कर्नाटक कच्छ कड़वा पाटीदार सनातन समाज हुब्बल्ली के पदाधिकारी एवं सदस्य।
गुजरात और कर्नाटक के बीच सशक्त सांस्कृतिक सेतु
गुजरात के कच्छ क्षेत्र से आकर कर्नाटक में बसे कड़वा पाटीदार समाज ने परदेश में रहते हुए भी अपनी सनातन परम्पराओं, पर्व-त्योहारों और सामाजिक एकता को जिस मजबूती से सहेज कर रखा है, वह आज गुजरात और कर्नाटक के बीच एक सशक्त सांस्कृतिक सेतु बन गया है। परदेश में रहते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना, नई पीढ़ी को संस्कारों से जोडऩा और दो राज्यों गुजरात व कर्नाटक को सांस्कृतिक रूप से जोडऩा, यही उत्तर कर्नाटक कच्छ कड़वा पाटीदार सनातन समाज की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।
उत्तर कर्नाटक के विभिन्न शहरों में समाज के लोग
उत्तर कर्नाटक कच्छ कड़वा पाटीदार सनातन समाज हुब्बल्ली पिछले 35 वर्षों से संगठित रूप में कार्यरत है। आज इस समाज से करीब 5500 सदस्य जुड़े हुए हैं। केवल हुब्बल्ली ही नहीं, बल्कि धारवाड़, राणेबेन्नूर, हावेरी, बेलगावी, विजयपुर, बागलकोट, बीदर, रायचूर, होसपेट, गंगावती और कोप्पल जैसे उत्तर कर्नाटक के कई शहरों में समाज की मजबूत उपस्थिति है।
छह जोन, एक पहचान
समाज का संचालन छह जोनों हुब्बल्ली, बेलगावी, धारवाड़, महालिंगपुर (विजयपुर), किष्किंधा और बीदर (उत्तर-पूर्व कर्नाटक) के माध्यम से होता है। आपसी समन्वय और संगठन की यह व्यवस्था समाज को सशक्त बनाए हुए है।
सामूहिक विवाह और सामाजिक मिलन की परंपरा
समाज में 17 वर्षों से सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है, वहीं 30 वर्षों से सामूहिक मिलन समारोह जुलाई-अगस्त माह में नियमित रूप से होता आ रहा है। इन आयोजनों में बच्चों का सम्मान कर उन्हें संस्कारों से जोडऩे पर विशेष जोर दिया जाता है।
युवाओं में खेल भावना का विकास
युवा कमेटी द्वारा क्रिकेट, वॉलीबॉल सहित विभिन्न खेल गतिविधियों का आयोजन होता है। हाल ही में आयोजित नॉर्थ कर्नाटक क्रिकेट टूर्नामेंट में 12 टीमों ने भाग लिया। यह दो दिवसीय प्रतियोगिता हुब्बल्ली के बीडीके ग्राउंड में हुई। उल्लेखनीय है कि यह आयोजन पिछले 20 वर्षों से हर दो साल में नियमित रूप से किया जा रहा है।
पाटीदार भवन और मंदिर, आस्था का केंद्र
हुब्बल्ली में समाज का 35 वर्ष पुराना पाटीदार भवन है, जिसमें दो हॉल, सात कमरे, मंच और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। भवन परिसर में लक्ष्मीनारायण भगवान का मंदिर भी स्थापित है, जिसका निर्माण करीब ढाई वर्ष पूर्व हुआ। श्रावण सुद पंचमी को मंदिर की स्थापना हुई थी। जयपुर से लाए गए संगमरमर से निर्मित लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमाएं यहां स्थापित हैं।
कच्छ से हुब्बल्ली तक की पीढिय़ों की यात्रा
समाज के वरिष्ठों के अनुसार गोपाल भाई सुपुत्र लड्डा भाई दीवाणी उखेड़ा, लड्डा भाई सुपुत्र भंजीभाई भादाणी उखेड़ा और नानजी भाई सुपुत्र कृष्ण भाई पोकार उखेड़ा लगभग 1945 के आसपास गुजरात के कच्छ-भुज की नखतराना तहसील से हुब्बल्ली आए थे। 1935 के कच्छ भूकंप के बाद ये परिवार पहले अफगानिस्तान गए, फिर कच्छ लौटे और अंतत: कई ट्रेनें बदलकर हुब्बल्ली पहुंचे। आज हुब्बल्ली में कच्छ से आए लोगों की पांचवीं पीढ़ी निवास कर रही है।
संस्कारों के साथ उत्सवों का उल्लास
समाज द्वारा रक्षाबंधन, होली, बसंत पंचमी, कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे पर्व पूरे पारंपरिक उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। होली दहन 35 वर्षों से नियमित रूप से होता है, जन्माष्टमी पर रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और मटकी फोड़ प्रतियोगिता होती है। नवरात्रि में नौ दिनों तक गरबा-डांडिया, अष्टमी को हवन, कन्या भोजन और दीपावली पड़वा पर सामूहिक मिलन का आयोजन होता है। अगले दिन बच्चों का सम्मान समाज की संस्कारशील सोच को दर्शाता है।
व्यवसाय, शिक्षा और समाज सेवा
उत्तर कर्नाटक कच्छ कड़वा पाटीदार सनातन समाज हुब्बल्ली के प्रमुख हरिलाल अबजी दीवाणी ने बताया कि हुब्बल्ली में पाटीदार समाज की जनसंख्या करीब 850 है, जिनमें 132 परिवार वर्तमान में निवास कर रहे हैं। अधिकांश परिवार टिम्बर, प्लाईवुड और बिल्डिंग मटेरियल व्यवसाय से जुड़े हैं। समाज के कई युवा आज चिकित्सक, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर समाज और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
Published on:
29 Jan 2026 03:03 pm
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