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डिजिटल ठगी के जाल में अब देश का हर शहर निशाने पर

बेलगावी और कलबुर्गी जैसे शहरों से साइबर अपराध में शामिल लोगों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल ठगी का नेटवर्क अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के छोटे और मध्यम शहर भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। कर्नाटक में हालिया अभियान के दौरान कई […]

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साइबर अपराध

साइबर अपराध

बेलगावी और कलबुर्गी जैसे शहरों से साइबर अपराध में शामिल लोगों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल ठगी का नेटवर्क अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के छोटे और मध्यम शहर भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। कर्नाटक में हालिया अभियान के दौरान कई जिलों में एक साथ की गई कार्रवाई यह दर्शाती है कि साइबर अपराध अब संगठित रूप ले चुका है और इसका संचालन अलग-अलग स्थानों से किया जा रहा है।
डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार ने जहां लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों को नए अवसर भी दिए हैं। अपराधी अब तकनीक का इस्तेमाल कर दूर बैठे लोगों को निशाना बनाते हैं और फर्जी या म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम इधर से उधर पहुंचाई जाती है। कई बार लोग मामूली लाभ या नौकरी के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध करा देते हैं, बिना यह समझे कि वे अपराध का हिस्सा बन रहे हैं। छोटे शहरों में बढ़ती डिजिटल पहुंच के साथ साइबर अपराध का फैलाव यह भी संकेत देता है कि युवाओं को गलत नेटवर्क में फंसाने की कोशिशें बढ़ रही हैं। बेरोजगारी और त्वरित कमाई की चाहत कई बार उन्हें जोखिम भरे रास्तों की ओर धकेल देती है। यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय भी बन चुका है।
साइबर अपराध पर अकुश लगाने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों की सक्रियता जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या व्यक्तिगत विवरण साझा करने से बचना, संदिग्ध कॉल या संदेशों की सूचना देना और डिजिटल लेनदेन में सावधानी बरतना अब हर नागरिक की जिम्मेदारी बन चुकी है। स्पष्ट है कि डिजिटल युग में अपराध का स्वरूप बदल रहा है। सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने के लिए सरकार, संस्थानों और आम नागरिकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी, तभी डिजिटल प्रगति का लाभ सुरक्षित रूप से समाज तक पहुंच सकेगा।