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यूरोप से सात समंदर पार कर जबलपुर पहुंचे दुर्लभ पक्षी, बरगी बांध बना ‘विदेशी मेहमानों’ का नया बसेरा

नर्मदा समेत 20 तालाबों के आसपास हुआ सर्वे, 213 प्रजातियों के बहुत से पक्षी मिलेजबलपुर। नर्मदा घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और जबलपुर के जलाशयों की अनुकूल आबोहवा अब सात समंदर पार रहने वाले दुर्लभ पक्षियों को अपनी ओर खींच रही है। इस साल यूरोप और उत्तरी गोलार्ध के ठंडे इलाकों से उडकऱ आए स्कॉटिश ओस्प्रे, […]

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Rare Birds

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नर्मदा समेत 20 तालाबों के आसपास हुआ सर्वे, 213 प्रजातियों के बहुत से पक्षी मिले
जबलपुर।
नर्मदा घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और जबलपुर के जलाशयों की अनुकूल आबोहवा अब सात समंदर पार रहने वाले दुर्लभ पक्षियों को अपनी ओर खींच रही है। इस साल यूरोप और उत्तरी गोलार्ध के ठंडे इलाकों से उडकऱ आए स्कॉटिश ओस्प्रे, स्टेपी ईगल और व्हाइट-टेल्ड ईगल जैसी 200 से ज्यादा प्रजातियों ने जबलपुर के बरगी बांध और आसपास के तालाबों में डेरा डाल दिया है।

वैज्ञानिक गणना में हुआ खुलासा

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया हाल ही में वन विभाग के साथ वेटलैंड इंटरनेशनल और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में जबलपुर में नर्मदा समेत 20 प्रमुख तालाबों और जलाशयों में पक्षियों की वार्षिक गणना की गई। इस अभियान में 25 से अधिक पक्षी प्रेमियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। गणना के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले और सुखद हैं। सर्वे के अनुसार, जबलपुर के जल निकायों में 213 प्रजातियों के हजारों पक्षी देखे गए हैं।

बरगी कैचमेंट एरिया बना हॉटस्पॉट

विशेषज्ञों के अनुसार, बरगी बांध का कैचमेंट इलाका, जो जबलपुर से लेकर मंडला और सिवनी तक फैला है, इन प्रवासी पक्षियों का मुख्य केंद्र बन गया है। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर संजय गुप्ता ने बताया कि इस बार स्कॉटिश ओस्प्रे, पेरेग्रीन फाल्कन (बाज), ऑरेंज ब्रेस्टेड बर्ड गल, सिनेरियस वल्चर और ब्लैक-बेलीड टर्न जैसे दुर्लभ पक्षी देखे गए हैं। विशेष रूप से रिवर लैपविंग और कॉमन पोचार्ड जैसी प्रजातियों को पहली बार बरगी और खंदारी जलाशय में दर्ज किया गया है।

संरक्षण की चुनौती, सह-अस्तित्व की दरकार

जबलपुर की आबोहवा इन पक्षियों को इतनी पसंद आ रही है कि कई प्रजातियों ने नदी किनारे अंडे देकर अपना कुनबा बढ़ाना भी शुरू कर दिया है। हालांकि, इनके संरक्षण को लेकर एक बड़ी चुनौती भी सामने आई है। संजय गुप्ता ने बताया जैसे ही बरगी बांध का जलस्तर कम होता है, किनारे की खाली जमीन पर किसान खेती शुरू कर देते हैं। इससे पक्षियों के घोंसले और अंडे नष्ट हो जाते हैं। बर्ड लवर्स और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय किसानों को जागरूक किया जाए और वे इन पक्षियों के साथ सह-अस्तित्व को स्वीकार कर लें, तो जबलपुर इन अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों का स्थायी घर बन सकता है। वन विभाग अब इन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रहा है ताकि इन विदेशी मेहमानों का प्रवास सुरक्षित बना रहे।