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राजस्थान के छात्रों के लिए AI क्रांति: IIT कानपुर का हिंदी व्याकरण प्लैगरिज्म टूल अब ‘पिंक सिटी’ तक पहुंचेगा

Plagiarism Tool Hindi : हिंदी में थीसिस-प्रोजेक्ट अब परफेक्ट – राजस्थान यूनिवर्सिटी सहित अन्य स्टूडेंट्स को मिलेगी बड़ी राहत, व्याकरण की गलतियां होंगी इतिहास देसी AI से नकल पर लगाम – भारतजेन इकोसिस्टम में IIT कानपुर राजस्थान के IIT जोधपुर का सहयोग, AI पॉलिसी से जुड़ेगा पूरा राज्य

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Jan 31, 2026

मोहित शर्मा.

AI ForRajasthan: जयपुर। लखनऊ के 'एआई मंथन 2026' में IIT कानपुर के प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने जो बड़ा ऐलान किया, वो राजस्थान के लिए भी सीधा मैसेज है। राजस्थान में हिंदी माध्यम की शिक्षा का बोलबाला है – लाखों छात्र पीएचडी, एमफिल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट हिंदी में लिखते हैं, लेकिन व्याकरण और नकल की समस्या आम है। अब IIT कानपुर का वेब-आधारित हिंदी व्याकरण चेकर टूल जल्द लॉन्च होगा, जो इन कमियों को जड़ से खत्म करेगा। खास बात: छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी (कानपुर) के कुलपति ने प्लैगरिज्म चेकर का सुझाव दिया, और IIT कानपुर तैयार है – ज्यादा बजट के साथ हिंदी में नकल पकड़ने वाला AI टूल बनेगा।

हिंदी में भी ओरिजिनैलिटी जरूरी

राजस्थान के यूनिवर्सिटीज़ (जैसे राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर या बीकानेर) भी ऐसे टूल्स की मांग कर रही हैं, क्योंकि UGC नियमों के तहत हिंदी में भी ओरिजिनैलिटी जरूरी है। ये सब भारतजेन AI इकोसिस्टम का हिस्सा है, जिसमें IIT कानपुर के साथ IIT जोधपुर (राजस्थान) भी शामिल है।

IIT जोधपुर कई भारतीय भाषाओं में कर रहा रिसर्च

IIT जोधपुर कई भारतीय भाषाओं (हिंदी सहित) पर AI रिसर्च कर रहा है, जैसे OCR टेक्नोलॉजी जो 13 भाषाओं में टेक्स्ट पढ़ सकती है। राजस्थान सरकार की AI पॉलिसी और 10 लाख युवाओं को ट्रेनिंग देने की योजना से ये टूल सीधे जुड़ेगा– जयपुर, जोधपुर, उदयपुर के छात्रों को देसी AI से हिंदी लिखना आसान, सटीक और नकल-मुक्त मिलेगा। राजस्थान के छात्रों के लिए ये ऐतिहासिक कदम है। अब विदेशी टूल्स पर निर्भरता कम होगी, हिंदी डिजिटल दुनिया में और मजबूत बनेगी।

IIT जोधपुर कई भारतीय भाषाओं पर AI रिसर्च कर रहा है, और ये काफी मजबूत और प्रैक्टिकल काम है। मुख्य रूप से Vision, Language and Learning Group (VL2G) के तहत, प्रो. आनंद मिश्रा (Department of Computer Science and Engineering) की लीडरशिप में ये काम हो रहा है। IIT जोधपुर ने बाइलिंगुअल टीचिंग भी शुरू की है (हिंदी इंग्लिश में BTech क्लासेस), और AI से मदर टंग बेस्ड लर्निंग को प्रमोट कर रहा है। ये भारतजेन AI जैसे बड़े इकोसिस्टम से जुड़ा नहीं है (भारतजेन मुख्यतः IIT बॉम्बे लीड है), लेकिन Bhashini और अन्य इंडियन लैंग्वेज AI प्रोजेक्ट्स में योगदान दे रहा है। ये रिसर्च राजस्थान के लिए भी खास है क्योंकि लोकल भाषाओं (जैसे राजस्थानी/मारवाड़ी डायलेक्ट्स) को भविष्य में एक्सटेंड करने की संभावना है, और राज्य की AI पॉलिसी से जुड़ सकता है।

राजस्थान के लिए खास फायदे

  • राजस्थान में हिंदी माध्यम के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा – ये टूल JNU, RU, MDSU, Kota यूनिवर्सिटी आदि के शोध प्रस्ताव/पीएचडी में व्याकरण सुधार देगा।
  • इंजीनियरिंग/टेक बैकग्राउंड वाले राजस्थानी छात्र (जैसे MNIT, RTU, IIT जोधपुर से) हिंदी में ज्यादा गलतियां करते हैं– अब आसान होगा सुधार।
  • प्लैगरिज्म चेकर हिंदी में आएगा, जो राजस्थान के सरकारी/प्राइवेट कॉलेजों में थीसिस/रिसर्च के लिए अनिवार्य हो जाएगा।
  • राज्य की AI पॉलिसी (2025-26) के तहत 10 लाख युवाओं को AI ट्रेनिंग – ये टूल इसमें शामिल होगा।

भारतजेन AI में राजस्थान का कनेक्शन

IIT कानपुर के प्रो. अर्नब भट्टाचार्य भारतजेन कंसोर्टियम में शामिल। IIT जोधपुर (राजस्थान) भी पार्टनर। भाषा AI पर रिसर्च कर रहा है। राजस्थान AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 में IIT जोधपुर का बड़ा योगदान। हिंदी/भारतीय भाषाओं के लिए मॉडल डेवलपमेंट। राज्य सरकार की AI स्किल ट्रेनिंग योजना में IIT कानपुर के टूल्स को इंटीग्रेट करने की संभावना। जयपुर में पैन-IIT समिट (2025) के बाद राजस्थान AI हब बन रहा। ये टूल छात्रों-शोधकर्ताओं को आत्मनिर्भर बनाएगा।