जयपुर, Jun 05, 2026

पूर्व सीएम अशोक गहलोत (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में वर्ष 2020 के मानेसर सियासी संकट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार गिराने के लिए बड़े पैमाने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हर विधायक के लिए 35 करोड़ रुपये तक की डील तय की गई थी और कई विधायकों को 10-10 करोड़ रुपये एडवांस भी दिए गए थे, जिन्हें बाद में वापस तक नहीं लिया गया।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई थी, लेकिन आखिरकार भाजपा की रणनीति सफल नहीं हो सकी। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में राजनीतिक घटनाक्रम इतने गंभीर थे कि लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशें खुलकर सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि कांग्रेस ने एकजुटता दिखाते हुए राजस्थान सरकार को बचा लिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा नेतृत्व पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि सरकार गिराने के प्रयासों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका रही। गहलोत ने आरोप लगाया कि मानेसर में ठहरे कांग्रेस विधायकों की बैठकें धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर होती थीं और वहां लगातार राजनीतिक रणनीति बनाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि उस समय जो कुछ हुआ, वह किसी बड़े सियासी षड्यंत्र से कम नहीं था।
गहलोत ने दावा किया कि भाजपा ने विधायकों को लाने के लिए दो हवाई जहाज तक भेजे थे, लेकिन उसमें से एक खाली गया था। जिसके बाद उन्हें यह एहसास हो गया कि राजनीतिक समीकरण उलटे भी पड़ सकते हैं और कहीं उनके अपने विधायक ही प्रभावित न हो जाएं। उन्होंने कहा कि इसी डर के कारण पूरी योजना आगे नहीं बढ़ सकी। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा हॉर्स ट्रेडिंग पर आधारित है और विभिन्न राज्यों में सरकारें गिराने के लिए इसी तरह के तरीके अपनाए जाते रहे हैं।
अशोक गहलोत ने पश्चिम बंगाल के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी जो राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं, उन्हें वे इसी परिप्रेक्ष्य में देखते हैं। उनके अनुसार देश में डर और दबाव की राजनीति का माहौल बनता जा रहा है, जिस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
राजनीति के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए गहलोत ने कहा कि आज कई नेता खुद को बड़ा दिखाने के लिए दूसरों को छोटा साबित करने में लगे हैं। जबकि राजनीति में आगे बढ़ने का सही रास्ता जनता के बीच जाकर काम करना है। उन्होंने नेताओं से गांवों, गरीबों, दलित बस्तियों और जरूरतमंद लोगों के बीच समय बिताने की अपील की।
अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक जीवन में बहुत अवसर मिले और वे अपने सफर से संतुष्ट हैं। वहीं राज्य सरकार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सिर्फ शुभकामनाएं ही नहीं, बल्कि विपक्ष के सुझाव और आलोचना भी स्वीकार करनी चाहिए। लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना सरकार को बेहतर बनाने का काम करती है।
Updated on: 05 Jun 2026 09:29 pm

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