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India Energy Week 2026-27: क्लीन और ग्रीन एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) का भविष्य अब केवल अधिक बिजली उत्पादन पर नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता (एनर्जी एफिशिएंसी) पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षता ही वह ‘एक्स-फैक्टर’ है, जो नवीकरणीय ऊर्जा को सस्ती, भरोसेमंद और उपभोक्ताओं के लिए अधिक उपयोगी बनाएगा।
इंडिया एनर्जी वीक के दौरान आयोजित एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा में ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में बिजली उत्पादन की लागत करीब एक-तिहाई तक घट चुकी है, जबकि बिजली संयंत्रों की कार्यक्षमता (लोड फैक्टर) दोगुनी से अधिक हो गई है। पूरी वैल्यू चेन में सुधार के चलते बिजली आपूर्ति की क्षमता भी लगभग तीन गुना बढ़ी है।
इन हालात में राजस्थान पर विशेष रूप से नजरें टिकी हैं, क्योंकि देश की सबसे अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता इसी राज्य में स्थापित है। वर्तमान में राजस्थान में करीब 42,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है, जिसे अगले चार वर्षों में बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। अब राज्य के सामने चुनौती यह है कि उत्पादित बिजली का अधिक कुशल उपयोग कैसे हो, ताकि उपभोक्ताओं को नियमित और कम दरों पर बिजली मिल सके।
विशेषज्ञों के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता (इंटरमिटेंसी) आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यही चुनौती भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन की मांग को और बढ़ाएगी। ऊर्जा विशेषज्ञ मोलॉय बनर्जी का मानना है कि हाइड्रोजन ऊर्जा भंडारण और स्थिर बिजली आपूर्ति का प्रभावी विकल्प बन सकता है।
पैनल चर्चा में विशेषज्ञ संचित रंजन ने कहा कि अक्षय ऊर्जा में दक्षता बढ़ाने के लिए सही तकनीकों का संयोजन और मजबूत फ्रेमवर्क जरूरी है। बेहतर बुनियादी ढांचा लागत घटाने के साथ उद्योग को बड़े स्तर पर लाभ पहुंचाएगा। वहीं, सुजलॉन के गिरीश तांती ने कहा कि ऊर्जा कंपनियां अब केवल एक स्रोत तक सीमित नहीं रहकर फुल-स्टैक एनर्जी कंपनियों के रूप में आगे बढ़ रही हैं।
चर्चा में यह भी सामने आया कि देश में तेजी से बढ़ रही सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में राजस्थान की भूमिका सबसे अहम है। पर्याप्त भूमि, उच्च सोलर रेडिएशन और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क के कारण राजस्थान पहले ही सोलर एनर्जी का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऊर्जा दक्षता बढ़ने से राज्य के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों तक भी नियमित व सस्ती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
विशेषज्ञों ने बताया कि हाइड्रोजन उत्पादन के दौरान निकलने वाली ऑक्सीजन यदि सही तरीके से उपयोग में लाई जाए, तो यह अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है। इससे ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं और अधिक व्यावहारिक और आर्थिक रूप से मजबूत होंगी।
Updated on:
30 Jan 2026 02:13 pm
Published on:
30 Jan 2026 02:10 pm
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