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दुनियाभर में जयपुर की धाक: देशी ही नहीं, विदेशी मैम के हाथों में भी खनक रहीं लाख की चूड़ियां

चूडिय़ां न केवल स्थानीय संस्कृति का हिस्सा हैं, बल्कि शादी-विवाह और विशेष अवसरों पर अनिवार्य मानी जाती हैं। इस उद्योग से हजारों कारीगरों को रोजगार मिलता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान होती है।

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Jaipur bangles

सविता व्यास
जयपुर। राजस्थान की लाख की चूडिय़ां सदियों पुरानी पारंपरिक कला हैं, जो महिलाओं की शोभा बढ़ाती हैं। ये चूडिय़ां प्राकृतिक लाख से हाथों से बनाई जाती हैं और रंग-बिरंगे डिजाइन से सजी होती हैं। मुख्य रूप से जयपुर में यह कारोबार फल-फूल रहा है, जहां मणिहार समुदाय के कारीगर कुशलता से इन्हें तैयार करते हैं। त्योहारों जैसे तीज, गणगौर और करवा चौथ पर इनकी मांग बहुत बढ़ जाती है। ये चूडिय़ां न केवल स्थानीय संस्कृति का हिस्सा हैं, बल्कि शादी-विवाह और विशेष अवसरों पर अनिवार्य मानी जाती हैं। इस उद्योग से हजारों कारीगरों को रोजगार मिलता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान होती है। जयपुर के बाजारों से ये चूडिय़ां देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचती हैं। विदेशों में भी इनकी लोकप्रियता बढ़ रही है, जिससे निर्यात में योगदान होता है। स्वास्थ्य और पर्यावरण अनुकूल होने से आधुनिक पीढ़ी भी इन्हें पसंद कर रही है। यह हस्तकला राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखती है और नई डिजाइनों से बाजार में नई जान डाल रही है। कुल मिलाकर, लाख की चूडिय़ां राज्य की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं।

जयपुर में सबसे बड़ा बाजार और कारोबार
राजस्थान में लाख की चूडिय़ों का कारोबार मुख्य रूप से जयपुर जिले में केंद्रित है। यहां मणिहारों का रास्ता प्रसिद्ध बाजार है, जहां सैकड़ों दुकानें और कार्यशालाएं हैं। इस संकरी गली में कारीगर मौके पर ही चूडिय़ां बनाते और बेचते हैं। अन्य जिलों जैसे सीकर, झुंझुनूं और चूरू में भी कुछ हद तक यह कला प्रचलित है। जयपुर के त्रिपोलिया बाजार और जौहरी बाजार से जुड़े क्षेत्रों में थोक और खुदरा बिक्री होती है। ये बाजार पर्यटकों और स्थानीय खरीदारों से हमेशा गुलजार रहते हैं।
घर-घर फैला है यह कारोबार

लाख की चूडिय़ों का उद्योग असंगठित है, लेकिन जयपुर में अकेले यह 75-80 करोड़ रुपए का कारोबार करता है। इससे हजारों कारीगरों, मुख्य रूप से मणिहार समुदाय के पुरुषों और महिलाओं को रोजगार मिलता है। कारीगर लाख पिघलाने, डिजाइन बनाने और जड़ाई के काम में लगे रहते हैं। महिलाएं घर से पैकिंग और छोटे काम करती हैं। त्योहारों पर कारोबार कई गुना बढ़ जाता है। यह उद्योग परिवार आधारित है और पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहा है। सरकार की हस्तशिल्प योजनाएं इसे सहारा दे रही हैं।

देश-विदेश तक होता है निर्यात
राजस्थान की लाख की चूडिय़ां देश के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्यों में भेजी जाती हैं। शादी-त्योहारों की मांग के कारण थोक ऑर्डर आते हैं। विदेशों में अमरीका, दुबई, यूरोप और अन्य देशों में पर्यटकों और प्रवासियों के जरिए निर्यात होता है। हस्तशिल्प निर्यात में इनका योगदान है। ऑनलाइन प्लेटफॉम्र्स से भी बिक्री बढ़ रही है। राजस्थान का कुल हस्तशिल्प निर्यात बढ़ता जा रहा है, जिसमें लाख उत्पाद शामिल हैं। ये चूडिय़ां सांस्कृतिक निर्यात का प्रतीक बन रही हैं।
जयपुर में लाख की चूडिय़ों का कारोबार
वर्ष बाजार (करोड़ रुपये) निर्यात वृद्धि (%) कुल हस्तशिल्प (अनुमानित)
2020 60 5 मध्यम
2021 65 8 बढ़ता
2022 70 12 अच्छा
2023 75-80 15 उच्च
2024 85 10 स्थिर वृद्धि
स्रोत: स्थानीय बाजार संघ

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लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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