AI-generated Summary, Reviewed by Patrika
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बचपन की दोस्ती
कीर्ति, उम्र-13 साल
रोहन सोहन और नेहा सुहाने दिनों में अपनी नानी के गांव गए थे। वहां पास ही के खेत में एक घना और बड़ा आम का पेड़ था। जब वह खेत में खेल रहे थे तब खेलते खेलते उन्हें बहुत तेज भूख लगी लेकिन खेत से उनकी नानी का घर थोड़ा धूरी पर था और अगर वह एक बार घर चले जाते तो फिर नानी उन्हें वापस नहीं जाने देती। तभी वह आम तोड़ने का सोचते हैं। लेकिन उन्हें आम तोड़ना नहीं आता था क्योंकि वह शहर में रहते थे फिर उन्हें तीन बच्चे दिखते हैं। तो वह उन तीनों को बुलाते हैं। पूरी बात बताते हैं तब वह तीन बच्चे बोलते हैं कि हम आम तोड़ने में तुम्हारी मदद करेंगे अब सारे मिलकर आम तोड़ते हैं और सब मजे लेकर आम खाते हैं।
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नानी के बाग के रसीले आम
उदित राज सिंह कानावत, उम्र- 6 साल
एक बार वंश नाम का छोटा लड़का कोटडी में रहता था। वह बहुत मासूम लड़का था । वह पूरे दिन फोन और टीवी में ही लगा रहता था। उसके माता-पिता इस बात से बहुत परेशान थे। वह उसका फोन और टीवी छुड़वाना चाहते थे। एक बार उन्होंने सोचा कि क्यों ना हम इसे इसके ननिहाल ले जाए। वह अपने ननिहाल गया और वहां पर उसने देखा की नानी के वहां बहुत बड़ा आम का बगीचा है। वह वहां पर अपने दोस्त हनी ,बनी और गर्व के साथ आम के बगीचे में जा पहुंचा। वहां पर उन्होंने खूब आम तोड़े और रसीले आम का लुफ्त उठाया। इस तरह वह बाहर की दुनिया से संपर्क में आया और उसकी फोन और टीवी की लत भी छूट गई।
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आम के पेड़ की कहानी
ज्योति सिद्ध, उम्र-10 साल
रविवार के दिन सोनू अपने स्कूल के दोस्तों के साथ एक बगीचे में खेलने गया वहा उसने एक आम का पेड़ देखा पर आम का पेड़ बहुत लंबा था। सोनू ने सोचा आम कैसे तोड़ा जाए इतने में चीकू लकड़ी लेकर आ गया तब राधा ने कहा रुको लकड़ी फेंकने से कच्चे फल भी नीचे गिर जाएंगे। इससे अच्छा हम सब मिलकर पेड़ को हिलाते हैं तो पके हुए आम के फल नीचे गिर जाएंगे। फिर सब ने मिलकर पेड़ को हिलाया तो कुछ पके हुए आम नीचे गिर गए फिर हम सब ने मिलकर आम खाए तथा खेलकर रविवार का खूब आनंद लिया फिर हमने संकल्प लिया कि अब की बार वर्षा ऋतु में हम सब एक एक पौधा लगाएंगे और उसको पेड़ बनाएंगे।
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आम का पेड़
वेदांश शर्मा, उम्र- 7 साल
वीर आज अपनी नानी के यहां आया, उसके साथ उसकी बहन मीरा भी आई। वे दोनों अपने भाई बहनों के साथ खूब खेलते मस्ती करते और थोड़ी शरारत भी करते एक दिन वे सब अपने नाना के साथ उनके बगीचे में गए वहां उन्हें एक आम का पेड़ दिखाई दिया। इस पेड़ पर खूब सारे रसीले आम लटक रहे थे। बच्चे आम को लेकर खुश हो गए। वीर ने पास पड़ी एक लकड़ी को उठाया और जोर से पेड़ पर फेंका तो खूब सारे आम नीचे गिर गए बच्चों ने आम इकट्ठा किए और घर पर लेकर आए रात को नानी ने आमरस बनाया सब ने मिलकर आमरस का खूब मजा लिया।
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मजे से आम खाए
नियति गुप्ता, उम्र- 9 साल
रानी की छुट्टियां थी। वह अपनी मम्मी के साथ नानी के घर गई। वहां उसकी दोनों मोसियां और रानी के भाई-बहन पहले से आ चुके थे। रानी जल्दी से रसोई में गई और अपनी नानी व मामी के गले मिली। इसके बाद वह बाहर खेलने चली गई। रिंकी, स्नेहा, राहुल, मोहित और निधि रानी को देखकर बहुत खुश हुए। तभी राहुल जो रानी के मामा का बेटा था, बोला, “मैं यहां एक आम का पेड़ जानता हूं। उस पेड़ के आम बहुत स्वादिष्ट होते हैं।” यह सुनते ही स्नेहा, जो रानी की मौसी की बेटी थी, बोली, “कहां है वह पेड़?” सभी बच्चों का आम खाने का मन हो गया। राहुल ने कहा, “ठीक है, मैं आप सबको वहां लेकर चलता हूं।” सारे बच्चे बहुत खुश हो गए। राहुल उन सभी को आम के पेड़ के पास ले गया। तभी मोहित ने एक लकड़ी का डंडा उठाया और आम पर मारा। एक आम नीचे गिर गया। रिंकी उसे उठाकर खाने ही वाली थी। तभी स्नेहा ने उसे रोकते हुए कहा, “हमें आम को बिना धोए नहीं खाना चाहिए।” रिंकी ने पूछा, “क्यों?” स्नेहा बोली, “क्योंकि इससे हम बीमार पड़ सकते हैं।” रिंकी ने कहा, “ठीक है दीदी” तभी राहुल बोला, “क्यों न हम आम घर पे ले चले फिर पानी से धोकर मजे से खायेगे?” फिर सभी बच्चे आम लेकर घर गए, उन्हें अच्छे से धोया और बड़े मज़े से आम खाए।
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आम के पेड़ की सीख
भावया झाबक, उम्र-11 साल
गांव के मैदान में एक बड़ा और पुराना आम का पेड़ था। गर्मी के दिनों में बच्चे उसके नीचे खेलते थे। पेड़ पर बहुत सारे पके आम लटके थे। एक लड़के ने डंडा उठाया और आम गिराने लगा। आम नीचे गिरने लगे। कुछ आम दूर लुढ़क गए। एक लड़की जल्दी से आम उठाने लगी। तभी एक समझदार बच्चे ने कहा, “इतना जोर से मत मारो, पेड़ को चोट लगेगी।” सब रुक गए। फिर बच्चों ने तय किया कि वे सिर्फ नीचे गिरे आम ही उठाएंगे। उन्होंने कच्चे आम नहीं तोड़े। थोड़ी देर बाद सबने मिलकर आम खाए और पेड़ के नीचे बैठकर बातें करने लगे। घर जाते समय बच्चों को खुशी थी कि उन्होंने मिल-जुलकर सही काम किया।
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मस्ती भरा 'मैंगो मिशन'
अयांश माथुर, उम्र-13 साल
गर्मियों की दोपहर थी और सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था, लेकिन आर्यन, ईशा, राहुल, मीता और छोटे गोलू के लिए यह मस्ती का समय था। गांव के कोने में खड़ा वह विशाल आम का पेड़ रसीले और पीले आमों से लदा हुआ था। आर्यन ने एक लंबी लकड़ी उठाई और निशाना साधते हुए कहा, "आज तो हम सबसे ऊंची डाली वाले आम तोड़कर ही रहेंगे!" ईशा और मीता पेड़ के नीचे अपनी फ्रॉक फैलाए खड़ी हो गईं ताकि आम सीधे उनकी गोद में गिरें। राहुल पीछे से चिल्लाया, "थोड़ा दाईं तरफ मारो आर्यन, वहां सबसे बड़ा गुच्छा है!" तभी आर्यन ने ज़ोर से डंडा चलाया और 'टप-टप' करते हुए तीन बड़े आम नीचे गिरे। आम गिरते ही जैसे वहां कोई मुकाबला शुरू हो गया। गोलू सबसे छोटा था, पर वह सबसे फुर्ती से भागा और एक आम झपट लिया। बाकी सब भी हंसते-खिलखिलाते हुए आम पकड़ने के लिए दौड़े। सबने मिलकर ढे़र सारे आम इकट्ठे किए। ईशा ने सुझाव दिया, "चलो, इन्हें ठंडे पानी में धोकर खाते हैं।" सब दोस्त पेड़ की घनी छांव में बैठ गए। वह आम इतने मीठे थे कि उनकी मिठास ने गर्मी की थकान को पल भर में दूर कर दिया। खाते-खाते राहुल ने कहा, "अगली छुट्टियों में भी हम यहीं मिलेंगे और अपना 'मैंगो मिशन' फिर से शुरू करेंगे।" उस दिन बच्चों ने सीखा कि मिल-जुलकर काम करने और बांटकर खाने में जो आनंद है, वह अकेले में नहीं।
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बहुत सारे फल नीचे गिरे
गुरमान ढिल्लों, उम्र-11 साल
मेरी दोस्त मुन्नी के साथ बगीचे में आम तोड़ने गए। हमने काफी देर मत्था पच्ची की लेकिन फल नहीं तोड़ पाए फिर अचानक मुझे एक डंडा दिखाई दिया। मैंने कहा मुन्नी मैं डंडा मरता हूं तुम फल उठाना जैसे ही मैंने डंडा मारा तो बहुत सारे फल नीचे गिरे उसे देखकर आसपास घूम रहे लोग भी फल उठाने आ गए।
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पेड़ भी बच्चे को देखकर खुश होता है।
सैयद कमरान अली, उम्र-7 साल
एक गांव में, एक विशाल और हरा-भरा आम का पेड़ था। जिसकी घनी छाया में बच्चे खेलते और बड़े आराम करते थे। गर्मियों में वह पेड़ रसीले और मीठे आमों से लद जाता, जिसे खाकर सब खुश होते। आम का पेड़ भी बच्चे को देखकर खुश होता और उसे अपनी छाया और फल देता। इस तरह आम का पेड़ सिर्फ एक फल देने वाला पेड़ नहीं, बल्कि बच्चे और गांव वालों का एक सच्चा साथी बन गया, जो हमें सिखाता है कि प्रकृति से जुड़ाव हमें शांति और खुशी देता है।
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आम का पेड़ और बच्चे
समग्र सिंह, उम्र-7 साल
एक दिन की बात है। पांच दोस्त सुबह-सुबह बगीचे में खेलने गए। बगीचा बहुत हरा-भरा और सुंदर था। वहां एक बड़ा और घना आम का पेड़ लगा हुआ था। पेड़ पर बहुत सारे पके हुए पीले-पीले आम लटक रहे थे। आम देखकर बच्चों के मुंह में पानी आ गया। राधा ने खुशी से कहा, “देखो, पेड़ पर कितने सारे आम हैं।”
राजू बोला, “चलो, आज आम खाते हैं।” यह कहकर राजू ने एक डंडा उठाया और आम के पेड़ पर मारने लगा। तभी कई आम नीचे गिरने लगे। रानू और अमन जल्दी-जल्दी आम उठाने लगे। बाकी बच्चे भी दौड़-दौड़ कर आम इकट्ठा करने लगे। सब बच्चे बहुत खुश थे और हंसते-खेलते आम जमा कर रहे थे। तभी अचानक एक आम ज़ोर से गिरा और पास खड़ी बच्ची डर गई। उसी समय वहां उनकी टीचर आ गईं। टीचर ने बच्चों से कहा,“बच्चो, पेड़ को मारना अच्छी बात नहीं है। पेड़ हमें फल, छाया और हवा देता है। हमें पेड़ों से प्यार करना चाहिए।” बच्चों को अपनी गलती समझ आ गई। सबने माफी मांगी और कहा,
“अब हम कभी पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और उनकी देखभाल करेंगे।” टीचर मुस्कराईं और बच्चों की तारीफ की।
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आम का पेड़
मनीषा पोटलिया, उम्र-9 साल
एक बगीचा है, इसमें बच्चे आम ले रहे हैं। एक बच्चा लकड़ी की मदद से आम नीचे गिरा रहा है। दूसरे बच्चे आम लेने के लिए दौड़ रहे हैं। सभी बच्चे पेड़ के पास आ रहे है, उनके नाम रोहन सोहन ,मोहन ,मीना, रीना, टीना है। टीना पेड़ के नीचे पड़े सभी आम ले रही है। रीना अपने हाथ में टिफिन लेकर आ रही है। मीना पास में खड़ी सबको देखकर हंसने लगी। पेड़ पर बहुत सारे आम है, पेड़ हरा भरा है।
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प्रकृति से प्रेम
वर्षिका शर्मा, उम्र-10 साल
गर्मियों की एक दोपहर कुछ बच्चे आम के पेड़ के नीचे खेल रहे थे। पेड़ पर पके हुए आम लटके देखकर वे बहुत खुश हो गए। आम पाने के लिए बच्चों ने पेड़ की डालियां हिलानी शुरू कर दीं। कुछ आम ज़मीन पर गिर गए और पेड़ भी हिलने लगा। तभी वहां से गुजर रहे एक बुज़ुर्ग ने बच्चों को समझाया कि पेड़ हमारे मित्र हैं और उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। बच्चों को अपनी गलती समझ आ गई। उन्होंने केवल गिरे हुए आम उठाए और आपस में बांटकर खाए। बच्चों ने प्रकृति से प्रेम और मिल-जुलकर रहने की सीख ली।
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आम के पेड़ का रहस्य
आदित्य वर्मा, उम्र-13 साल
गांव के पुराने आम के पेड़ के नीचे महिमा और उसके दोस्त रोज खेलते थे। एक दिन आम गिराते समय जमीन से अजीब आवाज आई। महिमा ने ध्यान से देखा तो झाड़ियों के पीछे मिट्टी हिली हुई थी। तभी किसी के भागने की सरसराहट सुनाई दी और सभी डर गए। महिमा ने हिम्मत दिखाते हुए दोस्तों को रोका और पास पड़े पत्थर से इशारा किया। झाड़ियों से एक आदमी भागता दिखा। नीचे एक छोटा सा बक्सा मिला, जिसमें चोरी किए हुए सिक्के थे। बच्चों ने गांव वालों को बुलाया और चोर पकड़ा गया। सबने महिमा की समझदारी और साहस की तारीफ की। उस दिन के बाद आम का पेड़ सिर्फ खेल की जगह नहीं, बल्कि बहादुरी की कहानी बन गया।
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वृक्षारोपण सभी को करना चाहिए
अनन्या वानखेेडे, उम्र-7 साल
एक समय की बात है, दिन था 5 जून। जैसा की बच्चों को मास्टरों ने बताया के इस दिन सभी को वृक्षारोपण करना चाहिए। घर जाकर एक कॉलोनी के बच्चों ने मिलकर फलों के पेड़ लगाए और नियमित रूप से अपनी-अपनी बारी के अनुसार बच्चे हर दिन स्कूल से आकर कोई पानी देता तो कोई खाद डालता तो कुछ और करता दिखाई देता। देखते ही देखते वर्षा ऋतु में यह पेड़ बड़े हो गए और इन पर खूब मीठे मीठे फल आ गए। सब मिलकर इन्हें तोड़ते और मिलकर खाते आनंद खुशियां मनाते हैं. यही नहीं इनकी ठंडी ठंडी छांव में बूढ़े बड़े आराम से बैठे और पेड़ों के साथ खिलखिलाते |
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आम का पेड़ और सच्ची दोस्ती
ऋषभ शर्मा, उम्र-11 साल
स्कूल की छुट्टी के बाद पांच दोस्त की छुट्टी के बाद पांच दोस्त – सिया, अनमोल, ज़ारा, नील और आरव मैदान की ओर भागे। मैदान के कोने में एक बड़ा - सा आम का पेड़ था, जिसकी शाखाएं आमों से झुकी हुई थीं। चमकते पीले आम देखकर सबका मन ललचा गया। अनमोल ने तुरंत एक लंबी सूखी टहनी उठाई और पेड़ पर ज़ोर से मारने लगा। कुछ आम तो गिरे, लेकिन साथ में छोटी–छोटी डालियां और पत्तियां भी टूटकर जमीन पर बिखर गईं। बाकी बच्चे भी जोश में आ गए और किसी ने पत्थर तो किसी ने जूता तक फेंक दिया। सिया ने जोर से सबको पुकारा, “रुको, हम क्या कर रहे हैं? इस पेड़ ने हमें छाया और फल दिए और हम इसे चोट पहुंचा रहे हैं!” बाकी बच्चे भी लौट आए और चुपचाप टूटी टहनियों की ओर देखने लगे। ज़ारा बोली, “अगर यह पेड़ न रहा, तो अगले साल हम आम कहां से तोड़ेंगे?” सबको अपनी गलती समझ आ गई। नील ने सुझाव दिया कि वे पेड़ के चारों ओर साफ–सफाई करें और पत्थर हटाएं। उन्होंने मिलकर सूखी पत्तियां उठाईं, टूटी टहनियां एक जगह रखीं और पेड़ के तने पर पानी डाला, जैसे मरहम लगा रहे हों। उसी वक्त वहां से गुज़रते माली चाचा ने यह सब देखा और मुस्कराते हुए बोले, “गलती मानकर उसे सुधारना ही सच्ची बहादुरी है।” माली चाचा ने बच्चों को प्यार से कुछ पके हुए आम तोड़कर दिए और कहा कि बिना नुकसान पहुंचाए भी फल पाए जा सकते हैं। बच्चों ने आम बराबर बांटे और वादा किया कि अब वे किसी भी पेड़ पर पत्थर नहीं मारेंगे। उस दिन से आम का पेड़ सिर्फ उनका “फल वाला पेड़” नहीं, बल्कि “सबसे अच्छा हरा दोस्त” बन गया।
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जादुई आम का रहस्य
सिध्दांत पटेल, उम्र-13 साल
एक गांव में टीटू, मीना, सोनू, पिंकी और गोलू नाम के पांच दोस्त रहते थे। एक धूप वाले दिन वे एक पुराने आम के पेड़ के पास खेल रहे थे। यह पेड़ आमों से भरा था। लेकिन गांव में अफवाह थी कि यह एक जादुई पेड़ है और इसके आम खास हैं। बच्चे बहुत उत्साहित थे। सोनू ने कहा, "चलो आम तोड़ते हैं।" उसने एक मजबूत छड़ी उठाई और आमों पर निशाना लगाया। जैसे ही उसने पहला आम गिराया। एक अजीब सी आवाज आई और पेड़ के चारों ओर एक हल्की बैंगनी रोशनी चमकने लगी। मीना और पिंकी जो आम उठाने के लिए दौड़ी थीं चौंक गईं। उन्होंने देखा कि गिरे हुए आम चमक रहे थे। गोलू जो थोड़ा डरपोक था, पीछे हट गया। टीटू ने हिम्मत करके एक आम उठाया। आम पकड़ते ही उसे लगा जैसे उसके अंदर अचानक बहुत ताकत आ गई हो। बच्चों ने और आम गिराए। हर आम उन्हें कोई नया छोटा जादू दे रहा था। किसी को बहुत तेज दौड़ने की शक्ति मिली। तो किसी को पक्षियों की भाषा समझने की। उन्होंने खूब मज़े किए। लेकिन जल्द ही रात हो गई और रोशनी फीकी पड़ गई। बच्चे समझ गए कि यह जादू केवल एक दिन के लिए था। उन्होंने घर जाकर किसी को इस रहस्य के बारे में नहीं बताया। उस दिन के बाद हर साल उस खास दिन पर वे उस जादुई पेड़ के पास जाते हैं। आम खाते और अपने अनोखे कारनामों से गांव में धूम मचा देते।
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अगर धैर्य रखो तो पके आम खुद गिर जाते हैं
सिद्धार्थ गर्वा, उम्र-7 साल
एक गांव के पास एक बड़ा और हरा-भरा आम का पेड़ था। उस पेड़ पर हर साल ढे़र सारे रसीले आम लगते थे। गर्मियों की छुट्टियों में गांव के बच्चे रोज शाम को उसी पेड़ के पास खेलने आते थे। उस दिन भी पांच-छह बच्चे खुशी-खुशी खेलते हुए आम के पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर पके हुए पीले आम देखकर सबके मुंह में पानी आ गया। एक लड़के ने सोचा कि अगर वह डंडी से आम गिराए तो सब मिलकर खा सकते हैं। वह डंडी लेकर आम तोड़ने लगा। कुछ आम नीचे गिर गए और बच्चे उन्हें पकड़ने के लिए दौड़ पड़े। एक छोटी लड़की झट से आगे बढ़ी और गिरे हुए आमों को टोकरी में रखने लगी। सब बहुत खुश थे और हंसते-खेलते आम इकट्ठा कर रहे थे। तभी पास से एक बुज़ुर्ग किसान वहां आ गया। उसने बच्चों को समझाते हुए कहा “बच्चों पेड़ हमारे मित्र होते हैं। डंडी से आम तोड़ने से पेड़ को चोट लगती है।” यह सुनकर बच्चों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने किसान से माफी मांगी। किसान ने मुस्कराते हुए कहा, “अगर धैर्य रखो तो पके आम खुद गिर जाते हैं, और पेड़ भी सुरक्षित रहता है।” बच्चों ने किसान की बात मानी। वे नीचे गिरे आम ही उठाने लगे और पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाया। फिर सबने आम बांटकर खाए।
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आम का मीठा फल और दोस्ती का स्वाद
पुष्पेंद्र भेल, उम्र-19 साल
गर्मी की छुट्टियों की वह एक सुनहरी दोपहर थी। सूरज अपनी पूरी चमक के साथ चमक रहा था। लेकिन गांव के बाहरी हिस्से में लगे विशाल आम के पेड़ की घनी छाया के नीचे मौसम बहुत सुहावना था। इस पेड़ पर रसीले, सुनहरे पीले आम लदे हुए थे। जिनकी खुशबू दूर-दूर तक फैल रही थी। गांव के छह पक्के दोस्त रोहन, सीमा, अमित, मीना, राजू और छोटी पिंकी। हमेशा की तरह स्कूल की छुट्टी के बाद बगीचे में इकट्ठा हुए। वे सभी ललचाई नजरों से उन ऊंचे आमों को देख रहे थे। रोहन ने जोश में आकर कहा, "आज तो इन मीठे आमों का स्वाद चखना ही होगा।" बस फिर क्या था बच्चों की टोली काम पर लग गई। राजू ने एक लंबी छड़ी उठाई और निशाना साधने लगा। अमित और रोहन पीछे से उत्साह बढ़ा रहे थे। जबकि मीना और सीमा यह देखने के लिए तैयार खड़ी थीं, कि आम कहां गिरता है। जैसे ही राजू ने जोर से छड़ी घुमाकर एक डाल पर प्रहार किया, टप-टप करके दो-तीन बड़े और पके हुए आम नीचे गिरने लगे। पिंकी सबसे फुर्तीली थी। वह तुरंत लपककर गिरते हुए आमों को पकड़ने के लिए दौड़ी। बाकी बच्चे भी खिलखिलाते हुए आमों की ओर भागे। उस समय उनके चेहरों पर जो खुशी थी, वह किसी कीमती खजाने को पाने जैसी थी। धूल की परवाह किए बिना, सबने मिलकर आम इकट्ठे किए। सभी बच्चों ने पेड़ की छांव में बैठकर एक साथ उन आमों को मिल-बांटकर खाया। वे आम सिर्फ मीठे ही नहीं थे। बल्कि उनमें दोस्ती और साथ मिलकर मेहनत करने का स्वाद भी छिपा था। शाम होते-होते वे सभी अपनी सुनहरी यादें लेकर घर की ओर चल दिए। इस वादे के साथ कि कल फिर इसी पेड़ के नीचे नई शरारत करेंगे।
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आम का पेड़ और बच्चों की सीख
ग्रंथ सिंघह, उम्र-10 साल
एक गांव के बाहर हरे-भरे खेतों के बीच एक बड़ा सा आम का पेड़ था। उस पेड़ पर हर साल मीठे और रसीले आम लगते थे। गांव के बच्चे स्कूल से लौटते समय अक्सर उस पेड़ के पास रुक जाते। एक दिन सभी बच्चे राहुल, मोहन, रीना, पूजा और उनके दोस्त पेड़ के नीचे इकट्ठा हो गए। सबको आम खाने का मन हो रहा था। मोहन ने एक डंडी उठाई और पेड़ पर मारने लगा ताकि आम नीचे गिर जाएं। कुछ आम गिर भी गए। यह देखकर बाकी बच्चे भी खुश हो गए और इधर-उधर से आम उठाने लगे। कोई दौड़ रहा था, कोई हंस रहा था और कोई आम इकट्ठा कर रहा था। तभी पास से गुजर रहे एक बुजुर्ग किसान ने यह सब देख लिया। किसान ने बच्चों को प्यार से बुलाया और पूछा, “बच्चो, क्या यह आम का पेड़ तुम्हारा है?” बच्चे शर्मिंदा होकर चुप हो गए। किसान ने समझाया, “पेड़ हमें फल, छाया और हवा देता है। अगर हम उसे चोट पहुंचाएंगे, तो वह हमें फल कैसे देगा? बच्चों को अपनी गलती समझ आ गई। राहुल ने तुरंत डंडी फेंक दी और सबने किसान से माफी मांगी। किसान मुस्कुराए और बोले, “अगर धैर्य रखो और सही तरीके से मांगो तो प्रकृति हमेशा देती है।” उन्होंने कुछ पके हुए आम खुद तोड़कर बच्चों को दे दिए। बच्चे बहुत खुश हुए। उन्होंने आम खाए और यह वादा किया कि आगे से वे कभी पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
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बच्चों को आम बहुत पसंद थे
दर्शील आर्य, उम्र-7 साल
एक दिन गर्मियों की छुट्टियों में गांव के बच्चे पास के बगीचे में खेलने गए। बगीचे में एक बड़ा और हरा-भरा आम का पेड़ था, जिस पर ढे़र सारे पके हुए आम लगे थे। बच्चों को आम बहुत पसंद थे। जैसे ही हवा चली, एक आम पेड़ से नीचे गिर। यह देख सभी बच्चे खुश हो गए। राधा जल्दी से आम उठाने दौड़ी। उसी समय मोहन ने कहा,"अगर हम पेड़ को हिलाएं तो और हम गिरेंगे। यह सुनकर कुछ बच्चे पेड़ के पास गए। राहुल ने डंडे से धीरे-धीरे टहनियां हिलाई। उन्होंने गिरे हुए आम उठा आपस में बांटे और खुशी-खुशी घर चले गए।
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इमली खुश हो गई
भावेश, उम्र-11 साल
राजू अपनी टोली लेकर घूम रहा था। अचानक से सारे बच्चे ठहर गए क्योंकि उन्हें एक आम का पेड़ दिखा। पेड़ पर बहुत सारे रसीले आम थे। राजू ने लकड़ी से आम गिराए। इमली खुश हो गई, गोलू भाग रहा था। मीना ने आम उठाए। चिंकी ने कुछ पकड़ा भीम दोड़ा आया आम के कारण, मीणा आम उठाने के लिए झुकी तो एक और आम आ जाता, इमली और चिंकी को हंसी आती है और राजू रह जाता है।
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अभी आम कच्चे और छोटे थे
केयांश बांठिया, उम्र- 8 साल
दिसंबर का महीना था और हमारे स्कूल की छुट्टियां थी। हम दोस्तों ने पार्क में पिकनिक मनाना का सोचकर, घर के पास में ही एक बड़े बगीचे में पहुंच गए। घर से लाए हुए टिफिन को साझा कर टहलते हुए एक आम का पेड़ दिखा। अभी आम कच्चे और छोटे थे पर मुंह में लार टपकने लगी। बगीचे के माली से पूछा तो हमारी भोली सकल देख कर आम तोड़ने की परमिशन दे दी। चिंटू बड़ा-सा डंडा लेकर आ गया और पत्तों के झुंड में छिपे आमों को हिलाने लगा। हम सब ने दौड़ दौड़ कर नीचे गिरे आमों को इकट्ठा किया और वहीं पर मस्त पार्टी की। थोड़े आम माली के बच्चों को भी दिए। घर आकर मम्मी पापा को आज की पार्टी की मस्त कहानी सुनाई।
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आम का खेल
पान्शुल पारीक, उम्र-13 साल
एक गांव के बाहर एक बड़ा आम का पेड़ था। उस पेड़ पर बहुत सारे कच्चे और पके आम लगे हुए थे। गर्मी की छुट्टियों में छोटू व उसके दोस्त खेलने के लिए वहां इकट्ठा हुए। बच्चों ने आम तोड़ने का खेल खेलने का फैसला किया। उन्होंने तय किया कि एक बच्चा डंडे से आम गिराएगा और बाकी बच्चे उन्हें पकड़ेंगे छोटू ने मजबूत डंडा उठाया और पेड़ की एक डाल पर निशाना लगाया। बाकी सभी बच्चे नीचे गिरे आमों को लपकने के लिए तैयार हो गए जैसे ही छोटू ने डंडा मारा, कुछ आम नीचे गिरे। बच्चे खुशी से चिल्लाते हुए आमों की तरफ दौड़े, हर कोई सबसे पहले आम पकड़ना चाहता था। कुछ बच्चों ने आम उठा लिए और कुछ हंसते हुए खाली हाथ रह गए। वे सभी बहुत खुश थे और उन्होंने मिलकर आमों को बांटकर खाया। यह एक मजेदार दिन था जहां सभी दोस्तों ने मिलकर खूब मस्ती की।
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आमों का पेड़ और बच्चों की सीख
भव्यम मीणा, उम्र- 8 साल
गांव के बाहर एक बड़ा और घना आम का पेड़ था। गर्मियों में उस पेड़ पर ढे़र सारे रसीले आम लगते थे। एक दिन स्कूल की छुट्टी में कई बच्चे वहां खेलने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने पेड़ पर लटके पीले आम देखे, सब खुश हो गए। कुछ बच्चे पेड़ को हिलाने लगे, एक लड़का डंडे से आम गिराने की कोशिश करने लगा और एक लड़की नीचे गिरे आमों को उठाने लगी। बच्चे खुशी-खुशी आम बटोर रहे थे। तभी एक आम ज़ोर से गिरा और पास खड़ी लड़की को लगते-लगते बचा। यह देखकर सभी रुक गए। तब एक समझदार बच्ची ने कहा, “हमें सावधानी से आम तोड़ने चाहिए और पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।” सब बच्चों ने उसकी बात मानी। उन्होंने धीरे-धीरे आम इकट्ठा किए और आपस में बराबर बांट लिए। उस दिन बच्चों ने सीखा कि मज़ा तभी आता है जब हम मिल-जुलकर और समझदारी से काम करें।
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आम की बगिया और वो मस्त मौसम
नैतिक शर्मा, उम्र- 8 साल
गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी थीं और धूप की तपन के बीच, गांव की उस पुरानी बगिया में एक अलग ही रौनक थी। नन्ही, रोहन, मीरा, बिट्टू और छोटा सोनू इन पांचों दोस्तों की टोली का एक ही मिशन था। श्यामलाल काका के बाग से सबसे रसीले आम तोड़ना। आज का दिन कुछ खास था। हवा में सोंधी मिट्टी की खुशबू थी और पेड़ों पर लदे सुनहरे आम जैसे बच्चों को चिढ़ा रहे हों। रोहन ने एक लंबी डंडी उठाई और निशाना साधा। बिट्टू और सोनू उसके पीछे-पीछे भागे जा रहे थे, मानो कोई जंग जीतने वाले हों। मीरा और नन्ही ने अपने हाथ फैला रखे थे ताकि ऊपर से गिरता हुआ कोई भी आम ज़मीन पर गिरकर फट न जाए। "वो देख, सबसे ऊपर वाला!" बिट्टू चिल्ला उठा। रोहन ने पूरी ताकत से डंडी चलायी और टप्प से एक बड़ा पका हुआ आम नीचे गिरा। गिरते ही नन्ही उसकी तरफ लपकी, जैसे कोई कीमती खजाना मिल गया हो। सबके चेहरों पर जो मुस्कान थी। वो किसी बड़ी मेहनत की कामयाबी जैसी थी। वहां कोई मोबाइल नहीं था। कोई वीडियो गेम नहीं था, बस दोस्तों का साथ और डंडी से आम तोड़ने की वो छोटी सी खुशी थी। उन्होंने मिल-बांट कर उन खट्टे-मीठे आमों का स्वाद लिया। उन बच्चों के लिए वो बगिया सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि उनकी अपनी एक अलग दुनिया थी जहां हर गिरा हुआ आम एक नया जश्न लेकर आता था।
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मीठे-मीठे आम
राजवर्धन, उम्र-10 साल
आज मौसम बहुत अच्छा था। सभी दोस्त दौड़ते-खेलते आम के बड़े पेड़ के पास पहुंचे। पेड़ पर ढे़र सारे पीले-पीले और मीठे आम लटके थे। राजू ने एक लंबी लकड़ी उठाई और आम तोड़ने की कोशिश करने लगा। जैसे ही उसने लकड़ी घुमाई, 'टप' से एक आम नीचे गिरा। आम गिरते ही सब बच्चे खुशी से चिल्लाने लगे देखो-देखो, आम गिरा।पिंकी ने झटपट दौड़कर आम उठा लिया। सब दोस्त बहुत खुश थे। उन्होंने साथ मिलकर आम खाए और खूब मस्ती की। सच में, दोस्तों के साथ आम खाना बहुत मज़ेदार होता है।
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बचपन के दिन
प्रव्या जैन, उम्र- 9 साल
एक बार गर्मी की छुट्टियों में मैं अपनी मां के साथ अपनी नानी के घर गई। वहां मौसी,मामा के बच्चे भी थे। हम सब खेल के मैदान में इकट्ठा हुए और सोचने लगे कि हमें क्या खेलना चाहिए। हमें कोई अच्छा खेल समझ नहीं आया। तभी हमें आम का पेड़ दिखा। हमने तय किया कि हम सभी आम तोड़ेंगे और आम खाकर खूब मजे करेंगे। टीमा ने पूछा कि हम आम कैसे तोड़ेंगे। टिंकू ने कहा मेरे पास एक आइडिया है। मुझे मैदान में एक डंडा दिखा था। हम उससे आम तोड़ सकते हैं। मिनी बोली ठीक है टिंकू तुम वह डंडा ले आओ। टिंकू डंडा ले आया और सभी बच्चे आम तोड़ने में लग गए। पहली बार में उनसे कोई आम नहीं टूटा। तभी मिनी ने कहा कि टिंकू दोबारा कोशिश करो तुमसे आम जरूर टूटेंगे। क्योंकि कोशिश करने वाले की हार नहीं होती और दूसरी बार में टिंकू ने दुगने उत्साह से आम तोड़ने का प्रयास किया। अबकी बार पेड़ से आम टूट गए। सबने आम खाये, वे खुश हो गए और घर चले गए उन्होंने तय किया कि रोजाना अब वह इसी खेल मैदान में आयेंगे खेलेंगे और खूब आम भी खाएंगे।
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रसीले आम और दोस्तों की टोली
प्रतिभा खोरवाल, उम्र-12 साल
गर्मी की छुट्टियों के दिन थे। दोपहर का समय था। लेकिन घर में बैठने का किसी का मन नहीं था। रोहन, रिया, अमन और उनके बाकी दोस्त खेलने के लिए बगीचे में इकठ्ठा हुए। खेलते-खेलते उनकी नज़र बगीचे के कोने में खड़े एक विशाल आम के पेड़ पर पड़ी। पेड़ पीले और रसीले आमों से लदा हुआ था। पके हुए आमों को देखकर सभी बच्चों के मुंह में पानी आ गया। सबने फैसला किया कि आज तो इन मीठे आमों का स्वाद चखकर ही रहेंगे। रोहन (गुलाबी शर्ट में) ने कहा, "रुको, मैं अपनी लकड़ी से निशाना लगाता हूं" बाकी सब बच्चे उत्साहित होकर उसे देखने लगे। रोहन ने पूरी ताकत और सटीक निशाने के साथ लकड़ी को पेड़ की डाली की तरफ फेंका। नीचे खड़ी पिंकी (नारंगी फ्रॉक में) तैयार खड़ी थी कि जैसे ही आम गिरे, वह उसे लपक ले। बाकी बच्चे भी दौड़कर पेड़ के पास आ गए। तभी 'टप' की आवाज आई और दो बड़े-बड़े पके हुए आम नीचे गिरे। पिंकी ने दौड़कर आम उठाया और खुशी से चिल्लाई, "मिल गया! मिल गया!" सभी बच्चे खुशी से झूम उठे। उस दोपहर उन्होंने मिल-बांटकर खूब आम खाए। उस दिन उन्हें समझ आया कि खेल-कूद के साथ-साथ मिल-बांटकर खाने का मज़ा ही कुछ और है।
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मौज मस्ती का बचपन
विआन धानका, उम्र- 9 साल
गोविंद शंकर सुमन मीनू अनिल सिमरन हम सभी एक साथ खेलते थे। हम स्कूल से छुट्टी होते ही घर पर आते और अपने के पर बगीचे में चले जाते थे और वहां पर बगीचे में हम खूब खेलतें और और जब भूख लगती तो गोविंद लकड़ी से पेड़ पर आम तोड़ता, सिमरन आम उठा लेती, शंकर भी पेड़ पर चढ़ जाता और आम को तोड़ता और हम सभी मीठे मीठे आम को खूब खाते और खेलते थे। बहुत खुश रहते थे। हमेशा मिल जुलकर रहना चाहिए खुश रहना चाहिए।
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दादाजी मुस्कुरा रहे हैं।
जीनल, उम्र-10 साल
हमारे घर के आंगन में एक आम का पेड़ है। दादी बताती हैं कि यह पेड़ दादाजी ने बहुत साल पहले लगाया था। मैं दादाजी को कभी देख नहीं पाया, लेकिन इस पेड़ को देखकर लगता है जैसे वे अभी भी हमारे आसपास ही हों। जब भी गर्मी आती है और आम पकते हैं, मुझे लगता है कि दादाजी हमें कुछ देने आए हैं।
एक दिन कॉलोनी के पांच बच्चे आम लेने आ गए। कोई डंडा उठा रहा था, कोई पत्थर ढूंढ रहा था। मुझे अच्छा नहीं लगा। मैंने उन्हें मना किया और कहा कि इस पेड़ को मत मारो, यह दादाजी की निशानी है। मैंने बताया कि दादी कहती हैं जो आम अपने आप गिरते हैं, वही लेने चाहिए। सब बच्चे पहले चुप हो गए। फिर हम सब पेड़ के नीचे बैठकर इंतज़ार करने लगे। थोड़ी देर बाद हवा चली और एक आम ज़मीन पर गिरा। मैंने उसे उठाया और सबको बराबर बांट दिया। फिर दूसरा आम गिरा, उसे भी सबने मिलकर खाया। किसी को ज़्यादा नहीं मिला, लेकिन सब खुश थे। कुछ बच्चों ने कहा कि डंडा मारते तो ज़्यादा आम मिल जाते। मैंने कहा, “लेकिन तब दादाजी को अच्छा नहीं लगता।” यह सुनकर किसी ने फिर कुछ नहीं कहा। हम सब वहीं बैठकर आम खाते रहे, बातें करते रहे और हंसते रहे। पेड़ को कोई चोट नहीं लगी। उस दिन मुझे समझ आया कि चीज़ें बांटने से घटती नहीं हैं, और जो प्यार से लगाया जाता है, वह सालों बाद भी लोगों को जोड़ता रहता है। आज भी जब मैं उस पेड़ के नीचे खड़ा होता हूं, तो लगता है दादाजी मुस्कुरा रहे हैं।
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आम का पेड़
हेतार्थ राजगुरु, उम्र- 7 साल
गर्मियों के दिन थे। एक आम का पेड़ था, उस पर बहुत सारे आम लगे हुए थे, तभी अचानक कुछ बच्चों की नजर उस पेड़ पर गई। बहुत सारे बच्चे वहां दौड़कर आ गए। एक लड़का जमीन पर से एक लकड़ी उठाकर लाया और घुमा- घुमा कर उसे पेड़ की ओर फेकने लगा और एक लड़की गिरते हुए आमों की ओर देखकर उन्हें गिरते हुए पकड़ना चाह रही थी। यह दृश्य देखकर सभी बच्चे बहुत खुश हुए और उन सभी बच्चों के मुंह से हंसी छूट गई और वह बच्चे हर साल ऐसे ही सुंदर-सुंदर मोती जैसे आम खाने लगे और खुशी मनाने लगे।
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बिना इजाजत लिए फल नहीं तोडे़ंगे
अरहान मंसुरी, उम्र-10 साल
बड़े दिन की छुट्टीयों में चिंटू पिंटु के साथ उनके सभी दोस्त उनके गांव रामपुर आयें हुए थे, वह सब मिलकर दिनभर गांव के आसपास घुमते रहते और धमाचौकड़ी मचाते रहते थे। एक दिन उन्होंने पेड़ से आम तोड़ने की योजना बनाई। पेड़ से आम तोड़ तो लिए लेकिन आम उठा कर ले जाते और उसका मजा लेते उससे पहले ही उन पेड़ों का मालिक किसान वहां पर आ गया। सभी ने वहां से भागकर बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई और इस घटना के बाद सबने यह प्रण किया कि आगे से कभी भी किसी से बिना इजाजत लिए फल नहीं तोडे़ंगे।
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सभी बच्चों को आम भी दिए
प्रियांश बसवाल, उम्र- 8 साल
भगत लाल नाम का एक किसान था। वो बहुत बूढ़ा था। उसके परिवार में और कोई नहीं था। वह अपने खेत की सब्जियां और फल बेच कर अपना गुजारा करता था। एक दिन वह अपने आंगन में लगे आम के पेड़ से फल (आम) तोड़ने की कोशिश करने लगा परंतु वह कमजोर और निर्बल होने के कारण तोड़ नही पा रहा था। पास में ही बच्चे खेल रहे थे। उनकी नज़र भगत लाल पर पड़ी। उन्होंने भगत लाल का ये हाल देखा तो उन्हें दया आ गई और उन्होने मदद करने की सोची। फिर क्या था सभी बच्चे भगत लाल की मदद करने में जुट गए। देखते ही देखते उन्होंने लकड़ी और पत्थरों की मदद से कुछ ही देर में उन्होंने सारे आम तोड़ लिए, भगत लाल बच्चों की मदद और मेहनत से खुश हुआ। फिर उसने सभी बच्चों को आम भी दिए।
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मीठे आम का आनंद
अक्षिता, उम्र- 6 साल
पिंकू, माया ,राहुल ,राधा , नीतिका और आदित्य यह सभी पकड़म पकड़ाई खेल रहे थे । वह थोड़ी देर खेलते रहे तभी पिंकू की नजर एक आम के पेड़ पर पड़ी पिंकू ने सभी को बुलाया और कहा कि देखो देखो वहां आम का पेड़ है। उधर तो मीठे-मीठे आम दिखाई दे रहे हैं। चलो हम भी चलते हैं उन मीठे-मीठे आमों को खाने के लिए। नीतिका - हां क्यों नहीं हम भी खाने के लिए चलेंगे। सभी बोले हां हां क्यों नहीं हम भी खाने के लिए चलेंगे । सभी आम के पेड़ के पास चले गए। राधा ने कहा अब हम इन मीठे-मीठे आमों को कैसे तोड़े, तभी आदित्य के पैरों के नीचे उसे एक डंडा दिखाई दिया। उसने उस डंडे को उठाया और पेड़ के सबसे मीठे आम पर वह डंडा फेंका वह मीठा आम पिंकू के हाथ में गिर गया तभी सभी ने कहा आदित्य हमें भी उतार कर दो आदित्य ने सभी के लिए अनेकों आम उतारे सभी आम खाकर बहुत खुश हुए सभी थोड़ी देर और खेले और फिर अपने-अपने घर खुशी-खुशी चले गए।
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आवाज बहुत सुरीली थी
लव्या, उम्र- 9 साल
एक आम का पेड़ था। उससे बच्चे आम तोड़ रहे थे। आम बहुत मीठे थे और बहुत रसीले थे। बच्चों ने मिलकर आम खाए उनको आम बहुत पसंद आए। आसमान में चिड़िया उड़ रही थी और हमने चिड़ियों को गाना गाते हुए देखा। उनकी आवाज बहुत सुरीली थी। हमने बहुत सारे पेड़ देखें उन पर बहुत सारे फूल देखें। वहां बहुत अच्छा मौसम था। आम की गुठली को उन्होंने अपने घरों में लगाई।
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कहानी रसीले आम
लव शर्मा, उम्र- 10 साल
एक दिन की बात है, मोहन अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए बगीचे में जा रहा था। तभी उन्होंने रास्ते में आम का पेड़ देखा , तभी मोहन ने कहा चलो आम तोड़ते हैं। उसके दोस्तों ने कहा हा हा चलो हम सब आम तोड़ने चलते हैं। मोहन ने एक छड़ी उठाई और पेड़ से आम तोड़ने लगा नीतेश, तनवी, अमन, पिंकी और तनिषा आम उठाने लगे। वे सब मजे से आम खाने लगे , तभी तनवी ने कहा ये आम कितने मीठे और रसीले हैं। वे सब आम खाते खाते बगीचे में पहुंच गए और खेलने लगे । धीरे धीरे शाम हो गई और सब अपने अपने घर चले गये
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आम का पेड़
रिशिता टहलयानी, उम्र- 10 साल
गांव के कुछ बच्चे एक आम के पेड़ के नीचे खेल-खेल में आम तोड़ कर बहुत खुश हो रहे थे उधर से एक राहगीर जा रहा था। यह देखकर उसे अपना बचपन याद आ गया और सोचने लगा कि आज भी यह आम का पेड़ उतने ही खुशी बच्चों को दे रहा है जितनी उसे बचपन में देता था।
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राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Published on:
24 Dec 2025 12:52 pm


यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है... यह निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।
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