
फाइल फोटो: पत्रिका
SMS हॉस्पिटल के डॉ. प्रदीप शर्मा, अतिरिक्त अधीक्षक ने बताया कि 'सुबह 11 बजे डॉ. बी.एल. यादव ने सफल और जटिल सर्जरी की जानकारी मुझे भेजी। 11.50 पर उनकी ओर से ग्रुप फोटो मिलते समय बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी तस्वीर होगी। कुछ ही देर बाद अस्पताल में उनके निधन की खबर सुनने को मिली। एक पल के लिए विश्वास नहीं हुआ। लगा कोई भयानक गलतफहमी है। घबराकर कुछ चिकित्सक साथियों को फोन किया। सब अवाक थे। फिर महाराष्ट्र में एक परिचित डॉक्टर से संपर्क किया। उधर से जो जवाब मिला, उसने भीतर तक तोड़ दिया…“सब कुछ खत्म हो गया।”
ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर के रूप में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई थी, लेकिन कभी थकान या तनाव को चेहरे पर नहीं आने दिया। कुछ दिन पहले जिस महिला के पेट से 10 किलो की गांठ निकालकर उन्होंने उसे नई जिंदगी दी थी, वही हाथ आज हमारे बीच नहीं रहे। यह एक ऐसे डॉक्टर के जाने का दर्द है, जो आखिरी सांस तक काम में डूबा रहा। डॉ. यादव, आप हमेशा याद रहेंगे। अपने काम से, अपने व्यवहार से और उस आखिरी फोटो से, जो अब सिर्फ याद बन गई है।'
दूसरों की जिंदगी बचाने का जिम्मा निभाते हुए खुद ही जिंदगी की जंग हार गए। सवाई मानसिंह अस्पताल के सीनियर जनरल सर्जन डॉ. बी.एल. यादव के साथ घटित हुई घटना ने सबको चौंका दिया। रविवार को महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। वे वहां सर्जनों की एक राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाग लेने गए थे।
अपनी मौत से कुछ समय पहले ही उन्होंने एक जटिल सर्जरी के बारे में प्रेस नोट भेजा। फिर ग्रुप फोटो भी शेयर की। वहीं उनका व्हाट्सअप पर आखिरी मैसेज बन गए। डॉ. बी.एल. यादव एसएमएस मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग में सीनियर प्रोफेसर थे और पिछले साल ही उन्हें ट्रॉमा सेंटर का नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया था। वे जयपुर जिले के बेगस गांव के रहने वाले थे और अपने अनुशासनप्रिय लेकिन विनम्र स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे। अस्पताल परिसर में शोक का माहौल था और जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की आंखों में आंसू थे।
Published on:
02 Feb 2026 12:39 pm
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