
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बजट 2026-27 के प्रस्तुतीकरण के बाद विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सरकार को सत्ता में आए दो साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन राजस्थान की जनता को अब तक केवल 'नीतियों के ड्राफ्ट' ही मिले हैं, धरातल पर नतीजे शून्य हैं। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बजट केवल प्रचार और झूठी उम्मीदों का पुलिंदा है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा के चुनावी नारे 'डबल इंजन सरकार' पर निशाना साधते हुए कहा कि आज राजस्थान की आम जनता हाशिए पर है।
उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि जिसे ये 'डबल इंजन' कहते थे, वो अब राजस्थान के लिए 'ट्रबल इंजन' बन चुकी है। भाजपा की प्राथमिकता जनसेवा नहीं, बल्कि केवल इवेंट मैनेजमेंट और झूठी वाहवाही लूटना है।"
डोटासरा ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि शिक्षा और बुनियादी ढांचे की उपेक्षा की गई है।
शिक्षा की बदहाली: डोटासरा के अनुसार, प्रदेश के स्कूलों के लिए 21,000 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन बजट में केवल 550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने शिक्षक भर्ती पर सरकार की चुप्पी को युवाओं के साथ धोखा बताया।
सड़कों का बुरा हाल: उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों के बजट में ऐसी 'कैंची' चलाई गई है कि उसे पिछले बजट की तुलना में आधा कर दिया गया है। बारिश से टूटी सड़कों और बदहाल बुनियादी ढांचे पर सरकार गंभीर नहीं है।
विपक्ष ने प्रदेश के सबसे बड़े मुद्दों—ERCP (ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट) और यमुना जल समझौते पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। डोटासरा ने कहा: "बजट भाषण में ERCP पर एक शब्द का वाचन तक नहीं हुआ। यमुना के पानी के लिए भी कोई वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है।"
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बजट ही नहीं होगा, तो ये योजनाएं धरातल पर कैसे उतरेंगी? किसान कल्याण इस बजट से पूरी तरह गायब है।
डोटासरा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि भाजपा की पिछली 26% घोषणाएं भी आज तक पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस बजट में भी फिर से नई नीतियां बनाने की बात कही गई है, लेकिन पुरानी नीतियों का क्या हुआ, इसका कोई जवाब नहीं है।
डोटासरा ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा, 'प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है और बच्चियों से दुराचार की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार इन पर मौन है। युवाओं को नौकरी देने और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर बजट में कोई ठोस रोडमैप नहीं है। पत्रकारों और मध्यम वर्ग के लिए भी इस बजट में कुछ नहीं है।
Updated on:
11 Feb 2026 06:35 pm
Published on:
11 Feb 2026 06:31 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
