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Rajasthan News : ‘मैदान तो जीता, पर अब सरकारी सिस्टम से मुकाबला’, आखिर क्यों छलक रहा राजस्थान के ‘चैम्पियन खिलाड़ियों’ का दर्द?

राजस्थान की माटी से उपजे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी आज एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह पदक की चमक नहीं, बल्कि हक की लड़ाई है। सुंदर गुर्जर, कृष्णा नागर और जगसीर सिंह जैसे महान पैरा एथलीट्स, जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों पर तिरंगा लहराया है, वे आज अपनी नौकरियों और वादों को पूरा कराने के लिए शासन-प्रशासन की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं।

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राजस्थान के खेल इतिहास में यह एक भावुक कर देने वाला दृश्य था जब पैरालंपिक पदक विजेता सुंदर गुर्जर और कृष्णा नागर अपने पदक हाथों में लिए खेल सचिव नीरज के. पवन से मिलने पहुंचे। खिलाड़ियों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें कोच नहीं बनना, बल्कि एसडीएम या आरएएस स्तर की वह नौकरी चाहिए जिसका वादा सरकार ने किया था।

'कोच नहीं, प्रशासनिक नौकरी चाहिए'

पैरालंपिक मेडलिस्ट सुंदर गुर्जर और कृष्णा नागर वर्तमान में वन विभाग में कार्यरत हैं, लेकिन वहां उन पर ट्रेनिंग का दबाव है। खिलाड़ियों का कहना है कि वे अभी भी सक्रिय रूप से खेल रहे हैं और देश के लिए पदक जीत रहे हैं, ऐसे में ट्रेनिंग और नौकरी के बीच सामंजस्य बिठाना मुश्किल हो रहा है।

  • प्रमुख मांग: "हमें वन विभाग की ट्रेनिंग से छूट दी जाए या आरएएस (RAS) लेवल की पोस्ट पर शिफ्ट किया जाए।"
  • सचिव का आश्वासन: खेल सचिव ने भरोसा दिया है कि फाइल कार्मिक विभाग को भेज दी गई है और जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई होगी।

10 खिलाड़ियों पर नौकरी का संकट !

वन विभाग में कार्यरत 10 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को विभाग की ओर से अल्टीमेटम मिला है— "या तो ट्रेनिंग करो या नौकरी छोड़ो।" यह इन चैंपियंस के लिए 'इधर कुआं उधर खाई' जैसी स्थिति है। यदि वे ट्रेनिंग पर जाते हैं तो उनका खेल करियर प्रभावित होगा, और यदि नहीं जाते तो सरकारी नौकरी पर संकट है।

खेल रत्न अवनि लेखरा (पैराशूटिंग)

पैरालंपिक मेडलिस्ट सुंदर गुर्जर (पैरा एथलीट)

कृष्णा नागर (पैरा बैडमिंटन)

संदीप मान (पैरा एथलीट)

निशा कंवर (पैराशूटिंग)

लवमीत कटारिया (वॉलीबॉल)

सुमित्रा शर्मा (कबड्डी)

उमा (हैंडबॉल)

महेंद्र (शूटिंग)

दिव्यांश पंवार (शूटिंग) वन विभाग में कार्यरत हैं। अब इन सभी को कहा गया कि या तो ट्रेनिंग करो या कहीं और नौकरी देखो।

एशियन गोल्ड मेडलिस्ट को नहीं मिली '25 बीघा जमीन'

पैरालंपियन और एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता जगसीर सिंह का मामला और भी गंभीर है। सरकार ने सभी पैरालंपिक पदक विजेताओं को 25 बीघा जमीन देने की घोषणा की थी, लेकिन जगसीर आज भी इस लाभ से वंचित हैं। जगसीर ने खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से मुलाकात कर अपनी पीड़ा जताई, जिस पर मंत्री ने मामले को जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया है। जगसीर बीजिंग और लंदन पैरालंपिक फाइनलिस्ट हैं और एशियन गेम्स व वर्ल्ड चैंपियनशिप विजेता हैं।

"असली संघर्ष मैदान के बाहर है"

यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है। लोगों का कहना है कि जो खिलाड़ी भारत की शान हैं, उन्हें अपनी सुविधाओं के लिए इस तरह 'गुहार' लगानी पड़े, यह खेल नीति पर सवाल खड़े करता है।

हाल ही में राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल ने 13,000 से अधिक पदक विजेताओं की लंबित पुरस्कार राशि मार्च तक देने का वादा किया है, लेकिन 'आउट ऑफ टर्न' नौकरियों का पेंच अभी भी फंसा हुआ है।

खेल रत्न अवनि लेखरा भी कतार में

टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक की स्टार शूटर अवनि लेखरा के पिता ने भी पूर्व में नाराजगी जताई थी कि उनकी बेटी को अभी तक पूर्ण वेतन और नियमितीकरण का लाभ नहीं मिला है। यह राजस्थान के खेल प्रेमियों के लिए एक चिंताजनक संकेत है।

राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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