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वित्त आयोग की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा: इन्फ्रास्ट्रक्चर रेस में राजस्थान पिछड़ा, झारखंड से भी पीछे

वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कम पूंजीगत व्यय और बढ़ते राजस्व घाटे के कारण राजस्थान बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास की रेस में अन्य राज्यों से पिछड़ता नजर आ रहा है।

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जयपुर इन्फ्रास्ट्रक्चर

Photo- Ai Generated

जयपुर: राजस्थान में बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। देश के बड़े और तेजी से शहरीकरण कर रहे राज्यों में शामिल होने के बावजूद राजस्थान का पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) कई अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम है। इससे सड़क, बिजली, पानी और औद्योगिक ढांचे के विकास की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

16वें वित्त आयोग के आकलन के अनुसार, वर्ष 2023-24 में राजस्थान ने अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का केवल 1.8 प्रतिशत ही पूंजीगत व्यय पर खर्च किया। यह आंकड़ा प्रमुख गैर-पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे निचले स्तरों में शामिल है।

अन्य राज्यों से काफी पीछे राजस्थान

जहां राजस्थान का पूंजीगत खर्च कम रहा, वहीं कई राज्यों ने बुनियादी ढांचे पर जोर दिया। ओडिशा ने 5.9 प्रतिशत, झारखंड ने 5.3 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश ने 4.7 प्रतिशत और मध्य प्रदेश ने 4.5 प्रतिशत GSDP पूंजीगत व्यय पर लगाया। इन राज्यों ने सड़कों, जल आपूर्ति, बिजली परियोजनाओं और औद्योगिक विस्तार पर बड़ा निवेश किया, जिससे दीर्घकालिक विकास को मजबूती मिली।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर केवल प्राथमिकताओं का नहीं, बल्कि वित्तीय प्रबंधन से भी जुड़ा है। राजस्थान में विकास कार्यों की तुलना में राजस्व खर्च अधिक है, जिससे भविष्य के लिए जरूरी परिसंपत्तियां बनाने में बाधा आ रही है।

राजस्व घाटा बना बड़ी बाधा

वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान का राजस्व घाटा 2023-24 में बढ़कर GSDP का 2.6 प्रतिशत हो गया। इसका मतलब यह है कि राज्य की आय उसके रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में भी कम पड़ रही है। ऐसे में पूंजीगत निवेश के लिए सीमित संसाधन बचते हैं।

राज्य को अपने बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसे खर्चों पर लगाना पड़ रहा है। वित्त आयोग ने स्पष्ट किया है कि लगातार बना रहने वाला राजस्व घाटा पूंजीगत व्यय को पीछे धकेल देता है, और राजस्थान में यही स्थिति देखने को मिल रही है।

केंद्र की सहायता के बावजूद सीमित असर

केंद्र सरकार ने राज्यों को पूंजीगत निवेश बढ़ाने के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत ब्याज मुक्त ऋण दिए, लेकिन राजस्थान में इसका अपेक्षित असर नहीं दिखा। जहां अन्य राज्यों ने इस सहायता का उपयोग कर पूंजीगत खर्च बढ़ाया, वहीं राजस्थान की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही।

इसके उलट, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों ने बेहतर राजस्व प्रबंधन के जरिए संसाधन जुटाए। ओडिशा ने लगातार राजस्व सरप्लस बनाए रखा और 2023-24 में लगभग 6 प्रतिशत GSDP पूंजीगत खर्च किया। गुजरात ने भी संतुलित वित्तीय नीति के साथ करीब 2.9 प्रतिशत GSDP बुनियादी ढांचे पर लगाया।

राजस्थान सरकार का कहना है कि राज्य का बड़ा भौगोलिक क्षेत्र, बिखरी आबादी और अधिक सब्सिडी भार विशेष चुनौतियां पैदा करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पूंजीगत निवेश नहीं बढ़ा तो औद्योगिक निवेश और शहरी विकास की दौड़ में राजस्थान पिछड़ सकता है।