
पुलिस गिरफ्त में एमडी ड्रग का मास्टरमाइंड। फोटो: पत्रिका
जयपुर: राजस्थान में एमडी ड्रग के बढ़ते नेटवर्क के खिलाफ एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और एटीएस को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने एमडी ड्रग निर्माण व तस्करी के मास्टरमाइंड बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना स्थित नेडी नाड़ी निवासी रमेश कुमार बिश्रोई उर्फ अनिल उर्फ रामलाल को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। 31 वर्षीय आरोपी रमेश के खिलाफ राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना में कुल 36 मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी 8 साल से फरार था और एक किलो एमडी ड्रग सप्लाई में 29 लाख का मुनाफा कमाता था।
आईजी (IG) विकास कुमार ने बताया कि आरोपी रमेश पश्चिमी राजस्थान में एमडी ड्रग की फैक्टरियां स्थापित कराने, माल तैयार कराने और देशभर में तस्करी करने का प्रमुख संचालक था। हाल ही ध्वस्त की गई 6-7 MD ड्रग फैक्ट्रियां इसी के नेटवर्क से जुड़ी हुई थीं। पुलिस कार्रवाई तेज होने पर आरोपी अन्य राज्यों में फैक्ट्री स्थापित करने की साजिश रच रहा था। आरोपी को बाड़मेर में पकड़ी गई एक फैक्टरी के मुकदमे में गिरफ्तार किया है।
आरोपी के कोलकाता में डेरा जमाने की सूचना मिली। जांच में यह भी सामने आया कि उसका मुख्य सप्लायर पुणे (महाराष्ट्र) में है और वह अक्सर हवाई यात्रा के जरिए कोलकाता-पुणे के बीच आना-जाना करता था। जनवरी के पहले सप्ताह में रमेश नाम से एक व्यक्ति के कोलकाता से पुणे जाने और अगले सप्ताह लौटने की पुष्टि हुई, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस हुई। तब सामने आया कि जयपुर में उसके सूत्रधार की दो दुकानें हावड़ा और कोलकाता में हैं। हावड़ा स्थित जगदंबा स्टील नामक दुकान पर टीम राजस्थान के कामगार बनकर काम की तलाश में पहुंची। दुकान मालिकों से दोस्ती बढ़ाने पर पता चला कि रमेश वहीं रहता है।
टीम को पता चला कि आरोपी मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता और लगातार स्थान बदलता था। खुद को केमिस्ट्री का टीचर और केमिकल व्यापारी बताकर वह कोलकाता-हावड़ा क्षेत्र में बच्चों को केमिस्ट्री की कोचिंग भी देता था, जिससे किसी को उस पर शक न हो। यह भी पता चला कि वह 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा पूरी कर चुका है और अब गंगासागर जाने की तैयारी में है। इसी सूचना पर टीम एक ट्रैवल एजेंसीतक पहुंची, जो आरोपी के संपर्क में था। आरोपी उसकी गाड़ी से गंगासागर जाने वाला था। ट्रेवल एजेंसी से रमेश के घर की जानकारी मिली, हावड़ा पुलिस के सहयोग से टीम ने दबिश देकर आरोपी को उसके फ्लैट से गिरफ्तार कर लिया।
आईजी विकास कुमार ने बताया कि आरोपी 12वीं में फेल होने के बाद इधर-उधर भटकता रहा और फिर वाहन चोरी के धंधे में उतर गया। बाद में शराब और नशा तस्करों को चोरी की गाड़ियां सप्लाई करने लगा। भंवरी देवी हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार बिश्नाराम के गैंग को भी वाहन उपलब्ध कराता था। फिर खुद शराब तस्करी करने लगा और गुजरात व महाराष्ट्र तक नेटवर्क फैला लिया। महाराष्ट्र की जेल में उसकी मुलाकात डॉक्टर बिरजू एमडी ड्रग के बड़े तस्कर से हुई, जिसने उसे एमडी बनाने की तकनीक सिखाई। इसके बाद उसने राजस्थान में अलग-अलग जगह एमडी की फैक्ट्रियां लगाईं और धीरे-धीरे देश के बड़े ड्रग माफियाओं में शुमार हो गया।
विकास कुमार ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि प्रति एक किलो एमडी ड्रग बनाने में एक लाख रुपए खर्च आता और उसे 30 लाख रुपए प्रति किलो में बेचा जाता। काले धन से उसने फार्म हाउस, जमीनें, मार्बल फैक्ट्री, मकान और कार डेकोर की दुकानें खड़ी कर लीं।
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Published on:
17 Jan 2026 01:38 pm
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