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राजस्थान एसओजी का बड़ा एक्शन: नौसेना भर्ती फर्जीवाड़े में भारत सेवक समाज का डायरेक्टर गिरफ्तार, करोड़ों की काली कमाई का खुलासा

भारतीय नौसेना भर्ती में फायर टेक्नीशियन पद के लिए बैकडेट फर्जी प्रमाण पत्र बांटकर करोड़ों की अवैध कमाई का खुलासा हुआ है। एसओजी ने फर्जी डिप्लोमा नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चेन्नई से भारत सेवक समाज के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया।

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जयपुर

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Arvind Rao

Jan 08, 2026

Rajasthan SOG Action

Rajasthan SOG Arrested Bharat Sevak Samaj Director (Photo-AI)

जयपुर: राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने देशभर में फर्जी डिप्लोमा और प्रमाण पत्र जारी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए भारत सेवक समाज, चेन्नई के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भारतीय नौसेना में फायर टेक्नीशियन पद की प्रतियोगी परीक्षा 2025 से जुड़े फर्जी प्रमाण-पत्रों के मामले में की गई है। संस्था के चेयरमैन बीएस बालचंद्रन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि तंजावुर (तमिलनाडु) निवासी डायरेक्टर अरूल ग्नाना मोईसन को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों को बैकडेट में फायर टेक्नीशियन, ऑपरेटर्स एवं स्टोरकीपर कोर्स के डिप्लोमा और अंकतालिकाएं उपलब्ध कराने के संबंध में पुलिस थाना एसओजी, जयपुर में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं 318 (4), 338, 336 (3) एवं 61 (2) के तहत प्रकरण दर्ज कर गहन अनुसंधान शुरू किया गया था।

जांच में सामने आए तथ्य

जांच में खुलासा हुआ कि भारत सेवक समाज संस्था, चेन्नई ने एएस फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, तुंगला (करौली) सहित देशभर के कई कॉलेजों के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचकर वर्ष 2023-24 के डिप्लोमा और अंकतालिकाएं बिना प्रशिक्षण बैकडेट में जारी कीं। अभ्यर्थियों से सिर्फ 12वीं की अंकतालिका और आधार कार्ड लेकर मात्र दो से तीन दिन में जुलाई 2025 में फर्जी प्रमाण-पत्र उपलब्ध करा दिए गए।

खुद का झूठा प्रचार

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि संस्था स्वयं को योजना आयोग, भारत सरकार से मान्यता प्राप्त बताकर स्किल डवलपमेंट कोर्स संचालित करने का झूठा प्रचार करती रही, जबकि योजना आयोग की ओर से किसी भी प्रकार की मान्यता नहीं दी गई है। संस्था को न तो कोर्स चलाने, न प्रशिक्षण देने और न ही डिप्लोमा या प्रमाण-पत्र जारी करने का कोई वैधानिक अधिकार था।

करोड़ों की अवैध कमाई

डीआईजी परिस देशमुख ने बताया कि देशभर में 10 हजार से अधिक कॉलेजों व संस्थानों को कथित एफिलिएशन देकर प्रति कॉलेज 70 हजार से एक लाख रुपए तक वसूले गए। अभ्यर्थियों से लिए गए शुल्क के जरिए करोड़ों की अवैध कमाई की गई। एडीजी बंसल ने नियोक्ता संस्थाओं से अपील की है कि भारत सेवक समाज की ओर से जारी किसी भी प्रमाण-पत्र को मान्य न मानें और नियुक्ति से पूर्व दस्तावेज का पूर्ण सत्यापन अवश्य करें।


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