10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शिवगढ़ी में इस बार भी सन्नाटा: मोतीडूंगरी की ऊंचाई से महादेव के दर्शन की आस टूटी, लगातार छठे साल कपाट बंद

गुलाबी नगरी की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान महादेव के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे शिवभक्तों के लिए इस बार भी निराशा हाथ लगी है। मोतीडूंगरी की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर (शिवगढ़ी) के द्वार इस महाशिवरात्रि पर भी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले जाएंगे।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Harshit Jain

Feb 05, 2026

जयपुर. गुलाबी नगरी की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान महादेव के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे शिवभक्तों के लिए इस बार भी निराशा हाथ लगी है। मोतीडूंगरी की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर (शिवगढ़ी) के द्वार इस महाशिवरात्रि 15 फरवरी को भी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले जाएंगे। सुरक्षा कारणों और पहाड़ी की कमजोर स्थिति को देखते हुए लगातार छठे साल यह ऐतिहासिक मंदिर आमजन की पहुंच से दूर रहेगा।

अतिसूक्ष्म शिवलिंग और अद्वितीय महिमा

जयपुर की स्थापना से भी पहले का यह शिवालय अपनी विशिष्टता के लिए विख्यात है। यहां शिव परिवार के स्थान पर महादेव का एक अतिसूक्ष्म श्वेत शिवलिंग विराजमान है। साल भर में केवल एक बार महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर के कपाट खुलते थे, जहां दर्शन के लिए श्रद्धालु मध्यरात्रि से ही कई किलोमीटर लंबी कतारों में लग जाते थे।

एक नज़र में: शिवगढ़ी
स्थापना: लगभग 299 वर्ष पूर्व।
विशेषता: उदयपुर के प्रसिद्ध एकलिंगेश्वर मंदिर की प्रतिकृति के रूप में निर्मित।
मान्यता: पूर्व महाराजा सवाई जयसिंह के पुत्र माधोसिंह के काल में इसे विशेष धार्मिक महत्व मिला।
— इतिहासकार सियाशरण लश्करी के अनुसार

सुरक्षा कारणों से लिया गया कठिन निर्णय

प्रबंधन के अनुसार, पहाड़ी के कुछ हिस्सों में गहरी दरारें आ चुकी हैं और चढ़ाई का मार्ग बेहद जर्जर हो चुका है। भारी भीड़ के चलते किसी भी संभावित दुर्घटना को टालने के लिए पूर्व राजपरिवार के अधिकार क्षेत्र वाले इस मंदिर को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

मंदिर के रास्ते पर पहाड़ी पर जगह—जगह चट्टानों की स्थिति के साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर को बंद करने का निर्णय पूर्व में राजपरिवार के सदस्यों ने लिया है ताकि मानवीय अनहोनी न हो।

-राजेश कर्नल, एडवोकेट


युवाओं में टीस, परंपरा से दूर होने का दर्द

आज की युवा पीढ़ी, जो अपनी जड़ों और इतिहास को जानने के लिए उत्सुक है, इस निर्णय से मायूस है। युवाओं का मानना है कि शिवगढ़ी न केवल एक मंदिर है, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है।

— हमने पूर्वजों से इस मंदिर की ऊंचाई और वहां के दिव्य वातावरण के बारे में सुना है। कई वर्षों से दर्शन की इच्छा थी, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है। आशा है कि भविष्य में इसे पुनः खोला जाएगा।
— रमेश शर्मा, युवा श्रद्धालु

— हमने सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें देखी थीं और सोचा था कि इस बार लाइव दर्शन करेंगे। जयपुर की सबसे ऊंची चोटी से महादेव को पूजना एक अलग ही अहसास होता, लेकिन इंतज़ार करना होगा।
— साक्षी गुप्ता, युवा श्रद्धालु

शहर के अन्य शिवालयों में उमड़ेगा सैलाब

15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। ताड़केश्वर महादेव, झाड़खंड महादेव, जंगलेश्वर, भूतेश्वर, रोजगारेश्वर सहित अन्य शिवालयों में तड़के से ही जलाभिषेक और विशेष पूजन शुरू होगा। बाबा अमरनाथ की तर्ज पर बर्फ की झांकियां और विशेष शृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। संपूर्ण परकोटा और बाहरी क्षेत्र 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गुंजायमान रहेगा। विभिन्न जगहों पर शिवमहापुरण कथा के साथ ही भोले की बारात भी निकाली जाएगी। गलता तीर्थ में भी विभिन्न कार्यक्रम होंगे।