AI-generated Summary, Reviewed by Patrika
AI-generated Summary, Reviewed by Patrika

राजस्थान का सीमावर्ती जिला जैसलमेर पर्यटन और सामरिक महत्व के कारण देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान बना चुका है, लेकिन तेजी से फैलती नशे की प्रवृत्ति चिंता का केंद्र भी बनी हुई है। पाकिस्तान सीमा से सटे रेगिस्तानी जिले में नशे का जाल धीरे-धीरे गांवों, ढाणियों और शहरी इलाकों तक फैल चुका है। हालात यह हैं कि नशा अब सिर्फ अपराध या तस्करी का मुद्दा ही नहीं रहा है। युवाओं के भविष्य को भी निगलने लगा है। हकीकत यह भी है कि विषम भौगोलिक क्षेत्र का होना नशा तस्करों के लिए चुनौती कम और अवसर अधिक बनती जा रही है। अफीम, स्मैक, चरस, एमडी और नशीली गोलियों की खेप तस्करी के जरिए जिले तक पहुंच रही है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क इसे गांव-गांव और कस्बों तक पहुंचा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में नशा तस्करी और नशा सेवन से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हकीकत यह भी है कि सीमावर्ती इलाकों में रोजगार के सीमित अवसर, पढ़ाई के बाद दिशा का अभाव और आसान पैसे का लालच युवाओं को नशे के जाल में धकेल रहा है।
सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि नशा तस्करी से जुड़े नेटवर्क अब बेखौफ नजर आने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों में खुलेआम नशे की सप्लाई, छोटे-छोटे पुडिय़ों में बिक्री और युवाओं को उधार में नशा देने जैसी बातें सामने आ रही हैं। समाज का बड़ा हिस्सा डर या बदनामी के कारण चुप्पी साधे हुए है। कई परिवारों को पता होने के बावजूद वे शिकायत करने से कतराते हैं, जिससे तस्करों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं।
एक समय था जब सीमावर्ती गांवों के युवा खेल, पशुपालन और मेहनत से जुड़े कामों में सक्रिय रहते थे। आज वही युवा खेल मैदान छोडकऱ नशे की गलियों में भटकते नजर आ रहे हैं। स्कूल-कॉलेज के छात्र भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। नशे की लत न केवल उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि अपराध की ओर भी धकेल रही है। चोरी, मारपीट और पारिवारिक कलह जैसे मामले बढ़ रहे हैं।
जैसलमेर जिले में नशा तस्करी और नशा सेवन से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सीमावर्ती थानों में नशीले पदार्थों की जब्ती के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। परामर्श केंद्रों के अनुसार ईलाज के लिए पहुंचने वाले युवाओं की संख्या पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है। नशे की शुरुआत 15 से 30 वर्ष की आयु वर्ग में तेजी से हो रही है।
मनोचिकित्सक डॉ. रामसिंह का कहना है कि सीमावर्ती जिले में युवाओं में बढ़ती नशा प्रवृत्ति सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती है। युवाओं में नशे की लत देखा-देखी लगती है। इसके अलावा बढ़ता तनाव, बेरोजगारी और नैतिक आदर्शों की कमी उन्हें नशे की ओर ले जा रही है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय दूरी बना कर रखना है क्योंकि शुरुआत में यह चखा जाता है और फिर उसकी आदत लत का रूप ले लेती है। जिसे छोडऩा बहुत मुश्किल हो जाता है।
राजद के कई बड़े नेता और तेजश्री यादव की पत्नी ने कहा था कि बिहार में खेल होना अभी बाकि है। ऐसा होने के डर से ही नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा के नजदीक चाणक्य होटल में रात को रुकवाया।

क्या आपको लगता है कि यह टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा?

लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Published on:
03 Jan 2026 11:44 pm


यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है... यह निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।
हाँ, ये सोचने वाली चीज़ है
दिलचस्प विचार! आइए इस पर और चर्चा करें।