
सीमावर्ती जैसलमेर में ओरण-गोचर जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग ने मंगलवार को और जोर पकड़ लिया। एक तरफ टीम ओरण की ओर से गत महीने तनोट से जयपुर तक शुरू की गई पदयात्रा जोधपुर के पास तक पहुंची है, दूसरी ओर साधु-संतों के सानिध्य में हजारों की तादाद में ग्रामीणजन मंगलवार को जिला मुख्यालय पर एकत्रित हुए। उन्होंने कलेक्ट्रेट पर विशाल प्रदर्शन किया और बाद में उनके प्रतिनिधियों ने कलक्टर को राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। आंदोलन के तहत रामगढ़ मार्ग पर स्थित आलाजी मंदिर परिसर में जनसभा का आयोजन किया गया।
जिसमें पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी सहित अन्य धार्मिक प्रतिनिधि और टीम ओरण के सदस्य भी शामिल हुए। कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे लोगों में ग्रामीण इलाकों से आई महिलाओं व बालिकाओं की भी उल्लेखनीय मौजूदगी रही। लोगों ने अपने हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां थाम रखी थी। टीम ओरण के साथ ग्रामीण जनों ने मुख्य रूप से जिले में 20 लाख बीघा जमीन को ओरण के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग उठाई। एक तरफ पोकरण विधायक ने लोगों को विश्वास दिलाया कि सरकार उनकी मांगों को लेकर पूरी तरह से संवेदनशील है, दूसरी ओर टीम ओरण के सदस्यों ने कहा कि, हमारा विरोध किसी पार्टी से नहीं है, जो भी हमारी सभी ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करेगा, हम उसके साथ हैं। सभा में कई वक्ताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि एक दिन के आंदोलन या प्रदर्शन से सरकार नहीं मानेगी, इसके लिए लम्बा संघर्ष करने की आवश्यकता है।
विरोध प्रदर्शन के अवसर पर सभी लोगों ने सरकार पर निजी कम्पनियों को जैसलमेर जिले की जमीनों को अंधाधुंध ढंग से आवंटित किए जाने का कड़ा विरोध किया और कहा कि सरकार की नजर में जो जमीन बंजर है, वह हमारे गोवंश सहित अन्य पशुधन का चारागाह और जल केंद्र है। टीम ओरण के अगुआ सुमेरसिंह सांवता ने कहा कि सरकार ने अगर हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में जैसलमेर की जनता सडक़ों पर आकर बैठ जाएगी। उन्होंने बताया कि जयपुर तक पदयात्रा निरंतर जारी है और पूरे क्षेत्र में आमजन का इस यात्रा को भरपूर समर्थन मिल रहा है। पर्यावरण प्रेमी भोपालसिंह झालोड़ा ने लोगों का आह्वान किया कि वे कड़े संघर्ष के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि संगठित शक्ति के परिचय से ही सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी।
सभा के बाद सभी लोग गीता आश्रम चौराहा और हनुमान चौराहा से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पहले कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार के आगे बैठ कर कुछ देर धरना दिया और तख्तियों के साथ नारेबाजी की। उसके बाद साधु-संत और चुनिंदा लोग भीतर पहुंचे। कलक्टर प्रतापसिंह अपने कक्ष से नीचे आए और सरकार के नाम ज्ञापन लिया। ज्ञापन में सोलर कंपनियों को ओरण-गोचर भूमि पर किए गए आवंटन रद्द करने, जिले की समस्त 20 लाख बीघा ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में ओरण के रूप में ही दर्ज करने और पारंपरिक जल स्रोतों और कुओं के आसपास के क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करवाने की मांगें शामिल हैं। गौरतलब है कि जिले के रामगढ़ तहसील मुख्यालय पर पिछले कई दिनों से कम्पनियों को जमीन आवंटन के खिलाफ धरना दिया जा रहा है।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Published on:
17 Feb 2026 08:44 pm

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