
खेजड़ी की कटाई रोकने और सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर बीकानेर में चल रहे महापड़ाव के समर्थन में क्षेत्र के धोलिया गांव में घर पर अनशन करने के बाद शनिवार रात सास-बहु की तबीयत बिगड़ गई। जिनका अस्पताल में उपचार किया गया। गौरतलब है कि प्रदेश भर में खेजड़ी की कटाई रोकने व सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर बीकानेर में गत दिनों महापड़ाव शुरू किया गया था।
गत 2 फरवरी को 363 से अधिक लोगों ने बीकानेर में अनशन शुरू किया था, जो 5 फरवरी तक चला। इस दौरान धोलिया निवासी वन्यजीवप्रेमी राधेश्याम पेमाणी की मां रतनीदेवी व पत्नी निरमा विश्नोई ने भी 4 दिनों तक अनशन किया था। गत 6 फरवरी को उन्होंने भी अनशन समाप्त कर दिया। गत 4 दिनों तक अनशन के बाद अचानक खान-पान शुरू करने से सास-बहु की तबीयत बिगड़ गई। शनिवार रात निरमा को पोकरण के राजकीय अस्पताल ले जाया गया। यहां उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि रतनीदेवी को जैसलमेर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। यहां उनका उपचार चल रहा है। बताया जा रहा है कि लगातार 4 दिनों तक अनशन करने से रतनीदेवी की आंतों में सूजन आ गई। जिससे उल्टियां होने लगी और शरीर में कमजोरी आ गई।
अस्पताल में भर्ती रतनीदेवी का कहना है कि उन्हें अपनी जान की भी परवाह नहीं है। उनके पुत्र राधेश्याम ने वन्यजीवों की रक्षा करते हुए जान दे दी। अब यदि खेजड़ी के लिए बलिदान देना पड़े तो भी गम नहीं है। उन्होंने सरकार से खेजड़ी की कटाई रोकने व सख्त कानून बनाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि राधेश्याम पेमाणी ने सैकड़ों वन्यजीवों की रक्षा की। गत 23 मई 2025 को भी हरिण शिकार की सूचना पर घर से निकले राधेश्याम सहित 4 जनों की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
Published on:
08 Feb 2026 08:32 pm
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