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संस्कृति की आड़ में फूहड़ता से आहत हो रही जैसलमेर पर्यटन की आत्मा

स्वर्णनगरी जो सुरक्षित, सांस्कृतिक और विश्वसनीय पर्यटन स्थल के रूप में पहचानी जाती रही है, आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है।

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स्वर्णनगरी जो सुरक्षित, सांस्कृतिक और विश्वसनीय पर्यटन स्थल के रूप में पहचानी जाती रही है, आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। दिन में ऐतिहासिक दुर्ग, हवेलियां और सुनहरे पत्थरों की चमक के साथ सम के धोरे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन रात होते ही दूसरा चेहरा सामने आने लगता है। कमजोर सुरक्षा व्यवस्था और अव्यवस्थित गतिविधियों ने पर्यटकों के मन में डर और असंतोष पैदा कर दिया है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। खासकर परिवार और पर्यटक रात में बाहर निकलने से बचने लगे हैं। वहीं, धोरों पर आयोजित कुछ तथाकथित सांस्कृतिक कार्यक्रम अब संस्कृति से अधिक फूहड़ मनोरंजन का रूप लेते जा रहे हैं, जिससे जैसलमेर की पारंपरिक छवि को गहरा आघात पहुंच रहा है। पर्यटकों के साथ स्थानीय नागरिक भी मानते हैं कि यह केवल पर्यटकों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे शहर की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सम्मान से जुड़ा सवाल है। बीते दिनों के दौरान जैसलमेर में पर्यटकों के बूम के शॉट्र्स और रील्स सोशल मीडिया पर देशभर में प्रसारित हुए। इससे एक तरफ पर्यटकों की भीड़ उमड़ी वहीं दूसरी तरफ कई फूहड़ता भरे कार्यक्रमों के शॉट्र्स ने जैसलमेर पर्यटन को बदनाम करने में भी कसर नहीं छोड़ी।

पर्यटन की खो रही आत्मा

  • सम के कई रिसोट्र्स में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर फूहड़ता का प्रदर्शन भी होने लगा है। इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं और न ही गुणवत्ता की जांच व मर्यादा का ध्यान रखने की व्यवस्था है। जो चाहे, जैसा चाहे प्रस्तुत कर रहा है।
  • इससे न केवल संस्कृति बदनाम हो रही है, बल्कि पर्यटन की आत्मा भी खोती जा रही है। दूसरी ओर महिला पर्यटकों की सुरक्षा सबसे संवेदनशील मुद्दा है।
  • कई बार महिला मेहमानों के सामने शर्मिंदगी और भय का वातावरण बनने लगता है। यह संकेत बेहद गंभीर है। जैसलमेर को सुरक्षित और पारिवारिक पर्यटन स्थल बनाए रखने के लिए महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इससे
  • धोरों पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम कभी जैसलमेर की पहचान हुआ करते थे, लेकिन अब वहां कुछ आयोजक केवल पैसा कमाने के चक्कर में फूहड़ नृत्य और भद्दे संवाद परोस रहे हैं। पर्यटक हैरान होकर पूछते हैं कि क्या यही राजस्थान की संस्कृति है?

पर्यटक बोले, कई व्यवस्थाओं में जरूरी है सुधार

‘पत्रिका’ ने इस मुद्दे पर जैसलमेर घूमने आए पर्यटकों से बातचीत की। जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा का वर्णन करने के साथ ही पर्यटन में सुधार के लिए सकारात्मक सुझाव भी दिए।

जैसलमेर भ्रमण करने का अनुभव तो कुल मिला कर अच्छा रहा। यहां के दर्शनीय स्थल बेहतरीन हैं। बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधा और सुरक्षा व्यवस्थाओं को और चाक-चौबंद किए जाने की आवश्यकता है।

  • प्रो. राजीव शर्मा, पर्यटक

पीले पत्थरों से निर्मित जैसलमेर शहर और सम के धोरे देखने में बेहद खूबसूरत हैं लेकिन कई पर्यटक यहां उनके साथ ठगी और धोखाधड़ी होने की शिकायतें करते हैं। कई भौंडे नृत्य के वीडियो भी प्रसारित हुए हैं, यह जैसलमेर पर्यटन के लिए भी नकारात्मक है। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

  • हिमांशु पाण्डे, पर्यटक

जैसलमेर आज देश का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चुका है। ऐसे में यहां पर पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी स्तरीय होनी चाहिए। ऑटो रिक्शा की जगह इ-रिक्शा हो तो यह वातावरण को काफी शांत रखेगा।

  • रश्मि शर्मा, पर्यटक

जैसलमेर में घूमने के लिए बहुत से स्थान हैं। साथ ही सभी जगहों पर भीड़-भाड़ भी ज्यादा है। पर्यटकों को ज्यादा से ज्यादा सुकून दिलाने लायक माहौल बनाया जाना चाहिए ताकि पर्यटक लम्बे समय तक टिका रह सके।

  • कृष्ण कुमार हरितवाल, पर्यटक