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जैसलमेर, Jun 03, 2026

अमृतम् जलम् : श्रम की बूंदों से निखरा सौन्दर्य, थार के गांवों को मिला जल संबल

नाड़ियों के गहरीकरण, पाल सुदृढ़ीकरण और कैचमेंट क्षेत्र सुधार के कार्यों से आगामी मानसून में जल संग्रहण क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।क्षेत्र में जल की विषमता को कम करने और ग्रामीण समुदाय को स्थायी जल संबल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नाडियों का व कायाकल्प किया जा रहा है।

amartam jalam camption in jaisalmer

जैसलमेर. रूपसी क्षेत्र में जल स्रोत में संग्रहण क्षमता बढ़ाने की चल रही कवायद।

थार के मरुस्थलीय अंचल में जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलने लगी है। राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान, एसबीआई फाउंडेशन और उरमूल ट्रस्ट, जैसलमेर के संयुक्त सहयोग से संचालित ग्राम सक्षम परियोजना के तहत चौधरिया, पोहड़ा और रूपसी गांवों की सार्वजनिक नाड़ियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। यह क्रम बुधवार को भी बना रहा।

नाड़ियों के गहरीकरण, पाल सुदृढ़ीकरण और कैचमेंट क्षेत्र सुधार के कार्यों से आगामी मानसून में जल संग्रहण क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।क्षेत्र में जल की विषमता को कम करने और ग्रामीण समुदाय को स्थायी जल संबल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नाडियों का व कायाकल्प किया जा रहा है। वर्षों से गाद और अवरोधों के कारण प्रभावित जल स्रोत अब नए स्वरूप में नजर आने लगे हैं। मशीनों की सहायता से नाड़ियों की सफाई, गहरीकरण तथा पालों को मजबूत बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है।

अवांछित झाड़ियों और अन्य बाधाओं को हटाया

अभियान के तहत कैचमेंट क्षेत्र में उगी अवांछित झाड़ियों और अन्य बाधाओं को हटाया जा रहा है, ताकि वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बेहतर हो सके। इससे बारिश का अधिक पानी नाड़ियों तक पहुंचेगा और जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधार कार्यों के बाद नाड़ियों में लंबे समय तक पानी ठहर सकेगा, जिससे ग्रामीणों और पशुधन को सीधा लाभ मिलेगा। ग्रामीणों ने इन कार्यों को क्षेत्र के लिए उपयोगी और दूरदर्शी पहल बताया है। उनका कहना है कि जल स्रोतों के संरक्षण से न केवल पेयजल और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि जल संकट के समय राहत भी मिलेगी। ग्रामीणों के अनुसार नाड़ियों के पुनर्जीवन से पारंपरिक जल संरचनाओं को नया जीवन मिला है। इसके अलावा जल संरक्षण के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता को भी मजबूत कर रही है।

जगी जल प्रबंधन की जिम्मेदारी

ग्रामीण स्वयं इन कार्यों की निगरानी और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। इससे जल प्रबंधन के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।

आगामी वर्षा ऋतु के बाद इन प्रयासों का प्रभाव और स्पष्ट दिखाई देने की संभावना है।यदि सामान्य वर्षा होती है तो चौधरिया, पोहड़ा और रूपसी की नाड़ियों में वर्षभर पानी उपलब्ध रहने की स्थिति बन सकती है। अमृतम् जलम् अभियान के तहत चल रही यह पहल थार क्षेत्र में जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत ग्रामीण विकास का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है।

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