
रतनपुरा रेलवे अंडरब्रिज। फोटो: पत्रिका
जालोर। रतनपुरा रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) के स्ट्रक्चर में फिर से बदलाव होगा। इस तरह सी-46 पर बने इस अंडरब्रिज के स्वरूप में यह तीसरा बदलाव होगा। इस बार यह बदलाव समदड़ी-भीलड़ी रेल खंड में चल रहे दोहरीकरण के कार्य का हवाला देकर किया जा रहा है। हालांकि ब्रिज की ऊंचाई में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा।
बता दें कि ब्रॉडगेज में यह रेल खंड क्रमोन्नत होने पर यहां मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग थी, लेकिन उसके बाद यहां गेट प्रहरी लगाए गए। रेलवे प्रशासन की ओर से सभी मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को बंद करने, अंडरब्रिज या ओवरब्रिज निर्माण् की मंशा के अनुरूप यहां पर भी करीब 6 साल पूर्व पहली बार रेलवे अंडरब्रिज का निर्माण किया गया। लेकिन बनने के बाद से ही इसमें पानी का भराव मुख्य परेशानी का कारण बनी। जिसके बाद इसकी वॉटर प्रुफिंग का कार्य करवाने का प्रस्ताव बना।
आम दिनों में पास से गुजर रहे नाले के कारण अंडरब्रिज में पानी का भराव परेशानी का कारण बनता है। बारिश के दौरान तो ये अंडरब्रिज पूरी तरह से पानी से भर जाता है। समस्या के निदान के लिए रेलवे कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट की ओर से दो साल पूर्व अंडरब्रिज की वॉटर प्रुफिंग पर लाखों खर्च किए गए। इस पुल का फाउंडेशन को तोडकऱ नए सिरे से बनाया गया। लेकिन इस सीजन भारी बारिश के दौरान पानी का लीकेज और भराव बदस्तूर जारी रहा।
अंडरब्रिज के स्ट्रक्चर में अब तीसरी बार बदलाव होगा। हालांकि इस बार पानी के भराव को आधार बनाकर ये कार्य नहीं करवाया जा रहा है, बल्कि रेलवे टे्रक दोहरीकरण कार्य के चलते इस पुल की चौड़ाई और दोनों तरफ बेस एरिया की चौड़ाई को बढ़ाया जाएगा। इस कार्य के तहत अंडरब्रिज के स्वरूप में बदलाव किया जाएगा।
शाम से लेकर सुबह तक की अवधि में अंडरब्रिज में 2 से 3 फीट तक पानी का भराव रिसाव से हो जाता है। इस निकासी के लिए रोजाना सुबह 6 बजे से करीब दो घंटे तक डीजल पंप से पानी की निकासी होती है। औसतन 15 हजार का डीजल तो केवल पानी की निकासी में औसतन हर माह में ही रीत जाता है।
बारिश के दिनों में तो अंडरब्रिज में 4 से 5 फीट तक पानी का भराव दिन में होता है। उस स्थिति में तो दिनभर पंप से पानी की निकासी की जाती है। इस तरह सालभर में हजारों लीटर डीजल तो केवल इस अंडरब्रिज से पानी की निकासी और इसके ऑपरेटर पर व्यय की जाती है।
इस अंडरब्रिज क्षेत्र के ऊपरी छोर पर गंदे पानी का नाला है। पूर्व में धरातल पर रेलवे क्रॉसिंग होने से पानी भराव की दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब नाले के लेवल से करीब 8 फीट नीचे अंडरब्रिज होने से पानी रिस कर अंडरब्रिज में जमा होता है।
मानवरहित क्रॉसिंग बंद करने की कवायद के दौरान ही इस क्षेत्र में रेलवे ओवरब्रिज का विकल्प नहीं तलाशा गया, जो परेशानी का कारण बना हुआ है। बता दें अंडरब्रिज के लेवल से ऊपरी स्तर पर गंदे पानी का बहाव होने से यहां बार बार पानी भरने की दिक्कत बनी रहेगी। समस्या से निजात के लिए भविष्य में ओवरब्रिज का विकल्प तलाशना होगा।
जालोर में सी-46 में पानी की लीकेज की समस्या है। पहले स्तर पर जालोर में अंडरब्रिज के लिए मरम्मत का कार्य करवाया जाएगा। उसके बाद आगामी बकाया कार्य करवाया जाएगा।
-अनुराग त्रिपाठी, डीआरएम, जोधपुर मंडल
Published on:
07 Feb 2026 12:58 pm
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