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जिले में मुख कैंसर के 1078 , स्तन कैंसर के 578 मरीज आए सामने, समय पर इलाज से बचाव संभव

झालावाड़.प्रदेश में कैंसर रोग तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर रोगियों की संख्या में हर साल दस प्रतिशत का इजाफा हो रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में हर साल एक लाख से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें करीब 50 प्रतिशत मरीज ओरल कैंसर (मुंह) गले और खाने की नली, लंग्स, ब्रेस्ट […]

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झालावाड़.प्रदेश में कैंसर रोग तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर रोगियों की संख्या में हर साल दस प्रतिशत का इजाफा हो रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में हर साल एक लाख से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें करीब 50 प्रतिशत मरीज ओरल कैंसर (मुंह) गले और खाने की नली, लंग्स, ब्रेस्ट और बच्चेदानी के कैंसर से जुड़े मामले होते हैं। झालावाड़ जिले में 2018 से अभी तक सबसे ज्यादा मरीज मुख कैंसर के 1078 व दूसरे नंबर पर स्तन कैंसर के 578 है। तीसरे नंबर पर फेफड़े के 383 व चौथे नंबर पर महिलाओं में बच्चेदानी के 179 मरीज सामने आ चुके हैं। ऐसे में चिंताजनक बात है कि अब कैंसर की चपेट में आने वालों में महिला मरीज की संख्या बढ़ रही है। आश्चर्य की बात है कि सरकार ने एसआरजी अस्पताल में कैंसर केयर यूनिट तो बना दी लेकिन यहां पूरे समय वार्ड नहीं खुलता है। नतीजन प्रतिदिन एक दर्जन मरीजों को घर जाना पड़ता है या एसआरजी में ही सर्जरी विभाग में रोज चौथे माले पर भर्ती होना पड़ता है,ऐसे में गंभीर मरीजों को ज्यादा परेशानी आ रही है। बुधवार को यूनाइटेड बाय यूनिक थीम पर विश्व कैंसर दिवस मनाया जाएगा। ये थीम 2027 तक चलेगी।

मृत्यु का दूसरा अहम कारण-

कैंसर विश्वभर में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण बन चुका है। इसमें शरीर के किसी हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि और इसका अनियंत्रित रूप से विभाजन कैंसर का कारक हो सकती है,आनुवांशिकता, पर्यावरणीय, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, रसायनों के अधिक संपर्क के कारण कैंसर होने का जोखिम बढ़ रह है। महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर, पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में करीब 70 प्रतिशत तक लोग कैंसर को तब डिटेक्ट कर पाते हैं, जब वो तीसरी या चौथी स्टेज तक पहुंच जाते हैं। वहीं महिला मरीजों में ब्रेस्ट कैंसर और बच्चेदानी में कैंसर होने की संख्या सबसे अधिक सामने आ रही है।

ये कैंसर के प्रमुख लक्षण-

- किसी व्यक्ति के वजन में लगातार गिरावट

-भूख नहीं लगना, हड्डियों में बहुत ज्यादा दर्द

- मुंह एवं मूत्र में रक्त आना

- गुदा से बिना दर्द खून आना

- लंबे समय तक मुंह के छाले ठीक नहीं होना

- स्तन में गांठ,सूजन या अल्सर, भोजन निगलने में दर्द होना

- बच्चेदानी में असमय रक्तस्राव होना, बच्चेदानी में सूजन

- शरीर के किसी हिस्से में गांठ होना कैंसर के प्रमुख लक्षण है।

कैंसर के प्रमुख कारण-

- तंबाकू व शराब का सेवन करने से

- अधिक मोटापा बढ़ने से

- वातावरण में अधिक धुआं व प्रदूषण होने से

- लंबे समय तक फोन पर ज्यादा बात करने से

- प्रिजर्वेटिव युक्त खाना खाने से जैसे कि डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ का लंबे समय तक सेवन से

- लंबे समय तक एक ही खाद्य तेल में खाद्य पदार्थ का पकाना

- गर्म खाने को प्लास्टिक में परोसने से

- गर्म निरोधक गोलियों को लंबे समय तक उपयोग में लेने से जिले में

जिले में कैंसर मरीज-2018 से जनवरी 2026 तक

- मुख कैंसर- 1078

- स्तन कैंसर- 578

- फेफड़े के मरीज-383

- बच्चेदानी (गर्भाशय ग्रिवा) - 179

- पेट व अन्य- 1041

-जिले में अभी तक कीमौथैरपी हो चुकी है- 13062

- आईपीडी मरीज- 7385

-जिले में 2018 से जनवरी 2025 तक कुल मरीज- 3216

जिले में ऐसे बढ़ते जा रहे मरीज

सन कैंसर मरीज

2018 316

2019 349

2020 266

2021 277

2022 498

2023 509

2024 526

2025 435

जनवरी 26 तक - 31

कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम-

कैंसर जैसी घातक बीमारी के तेजी से फैलने व उसके प्रथम स्टेज पर ही पता लगाने के लिए एसआरजी चिकित्सालय में स्क्रीनिंग की जा रही है। महिलाओं स्तन कैंसर के लिए फीमेल नर्स द्वारा स्क्रीनिंग की जाती है। लोगों की अव्यिस्थत दिनचर्या व प्रिजर्वेटिव युक्त खाना खाने से जैसे कि डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ का लंबे समय तक सेवन के कारण कैंसर रोग तेजी से बढ़ रहे है। राजस्थान में हर साल औसतन कैंसर के करीब सात से दस प्रतिशत मरीज बढ़ जाते हैं। एसआरजी अस्पताल में अभी तक 3 हजार से मरीज आ चुके हैं। इनमें मुख व स्तन कैंसर के मरीज ज्यादा है। एसआरजी अस्पताल में मैमोग्राफी, सिटी स्कैन, बायोप्सी, एफएनएसी जांचों की सुविधा है। कैंसर का समय पर पता लगा जाएं तो इसकी दवाई देने से मरीज को ठीक किया जा सकता है। हालांकि 2025 में कैंसर मरीजों की संख्या में कमी आई है।

डॉ.अशोक नागर, नोडल कैंसर अधिकारी, मेडिकल कॉलेज,झालावाड़।

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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