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Jhunjhunu news : 3.78 करोड़ का टेंडर, फिर भी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण बेपटरी

झुंझुनूं. नगर परिषद की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के तमाम दावे जमीनी हकीकत में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। डेढ़ लाख से अधिक आबादी वाले झुंझुनूं शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हालात यह हैं कि रोजाना निकलने वाले 15 से 20 टन कचरे को उठाने में नगर परिषद नाकाम […]

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झुंझुनूं. नगर परिषद की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के तमाम दावे जमीनी हकीकत में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। डेढ़ लाख से अधिक आबादी वाले झुंझुनूं शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हालात यह हैं कि रोजाना निकलने वाले 15 से 20 टन कचरे को उठाने में नगर परिषद नाकाम साबित हो रही है। गली-मोहल्लों से लेकर बाजार क्षेत्रों तक जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पटरी से उतरा

शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था को लेकर किए गए दावे पूरी तरह फेल हो चुके हैं। नगर परिषद ने वित्तीय वर्ष में 3.78 करोड़ रुपए का टेंडर कंपनी को दिया है। कंपनी की जिम्मेदारी शहर में घर-घर से कचरा उठाने की है। इसके लिए कंपनी के पास 36 ऑटो टिपर उपलब्ध बताए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ये गाड़ियां अधिकांश वार्डों में नजर ही नहीं आतीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में कचरा उठाने वाली गाड़ी कई-कई दिनों तक नहीं आती। मजबूरी में लोग घरों के बाहर, सड़कों किनारे या खाली भूखंडों में कचरा डाल रहे हैं, जिससे गंदगी और बदबू फैल रही है। नगर परिषद के पास दस ऑटो टिपर हैं।

पुरानी आबादी के हिसाब से बंटी व्यवस्था, नई जरूरतें अनदेखी

नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार शहर के 60 वार्डों को पुरानी आबादी के आधार पर 50 जोन में बांटा गया है। एक जोन में पांच सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इस तरह कुल 250 ठेका सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेकिन शहर की आबादी बढ़ने और नए गांवों के परिषद क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया। नतीजतन कई वार्डों में कचरा समय पर नहीं उठ रहा, जबकि पुराने शहर की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।

कर्मचारियों, चालक व मजदूरों को जानकारी नहीं

करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद सफाई संसाधनों का लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा। कचरा संग्रहण का जिम्मा संभालने वाली कंपनी के पास पर्याप्त कर्मचारी ही नहीं हैं। कंपनी स्थानीय सफाई कर्मचारियों से काम कराना चाहती थी, लेकिन विरोध और धरने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। इसके चलते कई इलाकों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। जबकि परिषद के अधिकारियों का तर्क है कि जिस कंपनी को काम दिया गया है। उसके कर्मचारी, ऑटो टिपरों के चालक व मजदूर बाहर के हैं। इसलिए उन्हें शहर के हर हिस्से की जानकारी नहीं है। अब उन्हें ट्रेनिंग दी गई है। जिससे व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।

नगर परिषद में शामिल नए गांवों की व्यवस्था चुनावों के बाद

नगर परिषद में शामिल नए गांवों में सफाई व्यवस्था को नगर निकाय चुनावों के बाद लागू किया जाएगा। वर्तमान में नगर परिषद ने पुराने वार्डों के हिसाब से सफाई व्यवस्था की है। लेकिन लोगों की शिकायतें कुछ और ही बयां कर रही हैं कि शहर में कचरा उठ ही नहीं रहा। लोगों के घरों के बाहर कचरे के ढेर लग जाते हैं।

अधिकारियों ने माना कचरा संग्रहण व्यवस्था डिस्टर्ब हुई...

बीच में कचरा संग्रहण की व्यवस्था डिस्टर्ब हो गई थी। नई ठेका कंपनी के अधीन कार्यरत ऑटो टिपरों के ड्राइवर व मजदूर बाहर के हैं, इसलिए उन्हें दिक्कतें आ रही थीं। बुधवार को जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कंपनी के चालकों, मजदूरों और जिम्मेदारों को ट्रेनिंग दी गई है। आगे से कचरा संग्रहण व्यवस्था बेहतर होगी।”

देवीलाल बोचल्या, आयुक्त, नगर परिषद झुंझुनूं

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