
नाहर सिंघानी की दोनों सगी बहनें स्मृति, टीना व देवरोड़ की निकिता।
संसाधनों की कमी अगर हौसलों के सामने बौनीपड़ जाए, तो सफलता खुद रास्ता बना लेती है। झुंझुनूं जिले की बेटियों ने यही साबित कर दिखाया है। देवरोड गांव की मजदूर की बेटी निकिता किरोड़ीवाल से लेकर नाहरसिंघानी गांव की सगी बहनें स्मृति और टीना चौधरी तक—इन बेटियों ने खेल के दम पर राष्ट्रीय पहचान बनाई और जिले का नाम रोशन किया।
देवरोड गांव निवासी चेजा मिस्त्री विजेंद्र किरोड़ीवाल की बेटी निकिता किरोड़ीवाल ने एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर खेल कोटे से बीएसएफ में चयन हासिल किया है। खास बात यह है कि आठवीं कक्षा तक निकिता का खेलों से कोई नाता नहीं था। गांव के सरकारी स्कूल में पदस्थ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शारीरिक शिक्षक जयसिंह धनखड़ ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और मार्गदर्शन दिया। निकिता ने 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। वे पिछले सात वर्षों से राज्य स्तर पर और वर्ष 2022 से लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रही हैं। 12वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी विद्यालय से पूरी करने के बाद उनका चयन साईं पटियाला में हुआ। इसके बाद बेंगलुरु प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यास के दौरान ही उनका बीएसएफ में चयन हो गया। निकिता का सपना है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतें।
नवलगढ़ उपखंड के छोटे से गांव नाहरसिंघानी की सगी बहनें स्मृति चौधरी और टीना चौधरी भी खेलों में संघर्ष और सफलता की मिसाल बनकर उभरी हैं। पूर्व सैनिक विजयपालसिंह महला की बेटियों ने वॉलीबॉल के राष्ट्रीय पटल पर जिले की मजबूत पहचान बनाई है।
बड़ी बहन स्मृति चौधरी अब तक दो बार सीनियर ऑपन नेशनल वॉलीबॉल प्रतियोगिता में खेल चुकी हैं। इसके अलावा फेडरेशन कप नेशनल, तीन बार अंतर विश्वविद्यालय नेशनल और नौ बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। वर्ष 2018 में आठवीं कक्षा के दौरान डूंडलोद के एक निजी स्कूल से उनके खेल सफर की शुरुआत हुई थी।
छोटी बहन टीना चौधरी ने वर्ष 2019 में वॉलीबॉल शुरू किया और महज एक साल में जिला से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गईं। टीना ने नेशनल स्कूली, नेशनल ओपन सब जूनियर, नेशनल ओपन जूनियर सहित कई प्रतियोगिताओं में खेला है। खेलो इंडिया नेशनल टूर्नामेंट में रजत पदक जीतकर उन्होंने जिले का नाम रोशन किया। अब तक टीना 13 बार राज्य और चार बार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं।
निकिता, स्मृति और टीना का मानना है कि मेहनत और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। स्मृति और टीना आसपास के गांवों की बालिकाओं को निशुल्क वॉलीबॉल प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वहीं निकिता की सफलता खेल के जरिए सरकारी सेवा का सपना देखने वाले युवाओं के लिए मिसाल बन गई है। झुंझुनूं की ये बेटियां साबित कर रही हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो गांव की मिट्टी से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरी जा सकती है।
Updated on:
24 Jan 2026 01:06 pm
Published on:
24 Jan 2026 01:05 pm
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