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जोधपुर। राजस्थान के कई हिस्सों में हर गर्मी के साथ गहराता जल संकट अब धीरे-धीरे जनभागीदारी के सहारे थमता नजर आ रहा है। खेत, गांव और कस्बों तक पानी सहेजने की सोच अब कागजों से निकलकर जमीन पर दिखने लगी है।
राज्य सरकार ने 15 जनवरी, 2025 को जयपुर से ‘कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान’ की शुरुआत की। जिसके तहत जल संरक्षण को लेकर आमजन, सामाजिक संगठनों और प्रवासी राजस्थानियों ने जिम्मेदारी संभाली है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जहां 5,000 जल संरक्षण संरचनाओं का लक्ष्य रखा गया था, वहां अब तक दिसंबर 2025 तक 16 हजार छह संरचनाएं बन चुकी हैं।
गांवों में जोहड़, टांके, एनिकट और रिचार्ज पिट्स तैयार किए गए हैं। जिसमें जोधपुर जिला 1,323 संरचनाओं के साथ प्रदेश में सबसे आगे है। वहीं सबसे पीछे करौली में केवल दो संरचनाओं का ही निर्माण हो पाया है।
जमीनी स्तर पर यह अभियान केवल भूजल रिचार्ज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की सोच भी बदल रहा है।
पानी को सहेजने और उसका सही उपयोग करने की समझ गांव-गांव तक पहुंच रही है। आने वाले वर्षों में इसका असर जल स्तर और खेती दोनों पर दिखने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस अभियान के अंतर्गत जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से राज्य में जल संरक्षण से संबंधित किए गए बेहतरीन प्रदर्शन के लिए जल संचय-जन भागीदारी 1.0 अभियान में पैनइण्डिया स्तर पर पुरस्कृत किया गया।
वर्तमान में जो काम हुआ है, उसको देखते हुए अगले चरण में अब ग्राम पंचायत स्तर पर आमजन की अधिक भागीदारी के साथ अच्छे तरीके से काम किया जाएगा। जिससे बारिश से पहले इन संरचनाओं का निर्माण करवाकर वर्षा जल का संरक्षण अच्छे से किया जा सके।
Updated on:
27 Jan 2026 03:06 pm
Published on:
27 Jan 2026 02:11 pm
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