28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘अमृत’ पर सालाना खर्च हो रहे 12 करोड़ रुपए, करोड़ों जमा हो रहाफिर भी बोतलबंद पर भरोसा

सवालों में है नगर निगम का सप्लाई होने वाला पानी, कॉलोनी, मार्केट व सरकारी कार्यालयों में कंटेनर व बोतलों का बोलबाला

4 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Jan 27, 2026

Water

Water

कटनी. नगर निगम द्वारा शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए बड़ी योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। शहर की जीवनदायनी कटनी नदी में कटायेघाट पर दो फिल्टर प्लांट बने हुए हैं। एक की क्षमता प्रतिदिन 9 एमएलडी पानी शोधन करने की है व एक फिल्टर प्लांट में 20 एमएलडी पानी के शोधन करने की क्षमता है। 13 करोड़ रुपए से बैराज व फिल्टर प्लांट का भी करोड़ रुपए की लागत से बनवाया गया है। यहां से पानी शोधन कर सप्लाई करने का काम नगर निगम ने निजी कंपनी को दे रखा है। अमृत योजना के तहत इंडियन ह्यूम पाइप कंपनी काम दो साल से देख रही है। एक साल में ढाई करोड़ रुपए नगर निगम द्वारा कंपनी को दिया जा रहा है।
इसके अलावा नगर निगम में जलप्रदाय विभाग में 135 अधिकारी-कर्मचारी काम कर रहे हैं। शहर में 33 पानी की टंकियां हैं व 273 नलपकूपों के माध्यम से वार्डों में 24.50 एमएलडी पानी 23 हजार 200 घरों में सप्लाई हो रहा है। इस पानी सप्लाई के एवज में नगर निगम द्वारा हर साल लगभग 12 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नगर निगम के पानी पर शहर की जनता, कई विभागों को भरोसा नहीं हैं। कार्यालयों में बोतल बंद व डिब्बा बंद पानी पहुंच रहा है।

आखिर क्यों नहीं भरोसा?

नगर निगम द्वारा पानी शुद्ध कर हर घर व कार्यालयों में सप्लाई किया जा रहा है। कई जगह पर सार्वजनिक नल लगे हैं, बावजूद इसके लोग नगर निगम का पानी न पीकर शुद्ध पानी के नाम पर लोग कई दिन पुराना बाजार का पानी पी रहे हैं। करोड़ों खर्चने के बाद भी नल के ननि के पानी पर भरोसा शून्य है। बाजार में धड़ल्ले से बगैर जांच के डिब्बा बंद व बोतल बंद पानी बिक रहा है। लोगों के घरों में भी पहुंच डिब्बा बन्द पानी पहुंच रहा है। कई घरों में तो देखने में यह आ रहा है कि निस्तार के लिए नगर निगम के पानी का उपयोग हो रहा है।

30 से ज्यादा यूनिट कर रहीं काम

शहर व ग्रामीण इलाकों को मिलकर 30 से अधिक यूनिटें पानी बेचने का काम कर रही हैं। यहां पर न तो गुणवत्ता की कभी जांच होती और ना ही पैकेजिंग की। कई ब्रांड की बोतलें व डिब्बों में पानी खपाया जा रहा है। कैन वाले पानी की बात की जाए तो 8 हजार लीटर से अधिक खपत प्रतिदिन की है। इनकी सप्लाई कॉलोनियों, बाजार व कार्यालयों में हो रही है। इनके वॉटर फिल्टर, प्यूरीफायरिंग के लिए पर्याप्त मशीनरी नहीं है, जिनकी जांच नहीं हो रही। खाद्य सुरक्षा विभाग, प्रशासन जांच नहीं कर रहा।

6.50 करोड़ चुका रहे उपभोक्ता

शहर में 23 हजार 200 उपभोक्ताओं यहां नल कनेक्शन हैं। लगभग दो लाख लोग नगर निगम का पानी उपयोग कर रहे हैं। इसके बदले नगर निगम प्रतिमाह 234 रुपए टैक्स ले रहा है। अधिकारियों की मानें तो जलकर के रूप में हर साल लगभग साढ़े 6 करोड़ रुपए की डिमांड होती है, वसूली 4 से साढ़े 4 करोड़ रुपए के आसपास हो रही है।

दोगुना से ज्यादा टैक्स, पानी पर्याप्त नहीं

हैरानी की बात तो यह है नगर निगम की पुरानी नगर सरकार ने 27 मार्च 2018 को 90 रुपए प्रतिमाह से जलकर बढ़ाकर 150 रुपए व सालाना 5 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया था। उपभोक्ताओं के लिए यह यह भी शर्त रखी गई थी कि दो समय पानी सप्लाई होगा और नर्मदा जल आ जाने पर 24 घंटे पानी मिलेगा। लेकिन अबतक यह सुविधा नहीं हो पाई, उल्टा अब 90 रुपए की बजाय 234 रुपए लोगों को चुकाने पड़ रहे हैं। हर माह बिल न चुकाने पर डेढ़ प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज लग रहा है, जिससे कांग्रेस के पार्षदों ने जजियाकर करार दिया है।

यह है आंकड़ों की जुबानी

  • 03 लाख लोग पी रहे शहर में पानी।
  • 35 से 40 एमएलडी पानी की होनी चाहिए सप्लाई।
  • 24.50 एमएलडी हो रहा शहर में पानी सप्लाई।
  • 3 हजार से अधिक रोजाना पानी के कंटेनर की खपत।
  • 30 से अधिक पानी की यूनिट संचालित।
  • 04 हजार रुपए में लग रहा मैनुअल आरओ खर्च।
  • 20 हजार रुपए तक में लग रहे इलेक्ट्रिक आरओ।

साढ़े 3 हजार सुविधा से वंचित

शहर में पेयजल सप्लाई की स्थिति यह है कि कई वार्डों में अभी भी लीकेज के कारण शुरुआती दौर में मटमैला पानी आ रहा है। लीकेज की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। शिकायत मिलने पर नगर निगम के कर्मचारी सुधार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शहर में साढ़े 3 हजार से अधिक ऐसे लोग हैं जो आज भी नल कनेक्शन की सुविधा से वंचित हैं, जिसमें कंपनी ने अभी तक कनेक्शन नहीं किए हैं।

ये दो तस्वीरें बयां कर रहीं हकीकत

ये दो तस्वीरें शासकीय पानी के सप्लाई व शुद्धता की हकीकत को बयां कर रही हैं। पहली तस्वीर एसपी कार्यालय की है, जहां पर बोतल बंद, कंटेनर वाला पानी पहुंच रहा है, जबकि दूसरी तस्वीर कलेक्ट्रेट कार्यालय की है, जहां पर बाजार का डिब्बा बंद पानी जा रहा है। यहां के अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी बोतलबंद पानी पर भरोसा कर रहे हैं। कमोबेश स्थिति हर कार्यालय की है।

पानी का सही शोधन जरूरी

नगर निगम द्वारा जो पानी सप्लाई किया जा रहा है उसका बैराज व फिल्टर प्लांट में पूरी तरह से शोधन करने के बाद सप्लाई किया जा रहा है। हर दिन पानी के नमूनों की जांच होती है। पीएचई की लैब से भी क्रॉस चैक कराया जा रहा है। पानी एकदम मानक के अनुसार पीने योग्य भेजा जा रहा है। लीकेज के कारण कहीं पर समस्या तो वह बात अलग है। लोग जो बाजार का बोतल, डिब्बा, कंटेनर वाला पानी उपयोग कर रहे हैं उसकी जांच जरूरी है। सही तरीके से शोधन किया जाना नितांत आवश्यक है।

मानवेंद्र सिंह, कैमिस्ट नगर निगम।

वर्जन

शहर में एकदम शुद्ध पानी की सप्लाई की जा रही है। इंदौर की घटना के बाद सतर्कता और बढ़ा दी गई है। नगर निगम का पानी हर मानक पर खरा है। यदि कहीं पर किसी को समस्या है तो तत्काल शिकायत करें, उसका समाधान कराया जाएगा।

सुधीर मिश्रा, कार्यपालन यंत्री नगर निगम।