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कटनी/बहोरीबंद. बहोरीबंद क्षेत्र में रबी सीजन की फसलों, विशेषकर गेहूं में छिड़काव के लिए यूरिया खाद की सख्त आवश्यकता है, लेकिन क्षेत्र के किसानों को बाजार में यूरिया उपलब्ध नहीं हो पा रही है। निजी दुकानों से निराश किसानों की आखिरी उम्मीद डबल लॉक गोदाम थी, लेकिन वहां भी खाद वितरण की सीमित व्यवस्था ने किसानों की गम्भीर परेशानी और बढ़ा दी है।
डबल लॉक गोदाम प्रबंधन द्वारा प्रतिदिन मात्र 100 किसानों को ही टोकन दिए जा रहे हैं। इसी कारण किसान टोकन पाने के लिए रविवार देर शाम से ही गोदाम पहुंचने लगे और अपनी बारी सुनिश्चित करने के लिए कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे धरती पर बिस्तर डालकर रात बिताने को मजबूर हुए।
गाड़ा निवासी किसान सतीश बाजपेयी ने बताया कि गेहूं की फसल में समय पर यूरिया डालना बेहद जरूरी है, लेकिन कई दिनों से खाद नहीं मिल पा रही। वहीं दुर्गा, झोना और केवल ने बताया कि वे सिर्फ यूरिया लेने के लिए डबल लॉक गोदाम पहुंचे हैं, लेकिन टोकन की अनिश्चितता के चलते रात में ही आना पड़ा। ग्राम गिदुरहा से आए किसान दीपेन्द्र सिंह ने कहा कि टोकन लेने के लिए रातभर जागना पड़ रहा है। ठंड के बावजूद काउंटर के सामने बिस्तर लगाकर सोना मजबूरी बन गया है।
किसानों का कहना है कि बीते एक सप्ताह से गोदाम में यूरिया उपलब्ध नहीं थी। शनिवार को जैसे ही यूरिया खाद का रैक पहुंचा, इसकी सूचना फैलते ही रविवार शाम से ही गोदाम परिसर में किसानों की भीड़ जुटने लगी। स्थिति यह है कि किसान ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे रातजगा कर रहे हैं, ताकि सुबह टोकन मिल सके और खाद प्राप्त हो जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय पर यूरिया नहीं मिली तो फसल की पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे आर्थिक नुकसान तय है।किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि यूरिया खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, टोकन वितरण की संख्या बढ़ाई जाए और ठंड को देखते हुए रात्रि व्यवस्था, प्रकाश व बैठने की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई जाए। रबी सीजन के अहम समय में खाद की यह किल्लत किसानों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है, जिस पर शीघ्र ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
जिले में खाद का रैक प्वाइंट होने के बावजूद किसानों को समय पर यूरिया खाद नहीं मिलना, प्रशासनिक निगरानी तंत्र की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। रैक पहुंचने की सूचना के बाद भी डबल लॉक गोदामों में सीमित वितरण व्यवस्था किसानों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप नहीं है। खाद वितरण में पारदर्शिता की कमी से यह आशंका बलवती हो रही है कि आपूर्ति श्रृंखला में कहीं न कहीं गड़बड़ी है। किसानों को रातभर लाइन में लगने और खुले आसमान के नीचे ठंड में सोने की मजबूरी, व्यवस्था की असंवेदनशीलता को दर्शाती है। जिले में पर्याप्त आवक के बावजूद खाद का बाजार से गायब रहना, कालाबाजारी की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। निजी विक्रेताओं द्वारा ऊंचे दामों पर खाद उपलब्ध कराने की शिकायतें किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। टोकन प्रणाली की सीमित संख्या से वास्तविक जरूरतमंद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। प्रशासनिक स्तर पर स्टॉक, वितरण और बिक्री की सख्त निगरानी न होना समस्या को और गंभीर बना रहा है। किसानों की मांग है कि खाद की आवक से वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की जांच हो। दोषियों पर सख्त कार्रवाई और निगरानी तंत्र को मजबूत करना अब समय की आवश्यकता बन गई है।
Published on:
19 Jan 2026 08:20 am
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