
Success tips for students
कटनी. कक्षा दसवीं एवं बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। जिलेभर में हजारों विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में मानसिक तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव से नहीं बल्कि सही तैयारी और रणनीति से सफलता मिलती है। परीक्षा के बीच आने वाले विषयों की तैयारी, समय का सही उपयोग और प्रश्नपत्र हल करने की कला पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार विद्यार्थियों को परीक्षा के दिनों में पूरे सिलेबस को दोबारा पढऩे के बजाय महत्वपूर्ण टॉपिक्स, सूत्रों, परिभाषाओं और संभावित प्रश्नों पर फोकस करना चाहिए। परीक्षा के एक दिन पहले नए टॉपिक पढऩे से बचें और पहले से तैयार नोट्स का रिवीजन करें। प्रश्नपत्र हल करते समय पहले आसान प्रश्नों को हल करना चाहिए, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है। समय प्रबंधन बेहद जरूरी है, इसलिए उत्तर लिखते समय अनावश्यक विस्तार से बचें और साफ-सुथरी लिखावट रखें।
परीक्षा के दौरान पर्याप्त नींद, हल्का भोजन और सकारात्मक सोच भी उतनी ही जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अंतराल में छोटे ब्रेक लेने से मानसिक थकान कम होती है। आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
बोर्ड परीक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इसे बोझ की तरह नहीं लेना चाहिए। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपनी तैयारी पर भरोसा रखें। परीक्षा के दिनों में रोजाना एक समय सारिणी बनाकर उसी के अनुसार पढ़ाई करें। कठिन विषयों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ें, जिससे समझ आसान हो। लिखित अभ्यास पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि अभ्यास से ही गति और स्पष्टता आती है। परीक्षा से पहले सकारात्मक आत्मसंवाद करें और खुद को बार-बार याद दिलाएं कि आप कर सकते हैं। घबराहट की स्थिति में गहरी सांस लें और मन को शांत करें। सही दिशा में किया गया प्रयास निश्चित रूप से अच्छे परिणाम देता है।
बोर्ड परीक्षा केवल याददाश्त की नहीं बल्कि समझ और प्रस्तुति की परीक्षा होती है। विद्यार्थियों को उत्तर लिखते समय विषय की समझ को साफ शब्दों में प्रस्तुत करना चाहिए। परीक्षा के दौरान समय का सही विभाजन बेहद जरूरी है, ताकि सभी प्रश्नों को पूरा समय मिल सके। मॉडल प्रश्नपत्र और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास बहुत लाभकारी होता है। परीक्षा के दिनों में मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाना चाहिए। आत्मअनुशासन और निरंतर अभ्यास से परीक्षा का डर स्वत: समाप्त हो जाता है।
परीक्षा तनाव एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपनी तुलना दूसरों से न करें। पर्याप्त नींद लेना, संतुलित भोजन करना और हल्का व्यायाम या ध्यान करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यदि मन में नकारात्मक विचार आएं तो उन्हें तुरंत सकारात्मक सोच से बदलें। माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात करना भी तनाव कम करने में मदद करता है। याद रखें कि परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं।
इस समय बच्चों को दबाव नहीं बल्कि सहयोग की जरूरत होती है। अभिभावकों को बच्चों की तुलना दूसरों से करने से बचना चाहिए। घर का माहौल शांत और सकारात्मक रखें, ताकि बच्चा बिना डर के पढ़ाई कर सके। बच्चों पर भरोसा जताएं और उन्हें प्रोत्साहित करें। परीक्षा के बाद परिणाम चाहे जैसा हो, बच्चों को यह एहसास दिलाएं कि उनका मूल्य केवल अंकों से नहीं तय होता।
परीक्षा का पहला पेपर अच्छा गया। पहले थोड़ी घबराहट थी, लेकिन प्रश्नपत्र हाथ में आते ही आत्मविश्वास बढ़ गया। अधिकतर प्रश्न सिलेबस से ही थे और समय भी पर्याप्त मिला। पहले आसान प्रश्न हल किए, जिससे मन शांत हुआ। समय प्रबंधन के कारण पूरा पेपर हल कर पाई। रिचा ने कहा कि नियमित रिवीजन और लिखित अभ्यास ने काफी मदद की। उन्होंने अन्य विद्यार्थियों को सलाह दी कि घबराएं नहीं और खुद पर भरोसा रखें।
Published on:
12 Feb 2026 12:21 pm
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