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बजट से महिलाओं को बड़ी उम्मीदें: सुरक्षा, रोजगार और सशक्तिकरण पर हो विशेष फोकस, महंगाई पर लगे रोक

सिंधी भवन में आयोजित पत्रिका के टॉक शो में महिलाओं की बेबाक राय, ठोस प्रावधानों की उठाई मांग

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 18, 2026

Talk show in katni

Talk show in katni

कटनी. फरवरी माह में केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया जाना है। बजट को लेकर समाज के हर वर्ग में उत्सुकता और उम्मीदें हैं। इसी कड़ी में देश की आधी आबादी यानी महिलाएं भी इस बार बजट से बड़े और ठोस प्रावधानों की आस लगाए बैठी हैं। बजट से पहले पत्रिका द्वारा सिंधु भवन नई बस्ती में एक टॉक शो का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी।
महिलाओं ने कहा कि अब समय आ गया है जब बजट में केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर असर दिखाने वाले प्रावधान होने चाहिए। चर्चा के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, स्वरोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। महिला श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बीमा, मातृत्व लाभ और न्यूनतम वेतन की गारंटी, डिजिटल साक्षरता एवं साइबर सुरक्षा, महिलाओं के लिए मुफ्त डिजिटल ट्रेनिंग और साइबर सेफ्टी प्रोग्राम, महिला-हितैषी टैक्स प्रावधान, कामकाजी महिलाओं को अतिरिक्त टैक्स छूट, महिला नाम पर घर खरीदने पर विशेष सब्सिडी, कम ब्याज और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट आदि के प्रावधान हों।

महिलाओं के यह हैं अपेक्षित प्रावधान

महिलाओं ने कहा कि महिला रोजगार एवं उद्यमिता पैकेज, महिला स्टार्टअप फंड, बिना गारंटी ऋण, स्वरोजगार योजनाओं का विस्तार, महिला सुरक्षा बजट में वृद्धि, महिला थाने, फास्ट ट्रैक कोर्ट, वन-स्टॉप सेंटर और 181/112 हेल्पलाइन को मजबूत करने के लिए अलग बजट, कामकाजी महिलाओं के लिए चाइल्डकेयर सपोर्ट, सब्सिडी युक्त क्रेच, डे-केयर और वर्किंग वूमेन हॉस्टल, महिला स्वास्थ्य विशेष पैकेज, मातृ स्वास्थ्य, पोषण, एनीमिया, कैंसर जांच और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, बालिकाओं की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, मेडिकल, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में विशेष स्कॉलरशिप, ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण, लखपति दीदी योजना और महिला किसान समूहों को सब्सिडी व मार्केट लिंक हो।

महिलाओं ने रखी यह बात

बजट 2026 में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर और ठोस प्रावधान किए जाते हैं, तो यह न केवल नारी सशक्तिकरण को मजबूती देगा, बल्कि देश की समग्र विकास गति को भी नई दिशा देगा।

अकांक्षा अग्रवाल, गृहणी।

हम महिलाएं घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियां निभाती हैं, लेकिन बजट में हमारे योगदान को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। इस बार उम्मीद है कि महिलाओं के लिए सस्ते ऋण, स्वरोजगार योजनाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेगी। खासकर गृहिणियों के लिए होम-बेस्ड बिजनेस को बढ़ावा मिलना चाहिए, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

अनीता देवी, गृहणी।

कामकाजी महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या चाइल्डकेयर की है। अगर बजट में क्रेच और डे-केयर की सुविधा को बढ़ाया जाए तो महिलाओं का करियर प्रभावित नहीं होगा। टैक्स में भी महिलाओं को अतिरिक्त राहत मिलनी चाहिए, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।

चित्रा गुप्ता, गृहणी।

छात्राओं को उच्च शिक्षा में आर्थिक सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत है। बजट में मेडिकल, इंजीनियरिंग और रिसर्च जैसी पढ़ाई के लिए छात्रवृत्तियां बढऩी चाहिए। इससे गरीब और मध्यम वर्ग की बेटियां भी बड़े सपने पूरे कर सकेंगी। महंगाई पर रोक लगनी चाहिए।

दीपिका अग्रवाल, गृहणी।

गांव की महिलाएं खेती, पशुपालन और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। बजट में और लखपति दीदी योजना के लिए ज्यादा पैसा मिलना चाहिए। अगर हमें बाजार से जोड़ा जाए तो हम खुद की और परिवार की स्थिति सुधार सकती हैं।

मीनू अग्रवाल, गृहणी।

महिला उद्यमियों को पूंजी की सबसे बड़ी समस्या होती है। बिना गारंटी लोन और स्टार्टअप फंड से महिलाएं आगे आ सकती हैं। बजट में महिलाओं के लिए अलग बिजनेस सपोर्ट सिस्टम होना चाहिए। महिला सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बजट से भी जुड़ी है। फास्ट ट्रैक कोर्ट, महिला थाने और वन-स्टॉप सेंटर के लिए अलग और पर्याप्त बजट होना चाहिए, तभी महिलाओं को न्याय समय पर मिलेगा।

रश्मि, गृहणी।

महिलाओं का सशक्तिकरण शिक्षा से शुरू होता है। बजट में बालिकाओं की शिक्षा पर ज्यादा निवेश होना चाहिए। डिजिटल शिक्षा और स्कॉलरशिप से बेटियां आत्मविश्वासी बनेंगी। महिला स्वास्थ्य आज भी उपेक्षित है। बजट में एनीमिया, मातृ स्वास्थ्य और कैंसर जांच के लिए अलग पैकेज होना चाहिए। स्वस्थ महिला ही स्वस्थ समाज की नींव होती है।

रुचि अग्रवाल, गृहणी।