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स्टेट हाइवे : 15 किमी एरिया में धूल का गुबार, हाइवे के दाएं-बाएं खेतों में खड़ी फसलों की थमी सांसें

स्टेट हाइवे पर पांच गांव में किसानों की गाढ़ी कमाई पर धूल की परत जम रही है। निर्माणाधीन हाइवे पर 15 किमी से अधिक एरिया में धूल का गुबार है।

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खंडवा : निर्माणाधीन हाइवे के दाएं-बाएं खेतों में खड़ी फसलों पर जमा हो रही धूल

स्टेट हाइवे पर पांच गांव में किसानों की गाढ़ी कमाई पर धूल की परत जम रही है। निर्माणाधीन हाइवे पर 15 किमी से अधिक एरिया में धूल का गुबार है। धूल हाइवे के दाएं-बाएं छोर पर खेतों में खड़ी फसलों की पत्तियों पर जमा हो रही है। इससे उत्पादन कमजोर होगा। इसको लेकर किसान परेशान हैं।

पांच गांवों की फसलों पर 15 दिन से जम रही धूल

खलवा-पंधाना रोड पर बोरगांव खुर्द, सिरपुर फाटा , पांजरिया, सैयद पुर से डुल्हार तक स्टेट हाइवे पर निर्माण चालू है। पानी का छिड़काव नहीं होने से धूल का गुबार खेतों में खड़ी फसलों की पत्तियों पर जमा हो रही है। यह स्थिति निर्माणाधीन हाइवे के दोनों में 100 मीटर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हैं। पांजरिया के किसान हीरालाल पटेल ने अधिकारियों को सूचना दी है कि दो एकड़ मक्का की फसल अच्छी है। लेकिन पत्तियों पर 15 दिन से धूल जमा हो रही है।

फसलों का प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फसलों की पत्तियों पर लंबे समय तक धूल जमा होने से पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित जाती है। इससे उत्पादन और गुणवत्ता भी कमजोर हो जाती है।

एक्सपर्ट व्यू : डॉ सौरव गुप्ता, कृषि विशेषज्ञ

धूल फसलों की पत्तियों पर प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया को प्रभावित करता है। प्रकाश की मात्रा कम होने से तापमान बढ़ जाता है। लंबे समय से तक पत्तियों पर धूल जमा होने से फसलों के भोजन बनाने वाली प्रक्रिया कमजोर हो जाती है। भोजन बाधित होने से सूखने लगते हैं। धूल का साइड इफेक्ट्स फलियों के साथ दानों पर पड़ता है। दाने छोटे और उत्पादन कमजोर हो जाता है।

ये फसलें हो रही प्रभावित

मार्ग के दोनों छोर पर 100-100 मीटर एरिया में खेतों की खड़ी फसलों में चना, अरबी, गेहूं, मक्का आदि फसलों की बोवनी की गई है। फसलें तैयार होने के करीब हैं।

किसान बोले...

किसान दयाचंद पटेल का कहना है कि पंद्रह दिन से पत्तियों पर धूल जमा हो रही है। दो एकड़ चना के पौधे पर धूल जमा है। मार्ग पर निर्माण के समय पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इसकी सूचना अधिकारियों को दी गई है।

किसान सतीश पटेल का कहना है कि गेहूं व चना की ग्रोथ कमजोर हो गई है। गेहूं की बालियों के दाने लगे हैं। पत्तियों पर धूल जमा होने से उत्पादन प्रभावित होगा। इसकी सूचना विभागीय अधिकारियों को दी गई है। कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

पत्तियों पर धूल का साइड इफेक्ट्स

धूल की लेयर से पौधे का भोजन प्रभावित होता है।

पौधों में सांसें लेने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

धूल की परत के नीचे फफूंद जैसी बीमारी पनपने लगती है।

धूल पत्ती पर लंबे समय से जमा होने से तापमान बढ़ जाता है।

बचाव का उपाय

धूल की सफाई पानी की बौछार करें ।

निर्माण के आस-पास विशेष ध्यान रखें।

फसलों की सफाई में पानी का उपयोग करें।

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लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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