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भू-कैलाश: जहां गंगा के किनारे बसते हैं ‘जोड़ा’ महादेव

— इतिहास, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम कोलकाता. खिदिरपुर क्षेत्र में स्थित ‘भू-कैलाश राजबाड़ी’ और वहां का मंदिर परिसर इतिहास, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है। यह स्थान आज के आधुनिक कोलकाता के बीचों-बीच एक छिपे हुए रत्न की तरह है। इतिहास प्रेमियों को यहाँ की दीवारों पर उकेरी गई नक्काशी और शांत […]

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-- इतिहास, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम

कोलकाता. खिदिरपुर क्षेत्र में स्थित 'भू-कैलाश राजबाड़ी' और वहां का मंदिर परिसर इतिहास, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है। यह स्थान आज के आधुनिक कोलकाता के बीचों-बीच एक छिपे हुए रत्न की तरह है। इतिहास प्रेमियों को यहाँ की दीवारों पर उकेरी गई नक्काशी और शांत वातावरण एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। यद्यपि समय के साथ राजबाड़ी का कुछ हिस्सा जर्जर हो गया है, लेकिन यहाँ की शांति और ऐतिहासिक आभा आज भी बरकरार है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ हज़ारों की भीड़ उमड़ती है। फिल्मकारों और फोटोग्राफरों के लिए यह स्थान अपनी पुरानी नक्काशी और 'विंटेज' लुक के कारण हमेशा से पसंदीदा रहा है।

इतिहास की जड़ें

कहा जाता है कि करीब 245 साल पुराने भू-कैलाश की स्थापना का श्रेय महाराजा जयनारायण घोसाल को जाता है। वे काशी के भक्त थे और काशी में ही रहना चाहते थे, लेकिन अपनी माता की इच्छा का मान रखते हुए उन्होंने काशी के समान ही एक 'कैलाश' कोलकाता में बसाने का संकल्प लिया। 1781 में उन्होंने यहाँ दो विशाल शिव मंदिरों का निर्माण करवाया और उस स्थान का नाम रखा 'भू-कैलाश' (यानी धरती पर कैलाश)।

वास्तुकला का आकर्षण

परिसर के मुख्य आकर्षण आमने-सामने स्थित यहां के दो विशाल शिव मंदिर हैं जिनमें स्थापित शिवलिंगों में एक का नाम 'रक्तकमलेश्वर' और दूसरे शिव का नाम 'पतितपावनेश्वर' है। ये दोनों मंदिर 'आठचला' शैली में बने हैं, जो बंगाल की पारंपरिक स्थापत्य कला की पहचान है। भू-कैलाश में स्थापित शिवलिंगों का आकार बंगाल के सबसे ऊंचे शिवलिंगों में गिने जाते हैं। प्रत्येक मंदिर के बाहर काले पत्थर से बने विशाल 'नंदी' (बैल) की प्रतिमाएं हैं, जो अपनी भव्यता बढ़ाती हैं। इस परिसर में कुलदेवी पतितपावनी (मां दुर्गा) का भी मंदिर है। यहाँ एक ही परिसर में शैव और शाक्त मतों का अद्भुत मिलन देखने को मिलता है। मंदिर के सामने एक विशाल जलकुंड (तालाब) इसकी सुंदरता बढ़ा देता है।

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लव सोनकर

लव सोनकर

लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...


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