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राजस्थान कांग्रेस में घमासान: पूर्व मंत्री अशोक चांदना ने की ऐसी टिप्पणी की आग बबूला हो गए ये नेता

Kota News: कांग्रेस में चल रही गुटबाजी अब सार्वजनिक मंचों पर भी दिखने लगी है। एसआइआर और मनरेगा को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन में भी यह खेमेबाजी नजर आई।

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कोटा कलक्ट्री पर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता photo patrika

Congress Dispute: कांग्रेस में चल रही गुटबाजी अब सार्वजनिक मंचों पर भी दिखने लगी है। एसआइआर और मनरेगा को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन में भी यह खेमेबाजी नजर आई। एसआइआर को लेकर बुधवार को कलक्ट्री पर एक गुट के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इसमें कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्ष नदारद दिखे। दोनों से पूछा तो बोले-हमें ऐसे किसी प्रदर्शन के बारे में जानकारी नहीं है। हम तो जयपुर आए हुए हैं।

प्रदर्शन में शहर और देहात के अधिकतर पदाधिकारी नहीं पहुंचे

प्रदर्शन में शहर और देहात के अधिकतर पदाधिकारी नहीं पहुंचे। प्रदर्शन में कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी के अलावा भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए खेल प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अमीन पठान, बृजेश शर्मा नीटू, लाडपुरा की पूर्व विधायक पूनम गोयल समेत कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी पिछले दिनों कांग्रेस के मनरेगा और एसआइआर प्रदर्शन में अलग-थलग नजर आए थे। इसके चलते उन्होंने कुछ कार्यकर्ताओं को साथ लेकर बुधवार को यह प्रदर्शन किया। इसमें शहर और देहात की कार्यकारिणी के ज्यादातर सदस्य नहीं पहुंचे और पूर्व जिलाध्यक्षों ने भी दूरी बनाए रखी। विपिन बरथूनिया, ओबीसी प्रकोष्ठ के संभाग के अध्यक्ष अशोक नागर व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। उधर हिण्डौली विधायक और पूर्व मंत्री अशोक चांदना ने कोटा के एक नेता का नाम लिए बगैर ऐसी टिप्पणी कर दी कि अब वह आग बबूला हो गए हैं और बार-बार बयान दे रहे हैं। इससे कांग्रेस में वाक युद्ध शुरू हो गया है।

‘सृजन’ में भी दिखा था बिखराव

कोटा में कांग्रेस गुटों में बंटती नजर आ रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर जिलाध्यक्षों के चयन के लिए सृजन कार्यक्रम में भी गुटबाजी चौड़े आई थी। भाजपा से कांग्रेस में आए नेता अपने खेमे से शहर और देहात के जिलाध्यक्ष बनाना चाहते थे। उन्होंने शहर अध्यक्ष के लिए एक ऐसे व्यक्ति का नाम पर्यवेक्षकों को दे दिया था, जो पार्टी के प्राथमिक सदस्य तक नहीं थे। इससे पार्टी से अर्से से जुड़े कार्यकर्ताओं को धक्का लगा और जो इनके कट्टर समर्थक माने जाते थे, वह भी दूर होने लग गए। बाद में मौजूदा दोनों जिलाध्यक्षों के नामों का भी इन्होंने विरोध किया। इस कारण गुटबाजी बढ़ती ही जा रही है।

गुटबाजी रिकॉल... इन कार्यक्रमों में नहीं दिखे थे बुधवार को प्रदर्शन करने वाले

11 दिसम्बर : शहर कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम और देहात अध्यक्ष भानुप्रतापसिंह का पार्टी कार्यालय में कार्यभार समारोह।

11 जनवरी : मनरेगा को लेकर कांग्रेस शहर और देहात का संयुक्त धरना।

19 जनवरी : एसआइआर को लेकर जिला कलक्टर से मुलाकात कार्यक्रम।

शहर कांग्रेस का प्रदर्शन नहीं था और मुझे इसकी जानकारी भी नहीं थी। पार्टी ने जयपुर में मीटिंग रखी थी, इसलिए यहां आ गई थी। गुटबाजी जैसी कोई बात नहीं है।

राखी गौतम, शहर कांग्रेस अध्यक्ष

देहात का कोई प्रदर्शन कोटा में नहीं था और ना ही इसकी कोई सूचना थी। मनरेगा को लेकर प्रदेशाध्यक्ष ने जयपुर में बैठक रखी थी, जिसमें शामिल होने जयपुर आ गए थे। हम सब एक हैं और मनरेगा और एसआइआर का विरोध हर स्तर पर करेंगे।

- भानुप्रताप सिंह, देहात कांग्रेस अध्यक्ष