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Garasia Tribe Marriage System: न मंत्र, न फेरे… मेले में पसंद आया पार्टनर तो साथ रहने की छूट

Garasia Tribe: राजस्थान की गरासिया जनजाति में लिव-इन रिलेशनशिप का है अनोखा रिवाज। यहां मेले में पार्टनर चुनकर भाग जाते हैं कपल और बच्चे होने के बाद ही शादी करते हैं। जानिए इस दिलचस्प परंपरा के पीछे की कहानी।

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भारत

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Pratiksha Gupta

Jan 30, 2026

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Garasia Tribe Live In Relationship Culture | (फोटो सोर्स- patrika.com)

Garasia Tribe: ​आज के टाइम में मेट्रो सिटीज में लिव-इन रिलेशनशिप पर खूब चर्चा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान और गुजरात के घने जंगलों और पहाड़ों के बीच बसने वाली गरासिया जनजाति सदियों से लिव-इन रिलेशनशिप में रहती आ रही है। यहां का समाज इतना खुला है कि लड़का-लड़की पहले साथ रहते हैं, बच्चे पैदा करते हैं और फिर जब मन करता है (या जब पैसा होता है), तब शादी करते हैं। तो आइए जानते हैं इस जनजाति की इस अनोखी और हैरान कर देने वाली परंपरा के बारे में।

​Garasia Tribe Marriage System: मेले में होता है मैच-मेकिंग, फिर शुरू होती है साथ वाली जिंदगी

​गरासिया जनजाती में जीवनसाथी चुनने का तरीका किसी फिल्म से कम नहीं है। इनके यहां विशेष मेले लगते हैं। इस मेले में लड़का और लड़की एक-दूसरे को पसंद करते हैं और अगर बात बन गई, तो वे साथ घर से निकल जाते हैं। वापस लौटने पर समाज उन्हें पति-पत्नी की तरह रहने की अनुमति दे देता है, वो भी बिना किसी पंडित या फेरों के।

​बच्चे हो जाएं, फिर बैंड-बाजा और बारात

​इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि यहां शादी की जल्दी किसी को नहीं होती। कपल सालों तक साथ रहते हैं और इस दौरान अगर बच्चे हो जाते हैं, तो उसे बहुत शुभ माना जाता है। कई बार तो ऐसा होता है कि बाप और बेटे की शादी एक ही मंडप में हो रही होती है। यानी जब तक बच्चा न हो जाए, तब तक शादी की रस्मों को जरूरी नहीं समझा जाता।

​वो एक जिद… जिसने शुरू की ये अनोखी रीत

​कहते हैं कि पुराने समय में इस जनजाति के चार भाइयों में से तीन ने धूमधाम से शादी की थी, लेकिन किसी को संतान नहीं हुई। वहीं चौथा भाई बिना शादी के एक लड़की के साथ रहने लगा और उसका परिवार बस गया। बस, तभी से इस समाज को लगा कि लिव-इन ही उनके वंश को आगे बढ़ाने का सही तरीका है। तब से आज तक यह परंपरा चली आ रही है।

​न दहेज का डर, न पार्टनर बदलने पर पाबंदी

​गरासिया समाज महिलाओं को बहुत सम्मान देता है। अगर किसी महिला को अपने पार्टनर के साथ तालमेल नहीं बैठ रहा, तो वह दूसरा साथी चुन सकती है। बस इसके लिए नए पार्टनर को पुराने पार्टनर को कुछ हर्जाना (मुआवजा) देना होता है। यही वजह है कि इस समाज में दहेज के लिए प्रताड़ना या बलात्कार जैसी बुराइयां न के बराबर हैं।