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UP Budget 2026-27: बजट पर अखिलेश का बड़ा हमला, अमेरिका डील पर सवाल, किसान और यूपी की अनदेखी का आरोप

UP Budget Gift: लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बजट को दिशाहीन बताते हुए किसानों, गरीबों और उत्तर प्रदेश की अनदेखी का आरोप लगाया। अमेरिका के साथ हुई कथित ‘डील’ को उन्होंने ‘ढील’ करार देते हुए आर्थिक प्रभावों पर गंभीर सवाल उठाए।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 11, 2026

बजट और अमेरिका ‘डील’ पर अखिलेश यादव का हमला, बोले-किसान, गरीब और यूपी फिर उपेक्षित    (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

बजट और अमेरिका ‘डील’ पर अखिलेश यादव का हमला, बोले-किसान, गरीब और यूपी फिर उपेक्षित    (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Akhilesh Yadav Slams Budget:  संसद के बजट सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आम बजट को “दिशाहीन” करार देते हुए आरोप लगाया कि इसमें गरीबों, पिछड़ों, दलितों और किसानों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। साथ ही उन्होंने अमेरिका के साथ सरकार की कथित ‘डील’ को ‘ढील’ बताते हुए कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था, स्वदेशी उद्योग और कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अखिलेश यादव ने अपने भाषण में कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और है। “बजट में आंकड़ों की बाज़ीगरी है, लेकिन आम आदमी के जीवन में राहत का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखता,” उन्होंने कहा।

‘डील नहीं, ढील’-अमेरिका समझौते पर सवाल

अखिलेश यादव ने विशेष रूप से अमेरिका के साथ हुए आर्थिक और व्यापारिक समझौतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पारदर्शिता नहीं बरत रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार इसे डील कह रही है, लेकिन यह देश के हितों में ढील जैसी लगती है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे समझौते विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचा सकते हैं, जबकि छोटे उद्योग, कुटीर उद्योग और भारतीय किसान नुकसान की स्थिति में आ सकते हैं। सपा प्रमुख ने पूछा कि क्या सरकार ने इस समझौते के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन किया है? क्या संसद को पूरी जानकारी दी गई है?

किसानों के मुद्दे पर घेरा

सपा प्रमुख ने किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को लेकर भी केंद्र को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले किया गया यह वादा आज भी अधूरा है। किसानों की लागत बढ़ रही है, लेकिन आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। ऐसे में बजट में किसानों के लिए क्या ठोस राहत है”- उन्होंने सवाल किया। अखिलेश यादव ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि जब तक MSP को कानूनी रूप नहीं दिया जाएगा, तब तक किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलना सुनिश्चित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि खाद, बीज, डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से किसान पहले से ही दबाव में हैं। ऐसे में बजट से राहत की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई।

गरीब, पिछड़े और दलित वर्ग का जिक्र

अपने भाषण में अखिलेश यादव ने सामाजिक न्याय के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बजट में गरीबों, पिछड़ों और दलितों के लिए योजनाओं का विस्तार दिखता नहीं है। उन्होंने कहा कि जो वर्ग सबसे ज्यादा सरकारी मदद का हकदार है, वही आज सबसे ज्यादा उपेक्षित है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे कमजोर वर्गों की पहुंच बुनियादी सुविधाओं तक और मुश्किल हो जाएगी।

उत्तर प्रदेश की अनदेखी का आरोप

अखिलेश यादव ने कहा कि देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश को बजट में कोई विशेष पैकेज या बड़ी योजना नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यूपी की आबादी, बेरोजगारी दर और विकास की जरूरतों को देखते हुए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रदेश में उद्योग, रोजगार और कृषि ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, लेकिन बजट में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखा।

बेरोजगारी और युवाओं का मुद्दा

सपा प्रमुख ने युवाओं के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, लेकिन बजट में रोजगार सृजन के ठोस उपायों की कमी दिखती है। युवा पढ़-लिखकर डिग्रियां लेकर घूम रहे हैं, लेकिन नौकरियां नहीं हैं। बजट में उनके लिए आशा की किरण होनी चाहिए थी,” उन्होंने कहा।

सरकार के दावों पर सवाल

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत और विकास की बात करती है, लेकिन छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग को राहत नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि महंगाई ने आम परिवार का बजट बिगाड़ दिया है, लेकिन इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

राजनीतिक संदेश भी साफ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह भाषण न केवल संसद के भीतर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति है, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को प्रमुखता देने की कोशिश भी है। सपा लगातार किसान, युवा और पिछड़े वर्ग के मुद्दों को अपनी राजनीति का केंद्र बना रही है।

सरकार का पक्ष

हालांकि, सरकार की ओर से पहले ही बजट को “समावेशी” और “विकासोन्मुख” बताया जा चुका है। वित्त मंत्री ने कहा था कि बजट में बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। लेकिन विपक्ष इन दावों को ज़मीनी हकीकत से दूर बता रहा है।