10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

ED Investigation: शैली ट्रेडर्स के जरिए कोडीन सिरप की तस्करी, ईडी जांच में 800 करोड़ के अवैध कारोबार का खुलासा

ED Probes ₹800 Crore Codeine Syrup Racket : कोडीन युक्त कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय तस्करी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। ईडी सूत्रों के अनुसार, शुभम जायसवाल ने पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक अवैध सप्लाई कर करीब 800 करोड़ रुपये की कमाई की। मामले में जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज है।

4 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Ritesh Singh

Jan 09, 2026

अवैध कारोबार से शुभम जायसवाल ने कमाए करीब ₹800 करोड़, ईडी की जांच में सनसनीखेज खुलासे (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

अवैध कारोबार से शुभम जायसवाल ने कमाए करीब ₹800 करोड़, ईडी की जांच में सनसनीखेज खुलासे (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

ED Investigation Codeine Syrup: उत्तर प्रदेश से जुड़े एक बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ईडी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल कथित तौर पर कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री के जरिए लगभग ₹800 करोड़ की कमाई कर चुका है। यह सिरप पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजा जा रहा था, जहां इसकी भारी मांग अवैध नशीले पदार्थ के रूप में है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि शुभम जायसवाल ने अपनी फर्म शैली ट्रेडर्स (Shaili Traders) के जरिए इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट को अंजाम दिया। अब यह मामला केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना जा रहा है।

2.24 करोड़ बोतलों की अवैध सप्लाई का आरोप

ईडी और अन्य जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शुभम जायसवाल ने करीब 2.24 करोड़ बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई की। प्रत्येक बोतल को लगभग ₹500 की दर से तस्करों को बेचा गया। इस तरह कुल कारोबार की अनुमानित राशि करीब ₹1,120 करोड़ बैठती है, जिसमें से लगभग ₹800 करोड़ की अवैध कमाई होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह सिरप मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के तस्करों को बेचा जाता था, जो आगे इसे बांग्लादेश में खपाते थे। वहां इसे नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिस पर स्थानीय स्तर पर सख्त प्रतिबंध है।

एबॉट फार्मास्युटिकल्स से की गई खरीद

जांच में यह भी सामने आया है कि शुभम जायसवाल ने यह कफ सिरप एबॉट फार्मास्युटिकल्स से वैध रूप से खरीदा था। सूत्रों के मुताबिक, उसने करीब ₹312 करोड़ का भुगतान कंपनी को किया। हालांकि, ईडी को संदेह है कि इस खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम भी संदिग्ध स्रोतों से आई थी। ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या फार्मा कंपनी को सिरप की असामान्य मात्रा और उसके अंतिम उपयोग को लेकर कोई जानकारी थी या नहीं। फिलहाल कंपनी की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन दस्तावेजों की गहन जांच जारी है।

प्रभावशाली लोगों से मिली आर्थिक मदद

ईडी सूत्रों का दावा है कि शुभम जायसवाल को इस अवैध कारोबार के लिए वित्तीय सहायता उसके कुछ करीबी सहयोगियों से मिली, जिनमें कथित तौर पर प्रभावशाली व्यक्ति भी शामिल हैं। जांच एजेंसी इस एंगल से भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस नेटवर्क को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण मिला हुआ था।

सूत्रों के अनुसार, कई बैंक खातों, शेल कंपनियों और लेन-देन की परतों के जरिए पैसे को घुमाया गया, ताकि अवैध कमाई को वैध रूप दिया जा सके। मनी लॉन्ड्रिंग के तहत यह मामला अब और गंभीर हो गया है।

बीएसएफ और एनसीबी की कार्रवाई, खेप जब्त

इस तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब हाल ही में पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कोडीन युक्त कफ सिरप की कई खेपें जब्त कीं। जांच में सामने आया कि कम से कम आठ बैच ऐसे थे, जिनके दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई और उन्हें वैध आपूर्ति की आड़ में सीमा क्षेत्र तक पहुंचाया गया था। कागजातों में दर्शाए गए गंतव्य और वास्तविक सप्लाई स्थानों में भारी अंतर पाया गया।

उत्तर प्रदेश में थोक दवा लाइसेंसों की फिर से जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में जारी सभी थोक दवा लाइसेंसों की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी को यह निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी दवा का दुरुपयोग न हो और उसकी सप्लाई चेन पूरी तरह पारदर्शी रहे। विशेष रूप से उन फर्मों की जांच की जा रही है, जिनकी बिक्री असामान्य रूप से अधिक पाई गई है या जिनका कारोबार सीमावर्ती राज्यों से जुड़ा हुआ है।

अभी भी फरार है मुख्य आरोपी

ईडी और अन्य एजेंसियों की सख्त कार्रवाई के बावजूद शुभम जायसवाल फिलहाल फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है और उसके संभावित ठिकानों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि शुभम के कुछ करीबी सहयोगियों से पूछताछ की जा चुकी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

स्वास्थ्य और सुरक्षा पर बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि कोडीन युक्त सिरप की इस तरह की तस्करी न केवल कानून व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह युवाओं के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालती है। बांग्लादेश सहित कई देशों में इस सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है, जिससे लत, मानसिक विकार और अपराध बढ़ते हैं। इसी वजह से भारत सरकार और जांच एजेंसियां इस तरह के मामलों को बेहद संवेदनशील मानते हुए सख्त कार्रवाई कर रही हैं।

जांच जारी, और खुलासों की संभावना

ईडी ने संकेत दिए हैं कि यह मामला अभी शुरुआती दौर में है और आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। बैंकिंग ट्रांजैक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और विदेशी संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। कुल मिलाकर, शुभम जायसवाल से जुड़ा यह मामला देश में फार्मा सेक्टर के दुरुपयोग, ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के खतरनाक गठजोड़ को उजागर करता है। आने वाले दिनों में यह जांच कई बड़े नामों को बेनकाब कर सकती है।