
यूपी कैबिनेट : सस्ती और निर्बाध बिजली पर फोकस (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP Power Supply: उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख औद्योगिक और मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत आधार के रूप में विकसित कर रही है। सरकार का मानना है कि भरोसेमंद, सस्ती और 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की सबसे अहम शर्त है। इसी रणनीति के तहत प्रदेश में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया गया है।
राज्य सरकार की औद्योगिक नीति में ऊर्जा क्षेत्र को केंद्रीय भूमिका दी गई है। उद्योगों की सबसे बड़ी जरूरत निरंतर बिजली आपूर्ति होती है। उत्पादन इकाइयों में बिजली कटौती से मशीनरी रुकती है, उत्पादन प्रभावित होता है और लागत बढ़ती है। इस समस्या को दूर करने के लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्युत अवसंरचना का विस्तार किया गया है। वर्ष 2017 से नवंबर 2025 के बीच प्रदेश में 15,87,369 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए। 33/11 केवी क्षमता वाले 765 नए सब-स्टेशन बनाए गए। 2,455 पुराने उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई। इन सुधारों से ग्रामीण से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों तक बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
सरकार ने एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर, औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब के आसपास बिजली ढांचे को विशेष रूप से मजबूत किया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में हाई-कैपेसिटी सबस्टेशन और समर्पित फीडर लगाए गए हैं। इसका मकसद साफ है,जहां उद्योग बसें, वहां बिजली की कमी न हो। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वे बिना बाधा उत्पादन कर सकते हैं।
सरकार का मानना है कि कम लागत की बिजली प्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। जब उद्योगों की ऊर्जा लागत कम होती है, तो उत्पादन लागत घटती है,उत्पाद सस्ते बनते हैं.घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा आसान होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक नीतियों में बिजली दरों को संतुलित रखने पर जोर दिया जा रहा है। निवेशकों को स्थिर दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों का सीधा असर निवेश पर भी पड़ा है। बेहतर बिजली आपूर्ति के कारण,मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए निवेश प्रस्ताव। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब का विस्तार। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और ऑटो सेक्टर में रुचि। औद्योगिक इकाइयों का कहना है कि स्थिर बिजली आपूर्ति से उत्पादन की निरंतरता बनी रहती है, जिससे परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं और लागत नियंत्रण में रहती है।
सरकार की आर्थिक रणनीति में रोजगार सृजन को सबसे ऊपर रखा गया है। उद्योगों का विस्तार सीधे तौर पर रोजगार से जुड़ा होता है। जैसे-जैसे नई इकाइयां स्थापित होंगी। तकनीकी और गैर-तकनीकी नौकरियां बढ़ेंगी। स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा। सहायक उद्योग और सेवाएं विकसित होंगी। सस्ती और निर्बाध बिजली से फैक्ट्रियों का संचालन आसान होगा, जिससे निवेशक प्रदेश में उत्पादन इकाइयां लगाने के लिए अधिक प्रेरित होंगे।
सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि बिजली को अंतिम उपभोक्ता तक कुशलता से पहुंचाना भी जरूरी है। इसके लिए हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार। स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम। फॉल्ट डिटेक्शन और त्वरित मरम्मत व्यवस्था। लाइन लॉस कम करने के प्रयास। इन कदमों से बिजली चोरी और तकनीकी हानि में कमी आई है, जिससे वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हुई है।
उत्तर प्रदेश भौगोलिक रूप से देश के मध्य में स्थित है और यहां बड़ी जनसंख्या, बाजार और श्रमशक्ति उपलब्ध है। अब मजबूत ऊर्जा ढांचा इसे मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में और आगे बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली आपूर्ति इसी तरह स्थिर रही, तो प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग,डिफेंस कॉरिडोर,टेक्सटाइल पार्क,फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख केंद्र बन सकता है।
Published on:
29 Jan 2026 07:56 pm
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